न्यूड लेडी सेक्स स्टोरी में मैं अपनी छत से सामने वाले घर में खुले बाथरूम में एक औरत को रोज नंगी नहाती देखता था और उसे चोदना चाहता था. एक दिन उसने खुद इशारा कर दिया.
नमस्कार दोस्तो!
मैं कामेंद्र दिल्ली से अब एक नई कहानी लेकर आया हूं।
यह न्यूड लेडी सेक्स स्टोरी उस समय की है जब मैं सास, जेठानी, ननद को चोद रहा था।
यह सब आपने मेरी पिछली कहानी
पड़ोसन भाभी और उनकी देवरानी को चोदा
में पढ़ा था.
मेरी नजर एक शादीशुदा महिला पर पड़ी जो घूंघट डाल कर मेरे आगे चल रही थी।
उसके खुले हाथ और पैर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो दूध जैसी गोरी थी।
उसे देखकर मेरा मन कर रहा था कि कब इसके चेहरे के दीदार होंगे।
मैं अपने घर की छत पर गया तो देखा कि पड़ोस में अंकल रहते थे।
अभी थोड़ा ही समय हुआ था उनको मकान लिए हुए।
उनका मकान हमारे घर के बगल में एक खाली प्लॉट छोड़कर था।
उनके मकान में सिर्फ रसोई, एक कमरा और बाहर का मेन दरवाजा था।
स्नानकक्ष में कोई दरवाजा नहीं था, सिर्फ घुसलखाना में दरवाजा था।
हमारा मकान दो मंजिल बना हुआ था। इस कारण उनके कमरे, रसोई, स्नानकक्ष में कौन क्या कर रहा है सब दिखाई देता था।
अंकल उस औरत के जेठ लगते थे।
यह मुझे बाद में पता चला।
वो बोले, “मैं जा रहा हूं, तुम सब नहा लो।”
मैं ये सब समझ नहीं पाया कि अंकल क्या बोल गए।
तभी मैंने देखा कि पहले उस औरत ने कुल्ला किया, फिर नहाने के लिए जैसे ही उसने घूंघट उठाया, मैं तो जैसे होश में नहीं रहा।
इतनी सुंदर थी जैसे कोई अप्सरा!
उसने अपनी जेठानी को हैंडपंप से पानी बाल्टी में भरने के लिए कहा।
पहले भी उसने बाल्टी भर ली थी।
उसने नहाने के लिए साड़ी खोली और उसे उतारकर नीचे डाल दी।
फिर उसने अपना ब्लाउज उतारा।
फिर उसने अपनी ब्रा उतारी।
उस समय उसका रंग गोरा, लंबाई भी सही थी। माप भी 32, 34, 36 था।
उसके स्तन बाहर निकलकर सामने आए तो उन्हें देखकर मन किया कि कब वो मुझे अपने पास बुलाकर लंड को पकड़कर अपनी जीभ से चाटकर साफ करेगी।
उसके स्तन के पास एक लहसन का निशान था जो ऐसे लग रहा था जैसे चांद पर दाग हो।
उसकी चूचियों को पकड़कर उसे चोदने को मन कर रहा था।
उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोला और उससे अपने स्तन को ढककर नहाने लगी।
पेटीकोट सफेद होने से उसके भीगते हुए उरोज साफ दिख रहे थे।
थोड़ी देर बाद उसने साबुन लगाना शुरू किया और अपने हाथों से अपने स्तन को साबुन लगाकर मलने लगी।
फिर अपने पूरे शरीर पर लगाने लगी, अपनी जांघ और चूत पर लगाकर अपने मुंह पर लगाया।
फिर पानी डालकर अपने शरीर पर से साबुन साफ करने लगी और नहाकर कपड़े बदलने लगी।
