कन्सेप्ट ऑफ़ सेक्सुअल प्यूरिटी यानी यौन शुचिता, यौन वर्जना कैसे शुरू हुआ होगा, यही सब इस कहानी में बताने की कोशिश की गयी है.
फ्रेंड्स, मैं प्रिंस आपको रिश्तों में खुल कर सेक्स किस तरह से होता है, उसे अपनी सेक्स कहानी में लिख रहा था.
कहानी के दूसरे भाग
बहन भाई के बीच यौन सम्बन्ध
में अब तक आपने यही सब पढ़ा था कि दुनिया में सेक्स के प्रति चाहत का आलम यह है कि लोग अपने घर में ही अपनी बहनों के साथ या अन्य खून के रिश्तों में भी लंड चुत चुदाई का खेल खेल लेते हैं.
चूंकि आप सभी पाठकों के सैकड़ों की तादाद में मुझे ईमेल मिले, जिसमें मुझसे आगे भी में इसी क्रम को लिखने के लिए कहा गया है, तो मैं आपकी इस कामना की पूर्ति करने हेतु सेक्स कहानी को लिख रहा हूँ. कन्सेप्ट ऑफ़ सेक्सुअल प्यूरिटी की सच्चाई को पढ़ें और आनन्द लें.
भाई बहन के बीच सेक्स संबंध सदियों से पूरे विश्व में प्रचलित था और स्वाभाविक था लेकिन इससे होने वाले बच्चे एक ही गुणसूत्र और जीन के होने के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी कमजोर पैदा होते गए.
तब समाज ने यह निर्धारित किया कि परिवार से अलग जितना दूर के रिश्ते में सेक्स और बच्चा पैदा किया जाए, इससे नस्ल में सुधार होगा और बच्चे उतने ही स्वस्थ पैदा होंगे.
यही कन्सेप्ट ऑफ़ सेक्सुअल प्यूरिटी का आधार है.
हालांकि मिडल ईस्ट में कबीला संस्कृति होने के कारण उनमें अपने ही रिश्ते में शादी और सेक्स संबंध जारी रहा, लिहाज के तौर पर केवल एक मां के दूध में सेक्स को वर्जित कर दिया गया.
लेकिन अन्य समाजों में लोग कोशिश करने लगे कि दूर के रिश्तों में शारीरिक संबध हों.
रिश्तों की बात इसलिए रखी गयी क्योंकि एक जाति के लोग सभी आपस में कोई ना कोई रिश्तेदार होते ही हैं और लोग शादी अपने ही जाति में करते हैं.
पहले चूंकि गर्भ निरोधक साधन भी इतने सुगमता से उपलब्ध नहीं थे इसलिए संभोग करने से गर्भ ठहरने की प्रबल संभावना रहती ही थी.
इसी वजह से यह जरूरी हो गया था कि नजदीकी रिश्तों में संभोग को हतोत्साहित किया जाए.
इसलिए नजदीकी रिश्तों में संभोग की जितनी ज्यादा हो सके … अधिक से अधिक निन्दा की जाने लगी और यहीं से पवित्र रिश्ते की शुरुवात हुई.
पवित्र रिश्ता यानि वह रिश्ता, जिसमें एक स्त्री और एक पुरूष के बीच प्रेम और प्यार तो हो, लेकिन सेक्स संबंध ना हो.
जैसे भाई बहन और भी रक्त संबंधों और नजदीकी रिश्ते, इन रिश्तों को पवित्र रिश्तों में रखा गया क्योंकि इन रिश्तों में प्रेम होना तो स्वाभाविक था लेकिन यह तय किया गया कि कहीं सेक्स संबंध ना हो जाए … क्योंकि प्रेम के साथ साथ शारीरिक आकर्षण भी उत्पन्न होना भी स्वाभाविक था.
इसलिए इनके बीच सेक्स संबंधों की जम कर निंदा की गयी.
अब स्त्री पुरूष परिवार के बाहर यौन संबंधों और सेक्स की तलाश करने लगे और सेक्स संबंध स्थापित करने लगे.
