इस देसी मौसी सेक्स कहानी में पढ़िए कि कैसे मैंने अपनी सेक्सी मौसी के साथ सेक्स करके उनकी वर्जिनिटी को तोड़ा और साथ मैंने भी अपनी चढ़ती जवानी में ही अपनी वर्जिनिटी लूज़ की.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मनोज है.
मैं पिछले ही साल अठारह वर्ष का हो गया था.
आप समझ ही सकते होंगे कि मैं अभी कितना यंग हूँ.
मैं शर्मीला हूँ तो लड़कियों से हमेशा दूर रहता हूँ.
हालाँकि मुझे लगता है कि लड़कियां ज़रूर ही मेरे बारे में सोचती होंगी.
परन्तु मैंने कभी किसी से खुल कर बात नहीं की थी.
सिर्फ जितना ज़रूरी होता था, मैं उतना ही बोलता था.
लेकिन फिर भी मैं सभी लड़कियों को बाथरूम में जाने के बाद रोज़ याद करके हिलाता था.
अब मैं रहता भी दिल्ली में था तो आप खुद ही सोच लो कि उधर की लड़कियों की क्या क्वालिटी होती है!
इस सबके ऊपर … मैं बिहार का हूँ, अपने गांव में भी बहुत सी हॉट लड़कियों की याद में मुठ मारता हूँ.
गांव में मेरा बहुत आदर होता है.
क्यूंकि मैं गांव से उठ कर शहर जाकर अच्छे से पढ़ाई करता था.
स्कूल की मेरी सफलता की मिसाल गांव के सभी युवा लड़के लड़कियों को दी जाती थी.
अब इस इस देसी मौसी सेक्स कहानी की हीरोइन की बात करते हैं.
वे मेरी मौसी हैं.
वैसे तो उन्हें मैं चचेरी मौसी कहूँ तो ज्यादा सही होगा.
दरअसल वे मेरी मम्मी की चाची की लड़की हैं इसलिए मौसी तो वे हैं लेकिन मुझसे कुछ खास बड़ी नहीं हैं.
उनकी उम्र अभी 22 साल की ही है. भरपूर जवान माल लौंडिया सरीखी दिखती हैं.
मौसी का रंग थोड़ा सांवला सा है लेकिन उनकी फिगर गजब की कसी हुई है.
उनके स्तन और गांड का साइज एक सामान्य लड़की के जितना ही था, पर वे काफी आकर्षक दिखती हैं.
मौसी का नाम सुजाता है.
मेरी मम्मी की खुद की कोई बहन नहीं है. सिर्फ एक यह चचेरी बहन ही हैं.
मौसी की अदाएं काफी सेक्सी हैं.
जब भी मैं गांव जाता था तो हमेशा ही किसी न किसी बहाने से मैं उनसे बातें करने की चेष्टा करता रहता था जिससे मैं उनके करीब रह सकूँ.
यह अभी हाल ही की बात है.
इस दिसंबर में मैं गांव गया हुआ था.
इस बार मैं लगभग एक साल बाद गांव गया था.
हमारे गांव में एक रिवाज़ है कि जब भी कोई मेहमान बहुत ही दूर से आया हो तो घर की औरतें घर आए मर्दों के पांवों को धोकर उन पर तेल लगाती हैं.
मेरी मौसी ने मुझे देखा तो वे पानी और तेल लेकर आ गईं.
मैं खाट पर बैठ गया.
मौसी नीचे मेरे पांव तक झुक कर मेरे पैरों को धोने लगीं.
झुकने से उनका दुपट्टा सरक गया और वह एकदम से सरक कर नीचे आ गया.
तभी मैंने उनके क्लीवेज पर नज़र डालनी शुरू कर दी.
मेरा लंड थोड़ा थोड़ा कड़क होने लगा.
इतनी खूबसूरत महिला को इतने पास से देखकर मुझे और मेरे लौड़े को तो मज़ा ही आ गया था.
तभी मौसी को किसी ने आवाज़ लगाई.
