कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी में मैं अपनी बीवी के साथ स्टेशन पर था. हमारी सीट कन्फर्म नहीं थी. एक आदमी मेरी बीवी को घूर रहा था, मतलब उसे चोदना चाहता था.
हाय दोस्तो, नमस्कार … मैं पहली बार एक कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी लिख रहा हूं जो एकदम सच्ची है.
एक बार मैं अपनी बीवी सीमा के साथ दिल्ली जा रहा था.
मेरे पास वेटिंग टिकट था और जाना जरूरी था.
मेरे साथ मेरा एक साल का लड़का भी था.
गर्मी बहुत थी तो मैं सोच रहा था कि यदि सीट नहीं मिली तो बहुत दिक्कत होगी.
वाराणसी स्टेशन पर भीड़ बहुत थी.
हम लोग वेटिंग रूम में बैठे हुए थे.
पास में एक आदमी बैठा था, वह मेरी बीवी को बड़े ध्यान से देख रहा था.
मेरी बीवी ने साड़ी पहन रखी थी.
उसका गदराया हुआ जिस्म उसको आकर्षित कर रहा था.
उस आदमी ने मुझसे पूछा- कहां जा रहे हैं?
मैंने बताया कि दिल्ली.
उसकी आंखों में चमक आ गई, उसने कहा कि मैं भी दिल्ली जा रहा हूं.
उसने पूछा कि आपकी सीट किस बोगी में है?
मैंने कहा कि हम लोगों का वेटिंग का टिकट है.
उसने कहा कि मेरा टिकट कन्फर्म टिकट है दो लोगों का … लेकिन मेरी बीवी की तबियत अचानक खराब हो गई इसलिए वह नहीं जा रही है. आप लोगों में से कोई एक चाहे, तो उसकी सीट पर जा सकता है.
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ.
तभी ट्रेन के आने का समय हो गया और सब लोग ट्रेन में बैठने लगे.
उसका टिकट वन टियर एसी कोच का था, जिसमें एक केबिन में दो सीट थीं.
मैं बोला कि हम लोगों का एसी टू टियर का वेटिंग है, तो फर्स्ट एसी में कैसे जा सकते हैं?
हम दोनों टॉयलेट के पास आकर बात करने लगे.
उसने कहा- एक उपाय है, एक टिकट मेरी बीवी के नाम पर है. आप चाहो तो मेरी वाइफ के नाम पर आपकी बीवी जा सकती है. लेकिन आपको कहीं और बैठना पड़ेगा.
मैं मजबूर और लाचार था, सो मैंने उससे कहा कि मैं अपनी बीवी को अकेले कैसे किसी अनजान के पास छोड़ सकता हूं?
उसने कहा- यही एक उपाय है, आपको अपनी बीवी पर विश्वास करना चाहिए. मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा … जब तक वह ना चाहे.
यह सुनकर मैं अन्दर से रोमांचित हो उठा और मैंने कहा कि वह भोली भाली सीधी औरत है. वह कभी भी किसी अनजान आदमी से सेक्स नहीं करेगी.
उसने जरा खुलते हुए कहा- आपको कैसे पता है कि उसका मन दूसरे से पेलवाने का नहीं है?
मैंने कहा कि मैंने बहुत बार उससे पूछा कि तुम मेरे सामने किसी गैर आदमी से सेक्स कर लो, मगर वह हर बार मना कर देती है.
वह आदमी हंसने लगा और उसने कहा कि तुम मेरी बात का बुरा मत मानना, आज वह पक्का चुदवाएगी. मुझे पूरा विश्वास है. ऐसी औरतों को मैंने खूब पेला है. मैंने उसको देखते ही मन बना लिया था इसीलिए आपको अपने साथ चलने के लिए कहा था.
मैं बहुत खुश था लेकिन मुझे अपनी बीवी को किसी गैर मर्द से चुदते हुए देखना था, तो मैंने उस आदमी से कहा.