यानि बहन भी बाहर के लड़के से और भाई भी बाहर की लड़की में सेक्स तलाशने लगा और सेक्स संबंध बनाने लगा.
आधी शादी और यौन शुचिता की बात यानि लड़की पति को अपना यौवन सौंपने तक कुंवारी रहे, यह मापदंड और अपेक्षा तय की गयी.
पुरूष भी चाहने लगा कि मुझे मिलने वाली स्त्री से केवल वह ही यौन संबध संबंध बनाए.
पहले चूंकि बहुत कम उम्र में शादी हो जाती थी यानि सेक्स की समझ होने से पहले ही शादी हो जाती थी.
लेकिन बदलते समय के साथ कैरियर, पढ़ाई आदि होने के कारण शादी देर से होने लगी, तब तक लड़का और लड़की को सेक्स की चाहत और यौन आकर्षण सताने लगा.
साथ ही गर्भ निरोधक साधन भी सुगमता से उपलब्ध होने लगे तो लोग विवाह पूर्व भी धड़ल्ले से यौन संबंध बनाने लगे.
लेकिन पुरानी और पहले से चली आ रही संस्कारिक सोच के कारण पुरुष और लड़कों के मन में यौन शुचिता वाली अपेक्षा रह ही गयी.
समाज में जो लड़कियां विवाह पूर्व यौन संबंध बनाती हैं, वैसी लड़कियों को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाने लगा.
वहीं लड़के लड़कियों से यौन संबंध तो बनाने लगे लेकिन उस लड़की के प्रति मन में कोई इज्जत या प्रेम नहीं रखने लगे.
वहीं बहुत सारे लड़कों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया क्योंकि वह लड़का जानता था कि चूंकि की विवाह पूर्व यौन संबंध या विवाहेत्तर यौन संबंध को समाज में अच्छी दृष्टि से नहीं देखता है तो समाज में लड़की का इस बात का बदनामी की बात और डर दिखाकर आसानी से तंग किया जा सकता है.
साथ ही लड़की को तंग करके दूसरे आदमियों या अन्य लोगों से सेक्स करवाकर अच्छे पैसे भी कमाये जा सकते हैं और अन्य लाभ भी लिए जा सकते हैं.
सेक्स बेचकर पैसे कमाना यानि जिसे समाज वेश्यावृत्ति कहता है, वह दुनिया में सबसे ज्यादा चलने वाला व्यापार है और दुनिया के हर शहर में रंडियों की सुविधा मौजूद है.
इसके लिए कच्चे माल के रूप में लड़की चाहिए तो लड़के प्यार के जाल में फंसाकर, ब्लैकमेल कर, मजबूर कर, नौकरी का झांसा देकर, अपहरण कर, हर तरीके से लड़की को फंसाकर वैश्यालयों में बेचने लगे जिसे लोग रेड लाईट एरिया कहते हैं.
अब रही इसको कैसे रोका जाए?
क्या समाज लड़की का या लड़के का यौन आकर्षण रोक सकता है?
यह तो संभव ही नहीं है.
यौन आकर्षण होगा तो सेक्स संबंध बनेंगे ही … और सेक्स संबंध बनेंगे तो ये सब तरह के अपराध चलेंगे. लड़की को कोठे में बेचना, बात ना मानने पर टुकड़े टुकड़े करके हत्या कर देना निश्चित तौर पर होते रहेंगे.
अब इन सब का क्या उपाय है?
एक उम्र आने के बाद सेक्स उत्तेजना दबाया नहीं जा सकता है, अगर युवा को कहीं सेक्स संतुष्टि ना मिले तो वह तमाम खतरों को जानते हुए भी घर के बाहर सेक्स की चाहत में भटकेगा जरूर.
इसी सेक्स और प्रेम की चाहत ने सेक्स साहित्य को भी जन्म दिया.
आप इसकी तुलना इस चीज से कर सकते हैं कि यदि आपको जोर से प्यास लगी है, प्यास के मारे आपकी जान जा रही है.