मौसी बैठी बैठी ही मुड़ कर देखने लगीं.
तभी इत्तफाक से मेरी जेब से रूमाल निकल कर नीचे गिर गया और वह मौसी की एक साइड में गिर गया.
मैं थोड़ा झुक कर रूमाल उठाने लगा तो मेरा लंड मौसी के आगे किए हुए हाथ से जा टकराया.
मुझे उस समय जो आनन्द मिला, उसके कारण मेरा लंड और बड़ा होकर पैंट में फूल गया और उसका उभार स्पष्ट तौर पर नज़र आने लगा.
तभी मौसी ने किसी सख्त चीज जैसे लंड से अपने हाथ का टच महसूस किया तो वे मुड़ी और उन्हें यह दृश्य दिखाई पड़ गया.
मेरी बेशर्मी का आलम अभी भी अपनी औकात में नहीं था.
जब मैं मौसी के देखने के बाद भी उसके क्लीवेज को घूरता रहा, तो मौसी ने मेरी नज़रों को पढ़ लिया.
तभी मेरी नजरें उनकी आंखों से जा मिलीं.
मुझे समझ आ गया कि वे मुझे ही देख रही थीं और मेरी आंखों का पीछा करते हुए उन्होंने समझ लिया था कि मैं उनके दूध देख रहा हूँ.
अब कमाल यह हुआ कि वे भी मेरी तरह बेशर्म थीं, तो उन्होंने अपना वक्ष स्थल यूं ही खुला रखा और चेहरा नीचे करके मेरे पांवों में तेल लगाना शुरू कर दिया.
मैं उनका चेहरा और दूध घाटी को ही देखता रहा.
तभी उनके चेहरे पर एक हल्की सी शर्मीली सी मुस्कान आ गई.
उन्हें शायद शर्म के साथ साथ हंसी भी आ रही थी.
इधर मेरा लंड तो मानो शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था.
कुछ देर बाद मौसी हट गईं और मैं अपने लौड़े को ठंडा करने के लिए बाथरूम देखने लगा.
फिर मैं बाथरूम में चल गया और उधर जाकर तसल्ली से अपने लौड़े को निकाल कर मौसी के मम्मों को याद करके हिलाने लगा.
मैं यह कल्पना करता हुआ लंड सहला रहा था कि मौसी मेरे लंड पर तेल लगा रही हैं और वे अपने मम्मों को भी मेरे लंड पर फेर रही हैं.
तभी बाहर से मेरी मम्मी की आवाज़ आयी- बेटा, ज़रा बाजार जाकर मेरी चाची के लिए एक ड्रेस ले आओ! मुझे उनसे मिलने जाना है.
मेरी मम्मी अपनी चाची यानी सुजाता मौसी की मम्मी से ख़ास लगाव रखती थीं.
मैंने कहा- ठीक है मम्मी.
मैंने बाजार जाकर उधर से एक सुन्दर सी साड़ी खरीद ली और उसी समय अपना दिमाग लगा कर मौसी के लिए भी एक सुनहली जरी वाला सूट और लैगिंग्स ले आया.
जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि मम्मी घर पर नहीं थीं.
मैंने सोचा कि ज़रूर वे अपनी चाची के घर गयी होंगी.
मैं चाची के घर पहुंचा और देखा कि सच में वे वहीं थीं.
मैं मम्मी के बाजू में जाकर बैठ गया.
बाहर से ठंडी हवा आ रही थी तो मौसम बड़ा खुशगवार हो गया था.
तभी मेरी नज़र अपनी मौसी पर गयी, जो खाट पर लेटी हुई थीं.
उनकी चूचियों की क्लीवेज उस वक्त और भी डीप दिख रही थी और उनकी कुर्ती भी पेट के पास से थोड़ी ऊपर को उठीं हुई थी.
उसी कारण से उनकी कमर नज़र आ रही थी.
कुर्ती के नीचे उन्होंने लैगिंग्स पहनी थी तो कसी हुई लैगिंग्स के कारण उनकी रसीली गांड भी चिपकी सी नज़र आ रही थी.