उसने प्लान बनाया और अपना फोन नंबर दे दिया.
उसने कहा कि तुम हम दोनों की बात फोन पर सुनना, जब वह पिलवाने को तैयार हो जाए तो आगे का प्लान बनाऊंगा.
अब मैं उस आदमी को वहीं रोक कर उसके केबिन में चला गया.
जब मैं केबिन में गया तो देखा कि बीवी मुन्ना को दूध पिला रही थी.
उसने कहा- कहां चले गए थे?
‘मैं बोगी में देखने गया था कि कहीं कोई और जगह है या नहीं … बहुत भीड़ है सब जगह एकदम पैक है. ऐसे में जाना बड़ा मुश्किल लग रहा है.’
वह कुछ नहीं बोली, बस मुन्ने को दूध पिलाती रही.
मैंने पूछा- कहां गया वह आदमी?
वह बोली- पता नहीं, जब आप गए थे, तभी वे भी चले गए थे.
तभी वह आदमी अन्दर आ गया.
उसे देख कर पत्नी ने मुन्ने को दूध पिलाना छोड़ दिया और ब्लाउज का बटन बंद करने लगी.
प्लानिंग के हिसाब से वह बोला- टीटी आ रहा है. आप बाहर चले जाइए. जब वह चला जाए तो आ जाइएगा … और इनको भी बता दीजिए कि जैसा मैं कहूं वैसे ही टीटीई को बताएं.
मैं बीवी को इशारा करके बोला- जैसा ये कहें, तुम वैसे ही करना.
यह कह कर मैं बाहर निकल आया और मैंने उसे कॉल भी कर दिया.
उसने कॉल रिसीव करके मोबाइल छोड़ दिया.
मैं उन दोनों की बातचीत को सुनने को उतावला था.
तभी उस आदमी की आवाज़ आई.
वह बोला- मैडम, बाहर भीड़ बहुत है.
‘हां बहुत भीड़ है, यदि आप सहायता नहीं करते तो हम लोग परेशान हो जाते.’
‘कोई बात नहीं, मैं आप लोगों की परेशानी देख कर तैयार हो गया.’
‘थैंक्यू.’ बीवी ने बोला.
आदमी- आपका नाम क्या है?
बीवी- सीमा.
‘बहुत ही सुन्दर नाम है, जैसी आप हैं ठीक वैसा ही नाम है!
बीवी ने हंसते हुए ‘थैंक्यू.’ कहा.
‘आज पूरे सफर में आप मेरी बीवी के नाम पर रहेंगी, उसका नाम सिंधु सिंह है!’
‘क्यों?’
‘क्योंकि यह सीट उसी के नाम पर है न … अगर टीटी जान जाएगा तो आपको बाहर कर देगा और सीट किसी और को अलॉट कर देगा.’
‘ओह फिर तो हम लोगों को बहुत दिक्कत होगी!’
‘हां … और मैं नहीं चाहता कि आप लोगों को परेशानी हो.’
‘आपकी बीवी क्यों नहीं आई?’
‘वह अपने मायके गाजीपुर से आ रही थी, लेकिन वह अभी सैदपुर में जाम में फंसी है. इसी लिए उसको मैं मना कर दिया है. वह कल अपने भाई के दूसरी ट्रेन से आ जाएगी.’
‘आप कहां से आ रहे हैं?’
‘आसाम से, मैं मिलिट्री में हूँ!’
तभी टीटी आ गया और उसने केबिन का दरवाजा खटखटाया.
उस आदमी ने दरवाजा खोला.
‘सर प्लीज टिकट दिखाइए?’
टीटी टिकट देखते हुए बोला- मनीष सिंह?
‘हां सर!’
‘सिंधु सिंह?’
‘जी मै!’ यह आवाज मेरी बीवी की आई थी.
‘ओके.’
टीटी चला गया.
मैं उन लोगों की बातें कॉल पर सुन रहा था.
