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Misc. Erotica महीन को अपने रंग में रंग दिया

 Mai Ek New Erotica Story likh raha hu jo ki puri trah se Kalpinik hai or ye Story Maheen mohe rang diya k writer Pink baby se Inspire ho kr likh raha



23-01-2026 08:06 صباحاً
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 Mai Ek New Erotica Story likh raha hu jo ki puri trah se Kalpinik hai or ye Story Maheen mohe rang diya k writer Pink baby se Inspire ho kr likh raha hu  is story ki Heroine k nam bhi Maheen rakha h to chaliye Shuru karte hai






Yaar ne Rang laga ker Badal Diya

माहीन अहमद की उम्र 27 साल थी। हैदराबाद की एक अमीर और रूढ़िवादी फैमिली से थी वो। उसके अब्बू एक बड़े बिजनेसमैन थे, जो शहर की कमेटी के मेंबर भी थे। अम्मी घर संभालती थीं, और घर में हमेशा पर्दे का माहौल रहता था।

महीन ने बचपन से और पहनना सीखा था — कॉलेज-कॉलेज में भी पूरी तरह ढकी रहती थी। शादी के बाद भी उसकी जिंदगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया। उसका शौहर फैसल 32 साल का था — दुबई में एक बड़ी कंपनी में मैनेजर। शादी को तीन साल हो गए थे, लेकिन फैसल साल में मुश्किल से चार-पांच महीने ही भारत आ पाता।

बाकी समय वीडियो कॉल्स, फोन और यादों पर गुजरता।माहीन बहुत खूबसूरत थी। गोरी चिट्टी त्वचा, जो धूप में भी चमकती। लाइट ब्राउन आँखें, जो देखने में किसी को भी बेकरार कर दें। गुलाबी होंट, जो मुस्कुराते तो मोती जैसे दाँत नजर आते। उसके बाल सिल्क जैसे मुलायम, कमर तक लंबे — लेकिन हमेशा में छिपे रहते। फिगर था 34-28-38 — ब्रेस्ट भरे-भरे, जो सलवार-कमीज में भी हल्का उभार बनाते, कमर पतली और हिप्स गोल-मटोल।

लेकिन माहीन ये सब कभी शो नहीं करती थी। वो प्रोफेशनल सूट्स या ब्रांडेड सलवार-कमीज पहनती, दुपट्टे से सीना ढककर। ऑफिस में भी लोग उसे देखते, लेकिन वो किसी से ज्यादा बात नहीं करती। टैलेंटेड थी — एक बड़ी IT कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर। मेहनती, समझदार, और हमेशा मुस्कुराती


। लेकिन दिल में एक खालीपन था — फैसल की कमी। रातें अकेली गुजरतीं, और कभी-कभी वो सोचती कि जिंदगी में और कुछ रंग क्यों नहीं?फैसल बहुत अच्छा इंसान था। गोरा, स्मार्ट, फिट बॉडी — जिम जाता था दुबई में। शादी अरेंज्ड थी, लेकिन प्यार जल्दी हो गया।

फैसल बहुत केयरिंग था — जब घर आता तो माहीन को इतना प्यार देता कि वो भूल जाती सब। रातें उनकी बहुत इंटीमेट होतीं — फैसल उसे पूरी तरह संतुष्ट करता। लेकिन अब दूरियाँ बढ़ गई थीं। माहीन पढ़ती, लेकिन मन somewhere और भटकने लगा था। वो सोचती, "ऊपरवाला मुझे माफ करना, लेकिन ये अकेलापन क्यों?"

ऑफिस में माहीन का एक को-वर्कर था — आर्यन शर्मा। 30 साल का, कट्टर फैमिली से। दिल्ली से हैदराबाद शिफ्ट हुआ था दो साल पहले। लंबा — 6 फुट, चौड़ी छाती, जिम बॉडी। रंग सांवला, लेकिन हैंडसम। डार्क आँखें, स्टाइलिश बाल, हमेशा स्माइल।

आर्यन भी सीनियर पोजिशन पर था — माहीन के साथ ही एक प्रोजेक्ट पर काम करता। शादीशुदा नहीं था, लेकिन अफेयर्स की अफवाहें थीं। आर्यन को रूढ़िवादी पर्दे में छिपी लड़कियों का क्रेज था — खासकर कंजर्वेटिव वाली। उसे मजा आता था उनकी को छूने में, लेकिन वो कभी जल्दबाजी नहीं करता।

धीरे-धीरे बातें बढ़ाता।ऑफिस में माहीन और आर्यन की टेबल पास-पास थी। शुरू में सिर्फ प्रोफेशनल बातें — "माहीन, ये कोड चेक कर लो" या "आर्यन जी, मीटिंग में क्या पॉइंट्स हैं?" लेकिन धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगीं।

आर्यन पूछता, "माहीन, तुम हमेशा क्यों पहनती हो? इतनी गर्मी में।" माहीन मुस्कुराकर कहती, "ये हमारा मजहब है आर्यन जी।

उपर वाले का हुक्म।" आर्यन हंसता, "बहुत डिसिप्लिन्ड हो तुम। मुझे तो तुम्हारी स्माइल बहुत अच्छी लगती है।

"होली का टाइम आ रहा था। ऑफिस में सब उत्साह में थे। लोग रंग, पिचकारी प्लान कर रहे थे। माहीन चुप रहती — होली उसके लिए मना थी। रंग लगाना, नाच-गाना — सब गुनाह। लेकिन आर्यन ने एक दिन लंच में कहा, "माहीन, होली में ऑफिस पार्टी है। तुम आओगी ना?

बस थोड़ा रंग लगेगा, मजा आएगा।" माहीन ने मना कर दिया, "नहीं आर्यन जी, मैं नहीं मनाती। फैसल को भी पसंद नहीं।" आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, "अरे, एक दिन तो ट्राई करो। जिंदगी में थोड़ा रंग चाहिए ना?

"उस दिन घर लौटकर माहीन सोच में पड़ गई। फैसल से वीडियो कॉल पर बात की। फैसल ने कहा, "माहीन, ऑफिस पार्टी है तो जाओ, लेकिन रंग से दूर रहना। मैं जल्द आऊंगा।" माहीन ने हाँ कहा, लेकिन मन में कुछ अजीब सा लगा।

आर्यन की बातें याद आईं — "थोड़ा रंग चाहिए।" रात को बेड पर लेटकर वो सोचती रही। उसकी जिंदगी सफेद-काली थी — घर ऑफिस, घर। कोई रंग नहीं। फैसल दूर, और मन में एक खालीपन। पहली बार उसने महसूस किया कि आर्यन की नजरें कुछ अलग थीं — सम्मान में छिपी हुई कुछ और।अगले दिन ऑफिस में आर्यन ने फिर पूछा, "सोचा होली के बारे में?"

माहीन ने शरमाकर सिर झुका लिया। "देखती हूँ।" आर्यन की आँखों में चमक आई। वो जानता था — धीरे-धीरे रंग लगेगा।

माहीन घर गई। अम्मी से फोन पर बात की। अम्मी ने कहा, "बेटी, त्योहार से दूर रहो। " लेकिन माहीन का मन नहीं माना। वो ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हुई। उतारा। बाल खोले। आईने में खुद को देखा। "क्या मैं सच में इतनी खूबसूरत हूँ?" पहली बार उसने सोचा। फैसल की याद आई, लेकिन आर्यन की स्माइल भी। दिल में एक हल्की सी उथल-पुथल। उपरवाले से माफी मांगी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी


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