सामने एक बड़ा सा गड्डानुमा नाला है, जिसमें उतर कर जाने में बहुत सारे खतरे हैं. आप गिर सकते हैं, हाथ पैर टूट सकते हैं, खतरनाक और जहरीले कीड़े मकोड़ों की भरमार है … काट लें तो तुरंत आपकी जान जा सकती है.
मगर नाले के उस पार पानी का झरना है और तलाब भी है उसमें मगरमच्छ भी हैं. फिर भी आप कितना देर बर्दाश्त करेंगें. एक घंटे, दो घंटे, चार घंटे, एक दिन, दो दिन.
तीसरे दिन आप कहेंगे कि अब कुछ भी हो जाए … तो उठ कर चल देंगे कि जान रहे या ना रहे. किसी तरह से नाला पार करके किसी भी तरह पानी पीना ही है, चाहे जो हो जाए.
लेकिन यदि जब आपको जोरों की प्यास लगी थी, तब कोई आपको एक ग्लास पानी पिला दे तो क्या आप तमाम खतरों की जानते हुए नाला पार करना चाहेंगे?
कभी नहीं …
यही हाल किशोरावस्था में यौन आकर्षण का भी होता है.
इस अवस्था में यौन आकर्षण और यौन उत्तेजना की तीव्रता इतनी जोर से सताती है कि तमाम खतरों को जानते हुए भी लोग घर के बाहर यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
उसमें से अधिकांश अपराध का शिकार हो जाते हैं.
हत्या, कोठे में बेच देना जैसी दुर्घटनाओं के शिकार बन जाते हैं … ये आगे भी बनते रहते हैं.
यही बात है कि यदि घर में सावधानी को ध्यान में रखते हुए गोपनीयता से यही यौन संतुष्टि प्रदान करने की जाए तो लड़की या लड़के ऐसी दुर्घटनाओं के शिकार नहीं होंगे और वे यौन चाहतों के लिए बाहर भी नहीं भटकेंगे.
लेकिन इसके लिए हिम्मत करनी पड़ेगी और घर के माहौल को खुला रखते हुए सोच बदलनी पड़ेगी.
अब हुआ कि भाई बहनों का एक दूसरे प्रति सेक्स के बारे में सोचना तो समाज में हमेशा से ही प्रचुरता से सेक्स सामग्रियों शुरू से ही रही है.
भाई बहन सेक्स कहानी से जाहिर है कि साथ रहने से भाई बहन हो या और कोई, यौन अंगों के यौन आकर्षण से बचना संभव ही नहीं है.
लेकिन यदि परिवारिक और सामाजिक दबाव के कारण सेक्स संबंध नहीं बना पाते हैं तो यही यौन आकर्षण सेक्स फंतासी के रूप में जन्म लेता है.
यही कारण है कि सेक्स सामग्रियों और इंटरनेट पर भाई बहन सेक्स की कहानियां, चित्र, वीडियो और अन्य सामग्री सबसे ज्यादा और प्रचुर मात्रा में भरमार होती है … और सबसे ज्यादा लोग इसी को खोजते हैं, पढ़ते हैं और देखते हैं.
हालांकि शर्म के डर से वे इस बात को सबसे ज्यादा छुपाते भी हैं और अपने आप को संस्कारी दिखाने की कोशिश करते हैं.
इतने लंबे आख्यान के बाद जीजाजी ने बताया कि एक यादगार रात का वाकिया भी सुनो.
जीजा बोले- मेरे एक बहुत ही घनिष्ठ मित्र ने अपने एक अनुभव को मुझे बताया कि एक बार वह और उसकी बहन परीक्षा देने बाहर किसी शहर में गए थे.
वहां रात को उसकी बहन की तबीयत बहुत खराब हो गयी.
वह बहुत घबरा गया, साथ में और कोई नहीं था.
होटल के कमरे बस वहीं दोनों थे.
रात के दस बज रहे थे, वह नीचे भागा तो सभी दवा दुकानें और क्लिनिक बंद हो गए थे.
बहुत खोजने के बाद एक महिला चिकित्सक की क्लिनिक मिली.
वह भी बंद हो रही थी.