तभी बच्चे की रोने की आवाज आई … तो बीवी की आवाज आई- अभी दूध पिए हो ना.
मनीष- अरे क्यों रुला रही हैं बच्चे को और पिला दीजिए न!
‘अरे बदमाश है, अभी पिया है इसने.‘
मेरी बीवी ने हंसते हुए कहा और वह शायद मुन्ने को दूध पिलाने लगी थी क्योंकि बच्चे की आवाज आना बंद हो गई थी.
यह सुन कर मैं रोमांचित हो गया और मनीष को कॉल पर निर्देश देने लगा.
वह अपने कान में इयर लीड लगा कर मेरी बात को सुन सकता था.
‘दूध पिला रही है?’
वह धीरे से बोला- हुं.
‘क्या उसकी चूची दिख रही है?
‘हूँ.’
मैं बोला कि पूछो कि कितने बच्चे हैं?
उसने पूछा- सिंधु जी, आपके कितने बच्चे हैं?
‘कौन सिंधु?’ मेरी बीवी की आवाज आई.
‘अरे आप भूल गईं!’
वह हंसने लगी.
‘पूरे सफर में मैं आपको इसी नाम से पुकारूंगा!’
‘ओके … दो बच्चे हैं, एक घर पर है, वह 6 साल की बच्ची है.
मैंने मनीष के कान में कहा- कहो कि लगता नहीं है कि आप दो बच्चों की मां हैं!
मनीष- आपको देख कर नहीं लग रहा है कि आप दो बच्चों की मां हैं?
यह उसने हंसते हुए कहा था तो मेरी बीवी सीमा मुस्कुराती हुई बोली- कैसे?
मैं मनीष से बोला कि कहो आपकी चूचियां बहुत टाइट लग रही हैं. डरो मत मैं हूं ना!
मनीष- देखने में आपकी चूचियां बहुत टाइट लग रही हैं.
इस बात पर मेरी बीवी कुछ नहीं बोली.
मैंने मनीष से कहा- उससे सॉरी बोल दो और कहो कि लगता है आप बुरा मान गईं!
‘लगता है आप बुरा मान गई हैं?’
‘देखिए मेरे पति बहुत शक्की दिमाग के हैं. अगर इस तरह की बात सुन लेंगे तो वे हम पर शक करने लगेंगे!’
‘मैं तो उनको जानता भी नहीं … और न ही उनका मेरे पास नंबर है. कौन बताएगा?’
वह बोली- हो सकता है कि केबिन के बाहर आकर कान लगा कर सुन लें.
‘हां हो तो सकता है? ऐसा है कि आप पूछ लीजिए न वे इस वक्त कहां हैं?’
‘हां, यह ठीक है!’
अब शायद मेरी बीवी मुझे कॉल करने जा रही थी.
मैंने मनीष से कहा- तुम कहो कि कॉल ना करें, आप शौच के बहाने जाकर देख लीजिए कि वे कहां हैं?
‘मैडम ऐसा है कि आप कॉल मत करिए, वे किसी और बोगी में होंगे तो अभी आ जाएंगे. अभी उनको रहने दीजिए. शौचालय के बहाने से जाइए और देख लीजिए कि वे आस पास तो नहीं हैं?’
‘ठीक है?’
‘बाबू को मुझे दे दीजिए, वह मेरे साथ खेल लेगा.’
‘हां, लीजिए!’
वह बच्चे को देकर चली गई.
मैं ये सब बात सुन रहा था और केबिन से दूर चला गया.
अब मैंने मनीष कहा कि भाई लगता है कि लाइन पर आ रही है.
उसने कहा- हां भाई एकदम रेडी है और पक्के में अपनी चूत मुझसे पेलवाएगी. आप क्या चाहते हैं?
मैंने कहा- भाई मैं तो चाहता हूं कि तुम उसे इतना पेलो कि वह पानी पानी हो जाए!