उसने अपने सिर से दूसरा पेटीकोट डाला और नीचे वाले पेटीकोट को उतारते समय मुझे उसकी चूत के दर्शन हुए जो झांटों के जंगल से ढकी हुई थी और पानी से नहाने के कारण भीगी हुई थी।
उसने ऊपर से डाला पेटीकोट कमर पर नाड़े से बांध लिया और अपने स्तन ब्रा से ढक लिए और अपने कपड़े भिगोकर अंदर कमरे में चली गई।
घर में कम जगह होने से वो जो जेठानी, जिसको मैंने इससे पहले चोदा था, उसके यहां सोती थी।
खाना नहाना इसी घर में होता था पर सोना उसके घर में यानी जेठानी के घर में।
ऐसे ही रोज होने लगा।
अंकल जब भी जाते वो बोल देते, “नहा लो, मैं जा रहा हूं।”
मैंने अब एक जुगाड़ किया।
उसको नहाते हुए देखने के लिए मैंने 9 ईंट में 4 दाईं, 4 बाईं और एक ईंट को उन 8 ईंटों के ऊपर रखकर ऐसी जगह बनाई जिसमें से मैं उसको आराम से नहाते हुए देख सकूं पर मुझे कोई नहीं देख पाए।
मैं उन ईंटों के द्वारा बनी हुई जगह से रोज उसे निर्वस्त्र नहाते हुए देखता था।
ऐसा कई दिन चला।
एक दिन उसे लगा जैसे कोई उसे नहाते हुए देख रहा है।
उसने अपनी जेठानी से कहा, “दीदी! ऐसा लग रहा है जैसे कोई देख रहा है।”
उसने ऊपर की तरफ देखा पर मैं तभी नीचे होकर छुप गया।
थोड़ी देर बाद फिर से मैं उसके नंगे बदन को देखकर मुठ मारी।
और उसके अंदर जाते ही मैं नीचे चला गया।
एक दिन ऐसे ही मैं उसके नहाने का इंतजार कर रहा था पर देखा कि आज उसके कपड़े न भीगे हुए बाल्टी में डाल रखे थे न रस्सी पर सुखाए हुए।
तभी अचानक वो आई और अपने कपड़े उतारकर नहाने लगी।
आज उसने एक अजीब हरकत की।
एक तो उसने अपने शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं डाल रखा था और दूसरी आज उसने मेरे सामने बैठकर पेशाब किया।
न्यूड लेडी की चूत पर घने जंगलों का घेराव था।
जैसे ही उसने मूतना शुरू किया, उसका योनि द्वार खुला और उसमें से झरने की तरह पेशाब बहने लगा।
उसने मेरे सामने अपने वक्ष, योनि और पूरे शरीर पर साबुन लगाया और नहाने के बाद अपनी चूत में सरसों का तेल लगाकर मुठ मारी।
कुछ देर बाद उसका पानी निकल गया।
उसे पता चल चुका था कि मैं उसको देख रहा हूं इसलिए कोई शर्म नहीं की।
उसने और मेरे सामने नंगी ही अपने कमरे में चली गई और ऊपर मेरे तरफ देखकर आंख मार दी!
इतने में अंदर से सिर्फ पेटीकोट पहनकर आई और खुले स्तन दिखाकर कपड़े सुखाने लगी।
इतने में उसके जेठ का छोटा लड़के ने आवाज दी, “चाची! गेट खोलना।”
वो बोली, “अभी आती हूं!”
यह कहकर ब्रा और ब्लाउज पहनकर गेट खोलने आई, “क्या हुआ?”
लड़का बोला, “मुझे अपनी किताब और कॉपी चाहिए। मुझे ट्यूशन पढ़ने जाना है।”
वो बोली, “कितनी देर में आओगे तुम?”
लड़का बोला, “4 घंटे तो लग ही जाएंगे।”
वो लड़का फिर बोला, “क्यों? क्या हुआ?”