वह सब देख कर मेरा लंड एक बार फिर से नमस्कार करने लगा.
मैंने अपना सरिया अपने साथ लाए ड्रेसों के थैले से छिपा लिया.
वह पन्नी का थैला था तो उसमें से कुड़कुड़ की आवाज आ रही थी.
पन्नी की आवाज़ से मेरी नानी यानी मेरी मम्मी की चाची ने पूछ ही लिया- क्या हुआ बेटा?
तब मेरी माँ ने मुझसे थैला लेकर उन्हें वह तोहफा पकड़ा दिया.
उन्होंने खोल कर देखा तो उसमें साड़ी देख कर मेरी मम्मी और नानी दोनों को पसंद आ गई.
तभी मेरी मम्मी ने और नानी ने एक साथ पूछा- यह सूट और लैगिंग्स किसके लिए लाया है?
तो मैंने कहा- मौसी के लिए.
वे दोनों मुस्कुराने लगीं.
नानी ने सुजाता मौसी को जगाया.
वे अंगड़ाई लेती हुई उठीं तो बड़ी सेक्सी लग रही थीं.
तभी उन्होंने मुझे देखा तो वे फिर से हंस दीं.
मैंने उन्हें जब वह ड्रेस दिया तो वे खुश हो गईं.
वह ड्रेस काफी सुन्दर और महंगा था.
उन तीनों ने उस शाम मेरी बड़ी सराहना की.
मैं मौसी के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर सातवें आसमान पर था.
इससे हुआ यह कि मौसी मेरी तरफ आकर्षित हो गईं.
हम दोनों के बीच लंबी लंबी बातें होने लगीं और काफी सहजता आ गई.
अब मैं डायरेक्ट उस दिन की बात करता हूँ, जब मुझे और उन्हें चुदाई का आनन्द मिला.
हुआ ये कि उस दिन दोपहर का समय था, मेरी मम्मी ने मुझे अपनी मौसी के साथ जाकर खेतों को देख कर और उधर घूम कर आने के लिए कहा.
हमारे नाना के पास गांव में काफी ज़मीन है, तो उन्हीं खेतों की सैर करने का प्लान बन गया था.
मैं बड़ा खुश था कि सुजाता मौसी के साथ आज अकेले में इतना समय बिताने का मौका मिल गया था.
उस दिन सोने पर सुहागा यह था कि सुजाता मौसी ने मेरा दिया हुआ वही सुन्दर सा सूट पहना हुआ था.
वे मेरे आने के इंतज़ार में दरवाज़े के पास खड़ी थीं.
मैं उनको देख कर मुस्कुरा पड़ा.
वे भी मुस्कुराने लगीं.
फिर हम दोनों खेत देखने निकल पड़े.
मैं कोई न कोई बहाना करके उनसे थोड़ा पीछे चल रहा था जिससे मैं उनकी मटकती गांड को देख कर अपना लंड सहला सकता था.
सुनसान रास्ते पर इस प्रकार से चलने में और साथ में इतनी सेक्सी माल के साथ सैर करने में जन्नत का ही सुख मिल रहा था.
रास्ते में कुछ चढ़ाई थी तो मैं चढ़ाई चढ़ते समय उनकी गांड को काफी करीब से देख पा रहा था.
मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
मैंने सोचा कि पीछे से मौसी की मटकती गांड की रिकॉर्डिंग कर लेता हूँ, फिर जब अकेले में बैठूंगा तो देखकर लंड हिला लूंगा.
उस वक्त मस्त हवा भी चल रही थी तो जब भी हवा का झौंका आता तो उनकी कुर्ती उड़ने लगती और उनकी लैगिंग्स से चिपकी हुई टाइट गांड नज़र आ जाती.
मुझे तो मज़ा ही आ गया था.
तभी हम दोनों अपने खेत के बीचों-बीच बने एक मकान के पास आ गए.
सुजाता मौसी ने कहा- चलो अन्दर चलकर थोड़ी देर आराम कर लेते हैं.