मेरी बीवी मुझे देखने ट्रेन बाहर गई थी कि कहीं मैं उनकी बातें तो नहीं सुन रहे हैं.
इधर मैं और मनीष फोन पर बात कर रहे थे और चुदाई की प्लानिंग बना रहे थे.
तभी मेरी बीवी वापस केबिन में आ गई.
मैं शांत हो गया और उनकी बातचीत सुनने लगा.
मनीष- क्या हुआ दिखाई दिए?
सिंधु- नहीं, वे टॉयलेट के पास भी नहीं थे.
मनीष- मैंने कहा था ना कि दूर किसी दूसरी बोगी में जगह ढूंढ रहे होंगे.
सिंधु- आपकी बीवी आपके साथ नहीं रहती हैं?
‘नहीं, मैं आर्मी में सैनिक हूं, अक्सर हम लोग बॉर्डर पर रहते हैं. ऐसे में परिवार रखना मुश्किल रहता है.’
‘ओह, फिर तो आप लोग बहुत कष्ट सहते हैं!’
‘हां, हम लोगों को औरत को देखे महीनों हो जाते हैं, बॉर्डर पर सिर्फ चिड़िया और कुछ जानवर ही वह सब करते हुए दिखाई देते हैं?’
‘क्या करते दिखाई देते हैं?’
मनीष ने बिंदास कह दिया- फकिंग.
इस पर सीमा ने हंस कर कहा- आप भी बड़े मजाकिया है!
मनीष- अब क्या करें, उन्हीं की चुदाई देख कर अपना मन शांत कर लेते हैं.
‘हां बताइए … कितना कष्ट सहते हैं आप लोग, सुख के लिए तरसते रहते हैं!’
‘हां, बहुत … कुछ मिलता ही नहीं है.’
यह मनीष ने हंसते हुए कहा.
‘कितने दिनों बाद जा रहे हैं घर?
‘छह महीने बाद. कितने अरमान जुटा कर फर्स्ट क्लास में मैंने अपने साथ बीवी के साथ रिजर्वेशन कराया था.’
‘ओह …’ हंसती हुई बोली.
फिर वह बच्चे को डांटती हुई कहने लगी- फिर से भूख लग गई क्या?
‘क्यों डांट रही हैं, कम से कम उसका तो पेट भर दीजिए!’
मनीष ने हंसते हुए कहा.
‘ठीक है, लो पियो!’ वह बच्चे को दूध पिलाने लगी.
मैं मनीष से बोला कि क्या उसकी चूची दिख रही है?
‘हां.’
मैं बोला- भाई क्या तुम्हारा लंड खड़ा हो रहा है?
‘हां!’
‘तुम बातचीत आगे बढ़ाओ और ऊपर से लंड सहलाते रहो.’
‘हूं.’
मनीष- मैडम मैं आपको क्या बताऊं आज मेरी बीवी होती तो 6 महीने का कसर सारी रात निकालता!
‘अच्छा!’
‘लगता है कि दो दिन और बेचारे को इंतजार करना पड़ेगा!
उसने शायद अपने खड़े लंड के ऊपर हाथ फेरते हुए यह कहा था.
‘कोई बात नहीं, दो दिन और बर्दाश्त कर लीजिए.’ बीवी ने हंसते हुए कहा.
‘हां, मन को मना रहा हूं लेकिन ये नहीं मान रहा है!
उसने लोअर के ऊपर से लंड को मुट्ठी में पकड़े हुए कहा और यह मुझे भी बताया.
मेरी बीवी शर्माती हुई हंसने लगी.
दोस्तो, मेरी बीवी का मूड बनने लगा था और आज वह चलती ट्रेन में एक गैर मर्द के लौड़े से चुदने के लिए बेचैन होने लगी थी.
अगले भाग में मैं आपको अपनी बीवी की गैर मर्द से चुदाई की कहानी लिखूँगा, आप कमेंट्स करके जरूर बताएं कि आपको मेरी कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी कैसी लग रही है.
कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी का अगला भाग:
हाय दोस्तो, नमस्कार … मैं पहली बार एक कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी लिख रहा हूं जो एकदम सच्ची है.
एक बार मैं अपनी बीवी सीमा के साथ दिल्ली जा रहा था.
मेरे पास वेटिंग टिकट था और जाना जरूरी था.
मेरे साथ मेरा एक साल का लड़का भी था.
गर्मी बहुत थी तो मैं सोच रहा था कि यदि सीट नहीं मिली तो बहुत दिक्कत होगी.
वाराणसी स्टेशन पर भीड़ बहुत थी.
हम लोग वेटिंग रूम में बैठे हुए थे.
पास में एक आदमी बैठा था, वह मेरी बीवी को बड़े ध्यान से देख रहा था.
मेरी बीवी ने साड़ी पहन रखी थी.
उसका गदराया हुआ जिस्म उसको आकर्षित कर रहा था.
उस आदमी ने मुझसे पूछा- कहां जा रहे हैं?
मैंने बताया कि दिल्ली.
उसकी आंखों में चमक आ गई, उसने कहा कि मैं भी दिल्ली जा रहा हूं.
उसने पूछा कि आपकी सीट किस बोगी में है?
मैंने कहा कि हम लोगों का वेटिंग का टिकट है.
उसने कहा कि मेरा टिकट कन्फर्म टिकट है दो लोगों का … लेकिन मेरी बीवी की तबियत अचानक खराब हो गई इसलिए वह नहीं जा रही है. आप लोगों में से कोई एक चाहे, तो उसकी सीट पर जा सकता है.
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ.
तभी ट्रेन के आने का समय हो गया और सब लोग ट्रेन में बैठने लगे.
उसका टिकट वन टियर एसी कोच का था, जिसमें एक केबिन में दो सीट थीं.
मैं बोला कि हम लोगों का एसी टू टियर का वेटिंग है, तो फर्स्ट एसी में कैसे जा सकते हैं?
हम दोनों टॉयलेट के पास आकर बात करने लगे.
उसने कहा- एक उपाय है, एक टिकट मेरी बीवी के नाम पर है. आप चाहो तो मेरी वाइफ के नाम पर आपकी बीवी जा सकती है. लेकिन आपको कहीं और बैठना पड़ेगा.
मैं मजबूर और लाचार था, सो मैंने उससे कहा कि मैं अपनी बीवी को अकेले कैसे किसी अनजान के पास छोड़ सकता हूं?
उसने कहा- यही एक उपाय है, आपको अपनी बीवी पर विश्वास करना चाहिए. मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा … जब तक वह ना चाहे.
यह सुनकर मैं अन्दर से रोमांचित हो उठा और मैंने कहा कि वह भोली भाली सीधी औरत है. वह कभी भी किसी अनजान आदमी से सेक्स नहीं करेगी.
उसने जरा खुलते हुए कहा- आपको कैसे पता है कि उसका मन दूसरे से पेलवाने का नहीं है?
मैंने कहा कि मैंने बहुत बार उससे पूछा कि तुम मेरे सामने किसी गैर आदमी से सेक्स कर लो, मगर वह हर बार मना कर देती है.
वह आदमी हंसने लगा और उसने कहा कि तुम मेरी बात का बुरा मत मानना, आज वह पक्का चुदवाएगी. मुझे पूरा विश्वास है. ऐसी औरतों को मैंने खूब पेला है. मैंने उसको देखते ही मन बना लिया था इसीलिए आपको अपने साथ चलने के लिए कहा था.
मैं बहुत खुश था लेकिन मुझे अपनी बीवी को किसी गैर मर्द से चुदते हुए देखना था, तो मैंने उस आदमी से कहा.
उसने प्लान बनाया और अपना फोन नंबर दे दिया.