वो बोली, “कुछ नहीं। तब तक मैं आराम से सो लूंगी।”
फिर उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और मुझे नीचे आने का इशारा कर दिया।
मैं नीचे आ गया और उसका दरवाजा खटखटाया।
उसने मुझे जल्दी से अंदर घुसाया और दरवाजा बंद किया।
मैंने उसकी मांग में सिंदूर भरा और उसको अपने हाथों से मंगलसूत्र पहनाया क्योंकि जब मैं किसी पराई औरत से संभोग करता हूं तब उसे अपनी अर्धांगिनी बनाकर उन्हें अपना बना लेता हूं।
अब मैंने उसका पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसके नीचे का हिस्सा नंगा कर दिया क्योंकि उसने पेटीकोट के नीचे कुछ भी नहीं पहना था।
मैं उसकी योनि को सहलाने लगा और उसके अंदर एक फिर दो उंगली घुसाने लगा।
मैंने उसकी योनि में जीभ से चाटना शुरू किया।
वो सिसकारी भरने लगी।
वो “आ आ ऐ!” ऐसी आवाज निकालने लगी और बोली, “खा जाओ मेरी चूत को और पी जाओ मेरी चूत का पानी!”
मैं बोला, “क्यों? आज तक कभी चोदा नहीं तुम्हारे पति ने?”
वो बोली, “उनका खड़ा ही नहीं होता इसलिए मैं मां नहीं बन पाई।”
ऐसा बोलते हुए वो स्खलित हो गई और सारा रस मैंने पी लिया।
अभी उसकी चूत कुंवारी जैसी थी जैसे किसी मर्द से कभी संभोग न हुआ हो।
फिर मैं उसके स्तन को पकड़कर अपने हाथ से दबाने निचोड़ने लगा और उसके स्तन को चूसने लगा।
वो बोली, “पी जाओ मेरे दूध को! आज मैं तुम्हारी पत्नी हूं। अब ज्यादा मत तड़पाओ और मुझे चोदकर अपने वीर्य से मेरी चूत लबालब भर दो और मुझे अपने बच्चे की मां बना दो!”
उसने मेरे सारे कपड़े उतारकर फेंक दिए और मुझे चूमने लगी।
उसने कहा, “बाप रे! इतना बड़ा मोटा और लंबा काला लंड पहली बार किसी पराए मर्द का देखा है!”
उसने अपने हाथों से पकड़कर उसे अपने मुंह में डालकर आगे पीछे करने लगी।
और कई देर बाद उसके मुंह को चोदने से मेरा पूरा वीर्य उसके मुंह में भर गया।
वो पूरा पी गई और मेरा लंड चाटकर अपनी जीभ से साफ कर दिया।
अब वो लेट गई और अपनी टांगें फैलाकर अपनी चूत को अपने हाथों से पकड़कर खोलने लगी।
मैंने उसके और अपने रस का चिकनाहट का फायदा उठाकर अपने लंड को एक ही बार में उसकी चूत में अंदर तक डाल दिया।
वो चीख पड़ी!
उसकी चूत की झिल्ली अभी पूरी नहीं फटी थी इसलिए उसके फटते ही उसमें से खून निकलने लगा और उसका दर्द कम होने लगा।
उसे मजा आने लगा।
वो आगे पीछे होने लगी।
वो बोली, “आज जी भरके चोदो मुझे! अपने वीर्य की एक एक बूंद टपका दो मेरी चूत में!”
उस समय ऐसा लग रहा था जैसे किसी अप्सरा के संग संभोग कर रहा हूं।
चोदते हुए वो भी कई बार स्खलित हो गई थी और मैं भी छूटने वाला था।
मैंने कहा, “कहां डालूं?”
वो बोली, “मेरी चूत में!”
मैंने बोला, “आंटी!”
वो बोली, “आंटी नहीं रंभा! आज से रंभा!”
अकेले में मेरा सारा वीर्य उसकी चूत में भर गया।
वो बोली, “तुम क्या सोच रहे थे कि मुझे पता नहीं चला कि तुम मुझे नंगी नहाते हुए देख रहे थे कई दिनों से। साथ ही यह कि तुम मेरी बहू नीजू, उसकी बेटी भावनी को चोदते हो। उनको भी मां बनाने वाले हो अपने बच्चों की।”
उसके बाद कई बार चारों को ढंग से चोदा और नौ महीने बाद नीजू के दो लड़के, जेठानी का लड़का और सास के एक लड़की पैदा हुई।
न्यूड लेडी सेक्स स्टोरी कैसी लगी?