मेरे लिए मौसी के साथ रुकना ही जन्नत समान था.
मैंने खुशी खुशी घर के अन्दर कदम रखा.
अन्दर कोई भी नहीं था.
मैं और खुश … कम-से-कम अगर मौसी को पास से घूरूंगा तो कोई देखेगा भी नहीं.
मैं अन्दर आ गया.
उसी वक्त मौसी ने जो किया, उससे मैं एकदम से डर गया.
मौसी ने दरवाज़े के ऊपर लगी सिटकनी को लगाकर बंद कर दिया.
उन्होंने बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में मुझसे कहा- सिर्फ घूरते ही रहोगे या कुछ करोगे भी. मैं तो तैयार हूँ.
मैं कांपने लगा और मुँह उठा कर पूछा- क..क्या करना हैं?
सुजाता मौसी हंस दीं और मेरे पास आकर मेरे होंठों पर किस करती हुई बोलीं- यह करना है … हैं न!
मैं हक्का-बक्का रह गया.
तभी उन्होंने अंगड़ाई लेते हुए कहा- मैं भी तुम्हारे चिलगोजे को देखकर उत्तेजित हो गयी हूँ. उस दिन साला काफी फूल रहा था.
उन्होंने मेरे लंड को चिलगोजा कहा, तो मैं शर्मा गया.
मेरी नजरों में भी अब वासना भर गई थी.
मैं सोच कर काफी खुश था कि मौसी के मन में भी मेरे लिए ऐसे मादक विचार आ गए हैं.
जब उन्होंने दुबारा मुझे चूमा, तो मैं भी बिखर गया.
बस कुछ ही देर में सुजाता मौसी की धीमी धीमी प्यारी सी आहों और कराहों से कमरा गूंजने लगा.
मैं उनकी लैगिंग्स के ऊपर से उनकी गांड चाट रहा था. मेरे लिए तो वह इलाका जन्नत था.
उनकी सॉफ्ट सॉफ्ट गांड के तकियों के बीच में मेरा नाक मुँह और जीभ लगातार चलने लगे थे.
काफी देर तक एक दूसरे को चूमने चूसने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटाया और अपनी गांड मेरे तरफ रख दी.
मतलब उन्होंने 69 का पोज बना लिया था.
दूसरी तरफ उनका मुँह था तो उन्होंने मेरे लंड को मेरी पैंट से बाहर निकाल लिया और वे लौड़े को ऐसे चूसने लगीं जैसे वे कोई लॉलीपॉप को चूस रही हों.
उनके छोटे से मुँह में मेरा भारी भरकम लंड घुस निकल रहा था.
मैंने पहले मौसी की लैगिंग्स सहित पैंटी को नीचे खिसकाया और उनकी चूत को मस्ती से चाटना शुरू कर दी.
वे ख़ुशी से चिल्ला उठीं और मेरा लंड उनके मुँह में कड़ा हो गया.
मुझे उस वक्त यह सब इस देसी मौसी सेक्स एक सपना लग रहा था.
थोड़ी देर बाद वे डॉगी बन कर बेड पर आ गई थीं.
उन्होंने मुझसे पूछा- क्या तुम वर्जिन हो?
मैंने कहा- हां! क्या आप भी?
उन्होंने सर हिलाया और कहा- हां और तुम थोड़ा धीरे धीरे से करना.
मैंने आगे की ओर झुककर उन्हें किस करते हुए कहा- चिंता मत करिये सुजाता मौसी, मैं आपकी पुसी का ख़ास ख्याल रखूँगा.
यह कहते हुए मैंने पोज सैट किया और उनकी चुत में अपना डंडा पेल दिया.
पूरा कमरा मौसी की आवाज़ से गूंज उठा.
दोपहर के समय खेत के आस-पास कोई नहीं आता था तो वे भी बिंदास थीं.
मैंने मौसी को डॉगी स्टाइल में बहुत देर तक चोदा.
वे शायद झड़ गईं और निढाल होकर गिर गईं.