उसने कहा कि तुम हम दोनों की बात फोन पर सुनना, जब वह पिलवाने को तैयार हो जाए तो आगे का प्लान बनाऊंगा.
अब मैं उस आदमी को वहीं रोक कर उसके केबिन में चला गया.
जब मैं केबिन में गया तो देखा कि बीवी मुन्ना को दूध पिला रही थी.
उसने कहा- कहां चले गए थे?
‘मैं बोगी में देखने गया था कि कहीं कोई और जगह है या नहीं … बहुत भीड़ है सब जगह एकदम पैक है. ऐसे में जाना बड़ा मुश्किल लग रहा है.’
वह कुछ नहीं बोली, बस मुन्ने को दूध पिलाती रही.
मैंने पूछा- कहां गया वह आदमी?
वह बोली- पता नहीं, जब आप गए थे, तभी वे भी चले गए थे.
तभी वह आदमी अन्दर आ गया.
उसे देख कर पत्नी ने मुन्ने को दूध पिलाना छोड़ दिया और ब्लाउज का बटन बंद करने लगी.
प्लानिंग के हिसाब से वह बोला- टीटी आ रहा है. आप बाहर चले जाइए. जब वह चला जाए तो आ जाइएगा … और इनको भी बता दीजिए कि जैसा मैं कहूं वैसे ही टीटीई को बताएं.
मैं बीवी को इशारा करके बोला- जैसा ये कहें, तुम वैसे ही करना.
यह कह कर मैं बाहर निकल आया और मैंने उसे कॉल भी कर दिया.
उसने कॉल रिसीव करके मोबाइल छोड़ दिया.
मैं उन दोनों की बातचीत को सुनने को उतावला था.
तभी उस आदमी की आवाज़ आई.
वह बोला- मैडम, बाहर भीड़ बहुत है.
‘हां बहुत भीड़ है, यदि आप सहायता नहीं करते तो हम लोग परेशान हो जाते.’
‘कोई बात नहीं, मैं आप लोगों की परेशानी देख कर तैयार हो गया.’
‘थैंक्यू.’ बीवी ने बोला.
आदमी- आपका नाम क्या है?
बीवी- सीमा.
‘बहुत ही सुन्दर नाम है, जैसी आप हैं ठीक वैसा ही नाम है!
बीवी ने हंसते हुए ‘थैंक्यू.’ कहा.
‘आज पूरे सफर में आप मेरी बीवी के नाम पर रहेंगी, उसका नाम सिंधु सिंह है!’
‘क्यों?’
‘क्योंकि यह सीट उसी के नाम पर है न … अगर टीटी जान जाएगा तो आपको बाहर कर देगा और सीट किसी और को अलॉट कर देगा.’
‘ओह फिर तो हम लोगों को बहुत दिक्कत होगी!’
‘हां … और मैं नहीं चाहता कि आप लोगों को परेशानी हो.’
‘आपकी बीवी क्यों नहीं आई?’
‘वह अपने मायके गाजीपुर से आ रही थी, लेकिन वह अभी सैदपुर में जाम में फंसी है. इसी लिए उसको मैं मना कर दिया है. वह कल अपने भाई के दूसरी ट्रेन से आ जाएगी.’
‘आप कहां से आ रहे हैं?’
‘आसाम से, मैं मिलिट्री में हूँ!’
तभी टीटी आ गया और उसने केबिन का दरवाजा खटखटाया.
उस आदमी ने दरवाजा खोला.
‘सर प्लीज टिकट दिखाइए?’
टीटी टिकट देखते हुए बोला- मनीष सिंह?
‘हां सर!’
‘सिंधु सिंह?’
‘जी मै!’ यह आवाज मेरी बीवी की आई थी.
‘ओके.’
टीटी चला गया.
मैं उन लोगों की बातें कॉल पर सुन रहा था.
तभी बच्चे की रोने की आवाज आई … तो बीवी की आवाज आई- अभी दूध पिए हो ना.