काफी मिन्नतों के बाद वह महिला चिकित्सक आने को तैयार हुई.
उसने आकर उसकी बहन को देखा, नब्ज चेक की.
नब्ज बहुत धीरे धीरे चल रही थी.
डॉक्टर ने एक सूई दी लेकिन कहा इसका ब्लड सर्कुलेशन बहुत कम हो रहा है, किसी भी तरह से इसका रक्त प्रवाह बढ़ाना पड़ेगा.
फिर उसने कहा कि इसकी हथेली, पांव और पूरे शरीर को सहलाओ.
मित्र सहलाने लगा.
डॉक्टर बोली- ऐसे लाभ नहीं हो रहा है, इसके कपड़े खोलकर पूरे शरीर को सहलाओ.
उसने अपनी बहन के सारे कपड़े खोल कर पूरे बदन को सहलाना शुरू किया.
कुछ देर बाद डॉक्टर ने ब्लड प्रेशर नापा तो कुछ सुधार मिला.
अब डॉक्टर ने कहा कि वेल डन, यहां नीचे जीभ से सहलाओ.
वह डॉक्टर के सामने ही अपनी बहन की योनि को जीभ से सहलाने लगा.
डॉक्टर बोली- यह लड़की डिप्रेशन की शिकार है. इसी कारण इसका ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है. इसको खुशी चाहिए. इसी तरह करते रहो. चिंता करने की कोई बात नहीं. ठीक हो जाएगी. कुछ दिक्कत हो तो फोन करना.
ये कहकर डॉक्टर चली गयी.
वह रात भर लगातार अपनी बहन के पूरे शरीर को सहलाता रहा और उसके स्तनों को चूसता रहा, योनि को चूसता चाटता रहा.
करीब रात तीन बजे बहन को कुछ होश आया, वह कुनमुनाई और आंखें खोल दीं.
लेकिन उसने अपनी बहन की योनि को चाटना चूसना जारी रखा.
उसकी बहन धीरे धीरे सामान्य होने लगी लेकिन उठी नहीं.
कुछ देर बाद सामान्य होने पर उसने तुरंत अपने आपको चादर से ढक लिया और अपने भाई से पूछा कि ये सब क्या है?
तब भाई ने बहन को सारी बात बताई.
डॉक्टर का पर्ची और सुई की शीशी दिखलाई.
यह जानकर बहन को भाई पर बहुत प्यार आया और चादर फेंक कर उसने अपने भाई को गले से लगा लिया.
भाई बहन दोनों के आंख में आंसू थे.
दोनों ने गले मिलकर एक दूसरे को खूब प्यार किया.
उससे उन दोनों भाई बहन में बहुत प्यार होने लगा.
उसकी बहन भी धीरे धीरे ठीक हो गयी है. यह उनकी यादगार रात थी.
यह कहानी सुनाने के बाद मेरे लंड में तनाव आ गया था और मैंने शोभना को अपने पास को खींच लिया था.
वह भी अपने दूध मेरे हाथ से दबवा कर बैठ गई थी.
मैं भी पार्क में घूम रहे लोगों की नजरों से बचता हुआ शोभना की चूची को मसल रहा था.
यह हरकत जीजा जी और पिंकी भी देख रहे थे.
फिर हम सभी लोगों ने घर वापस चलने का तय किया.
उस दिन लगभग दो घंटे तक पार्क में बैठने और वहीं कुछ कुछ खाने के बाद घर लौट आए.
घर आते ही जीजाजी ने शोभना को दबोच लिया तो शोभना बोली- अरे कपड़े तो खोल लेने दो!
जीजा जी ने कहा- सब एक साथ कपड़े उतार दो न!
उनकी बात सुनकर हम सभी ने अपने अपने कपड़े खोल दिए और फिर से अपने 84 आसन वाले काम में जुट गए.
रात को हम सब लोगों ने मस्ती से चुदाई का मजा लिया और थक कर कब नंगे ही सो गए, याद नहीं.
सुबह देखा तो जीजाजी तैयार हो रहे थे.
शोभना उनका सामान पैक कर रही थी और पिंकी चाय बना रही थी.