अब मैं नीचे लेट गया और अपनी प्यारी सी मौसी को बांहों में भर कर अपने लंड पर बिठा कर उनका गेम बजाने लगा.
इस पोज में अब उनको भी काफी मज़ा आ रहा था.
मैंने उनसे पूछा- कैसा लग रहा है सुजाता मौसी … मेरे एनाकोंडा से?
उन्होंने कहा- हां मैंने चिलगोजा गलत कह दिया था यार … तेरा हथियार तो बड़ा मोटा और काफी लम्बा सा एनाकोंडा ही है. इसने मेरे बिल में घुस कर मेरे बिल को बड़ा कर दिया है साले मौसी चोद!
मैंने उनके मुँह से मौसी चोद गाली सुनी तो हंस दिया और उनके दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
वे भी अपनी गांड उठा उठा कर लंड पर दंड पेल रही थीं.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें बेड पर चित लेटाया और उनकी चूत को चाट कर और उंगलियां घुसा कर उनका पानी पी लिया.
मैं अभी झड़ा नहीं था तो मैंने वापस अपना एनाकोंडा उनकी चुत में छोड़ दिया.
वे चिल्लाती रहीं- आह आह आआह उह उह्ह्ह … मनोज साले मौसी चोद बन गया है तू!
मैंने उनको चोदते-चोदते काफी चुंबन किए.
‘आप वही शर्मीली मौसी हो, जो मेरे लंड को खड़ा देखकर शर्मा गयी थीं और आज आप उसी लंड की सवारी कर रही हो!’
उन्होंने कहा- कल फिर से वही तेल लेकर आऊंगी और तेरे लंड पर लगाकर अपनी गांड मरवाउंगी तुझसे … साले मौसी चोद!
मैंने उनके स्तनों को अपनी जीभ से टटोलना शुरू किया, उससे उनकी उत्तेजना और बढ़ गयी.
अब मैंने उन्हें पेट के बल लेटा दिया और उन्हें पीछे से चोदने लगा.
वे काफी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां भरने लगीं.
काफी देर तक उन्हें काफी मज़े देने के बाद मैंने उन्हें सीधा किया और उनके मुँह में अपने लंड की मलाई छोड़ दी.
वे लंड की मलाई खा गईं.
अब हम दोनों काफी थक गए थे तो यूं ही नंगे ही सो गए.
आधा घंटा बाद उठकर हम दोनों ने चुदाई का एक और सेशन चालू किया.
फिर दो बार की चुदाई के बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और शाम के समय जब हम लोग घर वापस लौटे तो मेरी और सुजाता दोनों की मम्मी हमारा इंतज़ार कर रही थीं.
मेरी माँ ने पूछा- कैसा रही खेतों की सैर?
सुजाता मौसी ने जवाब दिया- अरे दीदी, काफी मज़ा आया.
फिर मेरी तरफ देखकर मौसी स्माइल करने लगीं.
मैंने भी स्माइल कर दिया.
नानी ने यह सब देखकर कहा- दोनों में बहुत खेल चले रहे हैं? चलो अच्छा है. लेकिन आज मैं भूल ही गयी तुम लोगों को बताना. बल्कि उधर जाते समय ही बताना चाहिए था मुझे कुछ चिट्ठियां भिजवाना थीं कि हमारे खेतों के बाद ही डाकघर है, उधर डालते आना. कल तुम दोनों दोबारा जा सकते हो क्या?
मैंने और सुजाता मौसी दोनों ने एक ही साथ कहा- हां बिल्कुल.
मम्मी और नानी दोनों हल्का सा चौक गईं.
अगले दिन सारी चिट्ठी आदि लेकर मौसी ने तेल का एक डब्बा भी ले लिया.
फिर हम दोनों ने चिट्ठियां पोस्ट करने के बाद शाम तक गांड मारने का खेल खेला यानि ऐनल सेक्स.
पर वह सेक्स कहानी आपके पत्र मिलने के बाद लिखने का सोचूँगा.
आप मुझे अपने विचार बताएं इस इस देसी मौसी सेक्स कहानी पर.