नमस्कार दोस्तो!
मैं कामेंद्र दिल्ली से अब एक नई कहानी लेकर आया हूं।
यह न्यूड लेडी सेक्स स्टोरी उस समय की है जब मैं सास, जेठानी, ननद को चोद रहा था।
यह सब आपने मेरी पिछली कहानी
पड़ोसन भाभी और उनकी देवरानी को चोदा
में पढ़ा था.
मेरी नजर एक शादीशुदा महिला पर पड़ी जो घूंघट डाल कर मेरे आगे चल रही थी।
उसके खुले हाथ और पैर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो दूध जैसी गोरी थी।
उसे देखकर मेरा मन कर रहा था कि कब इसके चेहरे के दीदार होंगे।
मैं अपने घर की छत पर गया तो देखा कि पड़ोस में अंकल रहते थे।
अभी थोड़ा ही समय हुआ था उनको मकान लिए हुए।
उनका मकान हमारे घर के बगल में एक खाली प्लॉट छोड़कर था।
उनके मकान में सिर्फ रसोई, एक कमरा और बाहर का मेन दरवाजा था।
स्नानकक्ष में कोई दरवाजा नहीं था, सिर्फ घुसलखाना में दरवाजा था।
हमारा मकान दो मंजिल बना हुआ था। इस कारण उनके कमरे, रसोई, स्नानकक्ष में कौन क्या कर रहा है सब दिखाई देता था।
अंकल उस औरत के जेठ लगते थे।
यह मुझे बाद में पता चला।
वो बोले, “मैं जा रहा हूं, तुम सब नहा लो।”
मैं ये सब समझ नहीं पाया कि अंकल क्या बोल गए।
तभी मैंने देखा कि पहले उस औरत ने कुल्ला किया, फिर नहाने के लिए जैसे ही उसने घूंघट उठाया, मैं तो जैसे होश में नहीं रहा।
इतनी सुंदर थी जैसे कोई अप्सरा!
उसने अपनी जेठानी को हैंडपंप से पानी बाल्टी में भरने के लिए कहा।
पहले भी उसने बाल्टी भर ली थी।
उसने नहाने के लिए साड़ी खोली और उसे उतारकर नीचे डाल दी।
फिर उसने अपना ब्लाउज उतारा।
फिर उसने अपनी ब्रा उतारी।
उस समय उसका रंग गोरा, लंबाई भी सही थी। माप भी 32, 34, 36 था।
उसके स्तन बाहर निकलकर सामने आए तो उन्हें देखकर मन किया कि कब वो मुझे अपने पास बुलाकर लंड को पकड़कर अपनी जीभ से चाटकर साफ करेगी।
उसके स्तन के पास एक लहसन का निशान था जो ऐसे लग रहा था जैसे चांद पर दाग हो।
उसकी चूचियों को पकड़कर उसे चोदने को मन कर रहा था।
उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोला और उससे अपने स्तन को ढककर नहाने लगी।
पेटीकोट सफेद होने से उसके भीगते हुए उरोज साफ दिख रहे थे।
थोड़ी देर बाद उसने साबुन लगाना शुरू किया और अपने हाथों से अपने स्तन को साबुन लगाकर मलने लगी।
फिर अपने पूरे शरीर पर लगाने लगी, अपनी जांघ और चूत पर लगाकर अपने मुंह पर लगाया।
फिर पानी डालकर अपने शरीर पर से साबुन साफ करने लगी और नहाकर कपड़े बदलने लगी।
उसने अपने सिर से दूसरा पेटीकोट डाला और नीचे वाले पेटीकोट को उतारते समय मुझे उसकी चूत के दर्शन हुए जो झांटों के जंगल से ढकी हुई थी और पानी से नहाने के कारण भीगी हुई थी।