हालांकि कपड़े किसी ने नहीं पहने थे.
फिर जीजाजी ने हम सबको भारी मन से गले लगाया और कोट सूट पहन कर टूर पर निकल गए.
उनके टूर पर जाने के बाद हमें भी अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन उनका जाना जरूरी था.
जीजा जी के जाने के बाद भी हम में से किसी ने कपड़े नहीं पहने और नंगे ही बिस्तर पर लेट कर बातें करते रहे.
उसके बाद मुझसे शोभना और पिंकी दोनों लिपट गईं.
हम तीनों कुछ देर के लिए सो गए.
अब जब तक जीजाजी नहीं आ जाते, मुझे ही शोभना और पिंकी को खुश रखना था.
इन पंद्रह दिनों में शायद ही हम तीनों ने घर में कपड़े पहने हों.
मैंने भी पिंकी और शोभना को इन पंद्रह दिनों में भरपूर संभोग और हर तरह के सेक्स का आनन्द दिया.
वक्त जैसे रूक सा गया था और ये पंद्रह दिन कैसे बीते, कुछ पता ही नहीं चला.
पंद्रह दिन बाद जीजाजी टूर से लौट आए.
वे हम तीनों के लिए बढ़िया उपहार लाए थे.
उस रात हम चारों ने मस्त सेक्स किया और सुबह मैं भी भारी मन से सबसे विदा लेकर अपने घर चला आया.
करीब एक महीने बाद शोभना ने फोन करके मुझे घर आने के लिए कहा कि पार्टी है जरूर से आना और उनके दोस्तों की फैमिली को भी बुलाया है.
मैंने पूछा कि पार्टी किस खुशी में है?
तो उसने बताया कि तेरे जीजाजी के जनरल मैनेजर बन जाने की खुशी में हम लोगों ने बड़ी पार्टी रखी है.
शोभना दीदी ने मुझको और विशु को चेतावनी दे दी थी कि पार्टी में जरूर आना है वरना उन्हें बहुत बुरा लगेगा.
इसलिए हम दोनों भी शोभना दी के घर आ गए.
यहां आकर देखा कि शोभना की सभी बहनें और बाकी जीजा जी के सब दोस्त लोग भी सपरिवार आए थे.
शोभना दी ने सचमुच बड़ी मस्त पार्टी दी और वह भी एक दिन नहीं, तीन दिन तक मौज मस्ती चली.
सभी लोग तो इन तीन दिन में दुनिया भूलकर मस्त हो गए.
चौथे दिन सभी बहनें, भाभियां, ननदें और सभी जीजाजी आदि ड्रांईग रूम में बैठ कर कॉफी पी रहे थे.
मैंने पूछा कि आप लोगों का एक क्लोज ग्रुप है और एक संस्था भी है. प्लीज मुझे उसके बारे में भी बताइए ना!
जीजाजी बताने लगे कि हम लोग ही नहीं, बहुत सारे लोगों के परिवार हमारे जैसे हैं और वे लोग भी परिवारिक सेक्स करते हैं. उनका भी मानना है कि परिवार के लोगों के बीच सेक्स और संभोग सबसे अच्छा और सबसे सही है. हम लोगों अपने क्लोज ग्रुप में खुलकर इन सबकी चर्चा करते हैं और सबके घर में मां, बाप, भाई, बहन खुल कर सेक्स करते हैं. सभी अनुभवी लोग एक दूसरे को इस बारे में गाईड भी करते हैं.
जीजा जी ने मुझे भी अपने उस क्लोज ग्रुप में जोड़ लिया था.
उसके बाद मैंने अपने मतलब की कमसिन लौंडियों को एक एक करके किस तरह से चोदा, वह सब भी आपके मेल मिलने के बाद लिखूँगा.
तो दोस्तो, यह मैंने एक सच्चाई को लिखने का प्रयास किया था.
उम्मीद है कि आपको कन्सेप्ट ऑफ़ सेक्सुअल प्यूरिटी अच्छा लगा होगा.
प्लीज अपने विचारों को जरूर साझा करें.