मनीष- अरे क्यों रुला रही हैं बच्चे को और पिला दीजिए न!
‘अरे बदमाश है, अभी पिया है इसने.‘
मेरी बीवी ने हंसते हुए कहा और वह शायद मुन्ने को दूध पिलाने लगी थी क्योंकि बच्चे की आवाज आना बंद हो गई थी.
यह सुन कर मैं रोमांचित हो गया और मनीष को कॉल पर निर्देश देने लगा.
वह अपने कान में इयर लीड लगा कर मेरी बात को सुन सकता था.
‘दूध पिला रही है?’
वह धीरे से बोला- हुं.
‘क्या उसकी चूची दिख रही है?
‘हूँ.’
मैं बोला कि पूछो कि कितने बच्चे हैं?
उसने पूछा- सिंधु जी, आपके कितने बच्चे हैं?
‘कौन सिंधु?’ मेरी बीवी की आवाज आई.
‘अरे आप भूल गईं!’
वह हंसने लगी.
‘पूरे सफर में मैं आपको इसी नाम से पुकारूंगा!’
‘ओके … दो बच्चे हैं, एक घर पर है, वह 6 साल की बच्ची है.
मैंने मनीष के कान में कहा- कहो कि लगता नहीं है कि आप दो बच्चों की मां हैं!
मनीष- आपको देख कर नहीं लग रहा है कि आप दो बच्चों की मां हैं?
यह उसने हंसते हुए कहा था तो मेरी बीवी सीमा मुस्कुराती हुई बोली- कैसे?
मैं मनीष से बोला कि कहो आपकी चूचियां बहुत टाइट लग रही हैं. डरो मत मैं हूं ना!
मनीष- देखने में आपकी चूचियां बहुत टाइट लग रही हैं.
इस बात पर मेरी बीवी कुछ नहीं बोली.
मैंने मनीष से कहा- उससे सॉरी बोल दो और कहो कि लगता है आप बुरा मान गईं!
‘लगता है आप बुरा मान गई हैं?’
‘देखिए मेरे पति बहुत शक्की दिमाग के हैं. अगर इस तरह की बात सुन लेंगे तो वे हम पर शक करने लगेंगे!’
‘मैं तो उनको जानता भी नहीं … और न ही उनका मेरे पास नंबर है. कौन बताएगा?’
वह बोली- हो सकता है कि केबिन के बाहर आकर कान लगा कर सुन लें.
‘हां हो तो सकता है? ऐसा है कि आप पूछ लीजिए न वे इस वक्त कहां हैं?’
‘हां, यह ठीक है!’
अब शायद मेरी बीवी मुझे कॉल करने जा रही थी.
मैंने मनीष से कहा- तुम कहो कि कॉल ना करें, आप शौच के बहाने जाकर देख लीजिए कि वे कहां हैं?
‘मैडम ऐसा है कि आप कॉल मत करिए, वे किसी और बोगी में होंगे तो अभी आ जाएंगे. अभी उनको रहने दीजिए. शौचालय के बहाने से जाइए और देख लीजिए कि वे आस पास तो नहीं हैं?’
‘ठीक है?’
‘बाबू को मुझे दे दीजिए, वह मेरे साथ खेल लेगा.’
‘हां, लीजिए!’
वह बच्चे को देकर चली गई.
मैं ये सब बात सुन रहा था और केबिन से दूर चला गया.
अब मैंने मनीष कहा कि भाई लगता है कि लाइन पर आ रही है.
उसने कहा- हां भाई एकदम रेडी है और पक्के में अपनी चूत मुझसे पेलवाएगी. आप क्या चाहते हैं?
मैंने कहा- भाई मैं तो चाहता हूं कि तुम उसे इतना पेलो कि वह पानी पानी हो जाए!
मेरी बीवी मुझे देखने ट्रेन बाहर गई थी कि कहीं मैं उनकी बातें तो नहीं सुन रहे हैं.