उसने ऊपर से डाला पेटीकोट कमर पर नाड़े से बांध लिया और अपने स्तन ब्रा से ढक लिए और अपने कपड़े भिगोकर अंदर कमरे में चली गई।
घर में कम जगह होने से वो जो जेठानी, जिसको मैंने इससे पहले चोदा था, उसके यहां सोती थी।
खाना नहाना इसी घर में होता था पर सोना उसके घर में यानी जेठानी के घर में।
ऐसे ही रोज होने लगा।
अंकल जब भी जाते वो बोल देते, “नहा लो, मैं जा रहा हूं।”
मैंने अब एक जुगाड़ किया।
उसको नहाते हुए देखने के लिए मैंने 9 ईंट में 4 दाईं, 4 बाईं और एक ईंट को उन 8 ईंटों के ऊपर रखकर ऐसी जगह बनाई जिसमें से मैं उसको आराम से नहाते हुए देख सकूं पर मुझे कोई नहीं देख पाए।
मैं उन ईंटों के द्वारा बनी हुई जगह से रोज उसे निर्वस्त्र नहाते हुए देखता था।
ऐसा कई दिन चला।
एक दिन उसे लगा जैसे कोई उसे नहाते हुए देख रहा है।
उसने अपनी जेठानी से कहा, “दीदी! ऐसा लग रहा है जैसे कोई देख रहा है।”
उसने ऊपर की तरफ देखा पर मैं तभी नीचे होकर छुप गया।
थोड़ी देर बाद फिर से मैं उसके नंगे बदन को देखकर मुठ मारी।
और उसके अंदर जाते ही मैं नीचे चला गया।
एक दिन ऐसे ही मैं उसके नहाने का इंतजार कर रहा था पर देखा कि आज उसके कपड़े न भीगे हुए बाल्टी में डाल रखे थे न रस्सी पर सुखाए हुए।
तभी अचानक वो आई और अपने कपड़े उतारकर नहाने लगी।
आज उसने एक अजीब हरकत की।
एक तो उसने अपने शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं डाल रखा था और दूसरी आज उसने मेरे सामने बैठकर पेशाब किया।
न्यूड लेडी की चूत पर घने जंगलों का घेराव था।
जैसे ही उसने मूतना शुरू किया, उसका योनि द्वार खुला और उसमें से झरने की तरह पेशाब बहने लगा।
उसने मेरे सामने अपने वक्ष, योनि और पूरे शरीर पर साबुन लगाया और नहाने के बाद अपनी चूत में सरसों का तेल लगाकर मुठ मारी।
कुछ देर बाद उसका पानी निकल गया।
उसे पता चल चुका था कि मैं उसको देख रहा हूं इसलिए कोई शर्म नहीं की।
उसने और मेरे सामने नंगी ही अपने कमरे में चली गई और ऊपर मेरे तरफ देखकर आंख मार दी!
इतने में अंदर से सिर्फ पेटीकोट पहनकर आई और खुले स्तन दिखाकर कपड़े सुखाने लगी।
इतने में उसके जेठ का छोटा लड़के ने आवाज दी, “चाची! गेट खोलना।”
वो बोली, “अभी आती हूं!”
यह कहकर ब्रा और ब्लाउज पहनकर गेट खोलने आई, “क्या हुआ?”
लड़का बोला, “मुझे अपनी किताब और कॉपी चाहिए। मुझे ट्यूशन पढ़ने जाना है।”
वो बोली, “कितनी देर में आओगे तुम?”
लड़का बोला, “4 घंटे तो लग ही जाएंगे।”
वो लड़का फिर बोला, “क्यों? क्या हुआ?”
वो बोली, “कुछ नहीं। तब तक मैं आराम से सो लूंगी।”
फिर उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और मुझे नीचे आने का इशारा कर दिया।
मैं नीचे आ गया और उसका दरवाजा खटखटाया।
उसने मुझे जल्दी से अंदर घुसाया और दरवाजा बंद किया।
मैंने उसकी मांग में सिंदूर भरा और उसको अपने हाथों से मंगलसूत्र पहनाया क्योंकि जब मैं किसी पराई औरत से संभोग करता हूं तब उसे अपनी अर्धांगिनी बनाकर उन्हें अपना बना लेता हूं।
अब मैंने उसका पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसके नीचे का हिस्सा नंगा कर दिया क्योंकि उसने पेटीकोट के नीचे कुछ भी नहीं पहना था।
मैं उसकी योनि को सहलाने लगा और उसके अंदर एक फिर दो उंगली घुसाने लगा।
मैंने उसकी योनि में जीभ से चाटना शुरू किया।
वो सिसकारी भरने लगी।
वो “आ आ ऐ!” ऐसी आवाज निकालने लगी और बोली, “खा जाओ मेरी चूत को और पी जाओ मेरी चूत का पानी!”
मैं बोला, “क्यों? आज तक कभी चोदा नहीं तुम्हारे पति ने?”
वो बोली, “उनका खड़ा ही नहीं होता इसलिए मैं मां नहीं बन पाई।”
ऐसा बोलते हुए वो स्खलित हो गई और सारा रस मैंने पी लिया।
अभी उसकी चूत कुंवारी जैसी थी जैसे किसी मर्द से कभी संभोग न हुआ हो।
फिर मैं उसके स्तन को पकड़कर अपने हाथ से दबाने निचोड़ने लगा और उसके स्तन को चूसने लगा।
वो बोली, “पी जाओ मेरे दूध को! आज मैं तुम्हारी पत्नी हूं। अब ज्यादा मत तड़पाओ और मुझे चोदकर अपने वीर्य से मेरी चूत लबालब भर दो और मुझे अपने बच्चे की मां बना दो!”
उसने मेरे सारे कपड़े उतारकर फेंक दिए और मुझे चूमने लगी।
उसने कहा, “बाप रे! इतना बड़ा मोटा और लंबा काला लंड पहली बार किसी पराए मर्द का देखा है!”
उसने अपने हाथों से पकड़कर उसे अपने मुंह में डालकर आगे पीछे करने लगी।
और कई देर बाद उसके मुंह को चोदने से मेरा पूरा वीर्य उसके मुंह में भर गया।
वो पूरा पी गई और मेरा लंड चाटकर अपनी जीभ से साफ कर दिया।
अब वो लेट गई और अपनी टांगें फैलाकर अपनी चूत को अपने हाथों से पकड़कर खोलने लगी।
मैंने उसके और अपने रस का चिकनाहट का फायदा उठाकर अपने लंड को एक ही बार में उसकी चूत में अंदर तक डाल दिया।
वो चीख पड़ी!
उसकी चूत की झिल्ली अभी पूरी नहीं फटी थी इसलिए उसके फटते ही उसमें से खून निकलने लगा और उसका दर्द कम होने लगा।
उसे मजा आने लगा।
वो आगे पीछे होने लगी।
वो बोली, “आज जी भरके चोदो मुझे! अपने वीर्य की एक एक बूंद टपका दो मेरी चूत में!”
उस समय ऐसा लग रहा था जैसे किसी अप्सरा के संग संभोग कर रहा हूं।
चोदते हुए वो भी कई बार स्खलित हो गई थी और मैं भी छूटने वाला था।
मैंने कहा, “कहां डालूं?”
वो बोली, “मेरी चूत में!”
मैंने बोला, “आंटी!”
वो बोली, “आंटी नहीं रंभा! आज से रंभा!”
अकेले में मेरा सारा वीर्य उसकी चूत में भर गया।
वो बोली, “तुम क्या सोच रहे थे कि मुझे पता नहीं चला कि तुम मुझे नंगी नहाते हुए देख रहे थे कई दिनों से। साथ ही यह कि तुम मेरी बहू नीजू, उसकी बेटी भावनी को चोदते हो। उनको भी मां बनाने वाले हो अपने बच्चों की।”
उसके बाद कई बार चारों को ढंग से चोदा और नौ महीने बाद नीजू के दो लड़के, जेठानी का लड़का और सास के एक लड़की पैदा हुई।
न्यूड लेडी सेक्स स्टोरी कैसी लगी?