इधर मैं और मनीष फोन पर बात कर रहे थे और चुदाई की प्लानिंग बना रहे थे.
तभी मेरी बीवी वापस केबिन में आ गई.
मैं शांत हो गया और उनकी बातचीत सुनने लगा.
मनीष- क्या हुआ दिखाई दिए?
सिंधु- नहीं, वे टॉयलेट के पास भी नहीं थे.
मनीष- मैंने कहा था ना कि दूर किसी दूसरी बोगी में जगह ढूंढ रहे होंगे.
सिंधु- आपकी बीवी आपके साथ नहीं रहती हैं?
‘नहीं, मैं आर्मी में सैनिक हूं, अक्सर हम लोग बॉर्डर पर रहते हैं. ऐसे में परिवार रखना मुश्किल रहता है.’
‘ओह, फिर तो आप लोग बहुत कष्ट सहते हैं!’
‘हां, हम लोगों को औरत को देखे महीनों हो जाते हैं, बॉर्डर पर सिर्फ चिड़िया और कुछ जानवर ही वह सब करते हुए दिखाई देते हैं?’
‘क्या करते दिखाई देते हैं?’
मनीष ने बिंदास कह दिया- फकिंग.
इस पर सीमा ने हंस कर कहा- आप भी बड़े मजाकिया है!
मनीष- अब क्या करें, उन्हीं की चुदाई देख कर अपना मन शांत कर लेते हैं.
‘हां बताइए … कितना कष्ट सहते हैं आप लोग, सुख के लिए तरसते रहते हैं!’
‘हां, बहुत … कुछ मिलता ही नहीं है.’
यह मनीष ने हंसते हुए कहा.
‘कितने दिनों बाद जा रहे हैं घर?
‘छह महीने बाद. कितने अरमान जुटा कर फर्स्ट क्लास में मैंने अपने साथ बीवी के साथ रिजर्वेशन कराया था.’
‘ओह …’ हंसती हुई बोली.
फिर वह बच्चे को डांटती हुई कहने लगी- फिर से भूख लग गई क्या?
‘क्यों डांट रही हैं, कम से कम उसका तो पेट भर दीजिए!’
मनीष ने हंसते हुए कहा.
‘ठीक है, लो पियो!’ वह बच्चे को दूध पिलाने लगी.
मैं मनीष से बोला कि क्या उसकी चूची दिख रही है?
‘हां.’
मैं बोला- भाई क्या तुम्हारा लंड खड़ा हो रहा है?
‘हां!’
‘तुम बातचीत आगे बढ़ाओ और ऊपर से लंड सहलाते रहो.’
‘हूं.’
मनीष- मैडम मैं आपको क्या बताऊं आज मेरी बीवी होती तो 6 महीने का कसर सारी रात निकालता!
‘अच्छा!’
‘लगता है कि दो दिन और बेचारे को इंतजार करना पड़ेगा!
उसने शायद अपने खड़े लंड के ऊपर हाथ फेरते हुए यह कहा था.
‘कोई बात नहीं, दो दिन और बर्दाश्त कर लीजिए.’ बीवी ने हंसते हुए कहा.
‘हां, मन को मना रहा हूं लेकिन ये नहीं मान रहा है!
उसने लोअर के ऊपर से लंड को मुट्ठी में पकड़े हुए कहा और यह मुझे भी बताया.
मेरी बीवी शर्माती हुई हंसने लगी.
दोस्तो, मेरी बीवी का मूड बनने लगा था और आज वह चलती ट्रेन में एक गैर मर्द के लौड़े से चुदने के लिए बेचैन होने लगी थी.
अगले भाग में मैं आपको अपनी बीवी की गैर मर्द से चुदाई की कहानी लिखूँगा, आप कमेंट्स करके जरूर बताएं कि आपको मेरी कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी कैसी लग रही है.
कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी का अगला भाग: