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06-10-2026 02:09 صباحاً
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ओपन सेक्स स्टोरी में मेरे दोस्त की बहन के शहर में काम था. मैं उनके घर में ही रुका. वहां जीजा की बहन भी थी. पहली रात को ही हमने खुले सेक्स का मजा लिया.

मेरे खास दोस्त विशु के घर के सभी लोग भाई, बहनें, जीजाजी, भाभियां आदि सभी उसी तरह बहुत खुले विचार वाले हैं और वे सब एक दूसरे से सेक्स की हद तक एकदम खुले हुए हैं.
उनमें आपस में बहुत प्यार होने के साथ साथ किसी भी मामले में एक दूसरे से कोई संकोच नहीं है.

मैं भी अपने आपको बदल कर उन लोगों जैसा ही ढल गया हूँ और उस परिवार का एक अभिन्न अंग बन गया हूँ.

उन सभी ने भी मुझे सहर्ष अपने परिवार में शामिल कर लिया है यानि वे मुझे मेरे मित्र जैसा ही प्यार देते हैं.
उनके लिए अब मेरे मित्र और मुझमें कोई अंतर नहीं रह गया है.
मैं भी उन्हें अपने परिवार की तरह ही जी जान से प्यार करता हूँ.

एक बार मैं विशु की सबसे छोटी बहन शोभना के घर गया.
मुझे उस समय शोभना के शहर में दस पंद्रह दिन का काम था तो मैंने सोचा चलो होटल का खर्चा बच जाएगा और शोभना की नाराजगी भी नहीं रहेगी.
मैं गाड़ी पकड़कर विशु की बहन शोभना के यहां चला गया.

ठीक शाम चार बजे मैं उधर पहुंच गया था.
घर में शोभना, जीजाजी और उसकी एक ननद पिंकी रहती है.

उस दिन शनिवार था, तो सभी लोग घर में थे.
सभी लोगों ने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया, सब बहुत खुश हुए.

शोभना बोली- प्रिंस तुम सफर से आए हो, हाथ मुँह धो लो, तब तक मैं सबके लिए चाय बनाती हूँ.

मैंने बाथरूम जाकर अच्छे से नहा धोकर कर ढीला ढाला सा कुर्ता पजामा पहन लिया और डायनिंग हॉल में आ गया.
वहां सभी लोग बैठकर चाय पकौड़े के साथ मेरा ही इंतजार कर रहे थे.

जब मैंने बताया कि विशु नहीं आ पाया, तो शोभना बोली- अरे कोई बात नहीं, जैसे विशु वैसे तुम … हमने आज तक विशु और तुममें कोई अंतर किया है क्या?
यह कहते हुए उसने मुझे पीछे से गले लगाते हुए मेरे गाल को चूम लिया.

मैंने भी उठकर शोभना को कसकर लगे लगा कर कहा- नहीं शोभना, मैं वह नहीं कह रहा था. मेरा मतलब था कि वह भी साथ आता तो ज्यादा मजा आता.
जीजाजी बोले- हां, वह तो है … खैर कोई बात नहीं. मन लगाने के लिए हम लोग सभी हैं न!

फिर घर से नौकरी तक, दुनियादारी की सैकड़ों बातें हुईं.
बातें करते कब रात के दस बज गए, पता ही नहीं चला.

तभी शोभना ने आकर टोका- रात भर बातें करते रहना है क्या? पहले खाना तो खा लो.

फिर हम सबने मिलकर एक साथ खाना खाया.
खाना खाने के बाद सोने की तैयारी हुई.

मैं गेस्ट रूम में लगे पलंग पर सोने के लिए जाने लगा.
तो शोभना बोली- अरे वहां क्यों सो रहे हो? चलो हमारे साथ ही सोओ … ढेर सारी बातें करनी है.

वैसे भी हम लोग एक दूसरे से काफी खुले और घुले मिले हुए थे … हमारे बीच कोई परदा नहीं था.
हम सबने सभी कपड़े खोल कर नाम मात्र के कपड़े पहन लिए.

जैसे पिंकी (शोभना की ननद) ने केवल पतली पट्टी से बांधने वाला एक छोटा सा माईको फ्रॉक नुमा गाउन को पहना हुआ था.

वह गाउन उसके गहरे गले के कारण काफी नीचे तक का नजारा दिखा रहा था. नीचे भी वह गाउन उसकी गांड बस दो इंच तक नीचे था और जरा सा ही चलने हिलने में चुत व गांड का मस्त दीदार हो रहा था. यानि उसकी चुत और नितंब लगभग खुले ही थे.
उस कुतिया ने पैंटी पहनी ही नहीं थी तो चुत और गांड का छेद बार बार मेरे लौड़े को तुनकी देने पर मजबूर कर रहा था और वह भी मेरे लंड को प्यार से देखने का कोई अवसर नहीं छोड़ रही थी.

शोभना और जीजाजी दोनों ने भी बस एक पतला सा छोटा सा सूती का गमछा लपेट लिया था जो उनके बिस्तर पर लेटते ही खुल गए.
उन दोनों ने भी नीचे अंडरवियर या जांघिया आदि नहीं पहना था यानि नीचे से सभी पूर्णतः नग्न थे.

सबका मानना था कि दिन भर तो हम कपड़े पहने ही रहते हैं. कम से कम रात को तो पूरे शरीर में हवा लगना चाहिए.
शोभना ने मुझसे भी कहा- सारे कपड़े खोलकर ये गमछा पहन लो और रात को कम से कम फ्री होकर सोओ!

मैंने भी उसी तरह का एक छोटा सा गमछा लपेट लिया और लेट गया.
हम चारों एक ही बिस्तर पर एकदम सट-सट कर ही लेटे हुए थे.

एक तरफ जीजाजी, उनके बगल में उनकी बहन पिंकी, फिर शोभना और शोभना के बगल में मैं.
कमरे में हल्की गुलाबी रोशनी इतनी ही थी कि सब कुछ साफ साफ दिखाई दे.

मेरा, शोभना और जीजाजी का गमछा तो बिस्तर पर लेटते ही खुल चुके थे यानि हम तीन पूरे नग्न हो गए थे.
तभी जीजाजी की बहन पिंकी बोली- मुझे गर्मी लग रही है.

यह कहते हुए उसने भी अपनी उस झांट बराबर ड्रेस को खोला और उसे एक तरफ उछाल दिया.
हम सभी ने भी अपने अपने गमछे उछाल कर दूर फेंक दिए.

अब किसी के बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.

तभी पिंकी जीजा जी से बोली- भैया, थोड़ी मेरी कमर दबा दो ना!
जीजाजी ने पिकीं को अपने बदन से कसकर सटा लिया और उसकी कमर सहलाने लगे.

उस वक्त जीजाजी का लंड पिंकी की चुत में रगड़ खा रहा था, तो पिंकी ने भी जीजाजी के मुँह में अपना मुँह डाल दिया.

शोभना बोली- कमर तो मेरी भी दर्द कर रही है, पता नहीं क्यों … ये बाएं वाले स्तन में भी थोड़ी सुरसुरी सी हो रही है.
जीजाजी बोले- ओह, प्रिंस है ना … उससे सही करवा लो न!

शोभना ने बेहिचक अपना बांया दूध मेरे मुँह में डाल दिया और बोली- प्रिंस थोड़ा चूस दो यार, पता नहीं क्यों बहुत ज्यादा सुरसुरी सी हो रही है. प्लीज चूस दोगे तो आराम मिलेगा.
मैंने शोभना का स्तन अपने मुँह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगा.
उसी के साथ मैंने उसके दूसरे दूध को भी अपने हाथ से पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया.

मैं शोभना के दोनों दूध बारी बारी से चुसकने लगा.
उधर वे दोनों भाई बहन लगे हुए थे, इधर हम दोनों.

मेरा और जीजाजी दोनों का लंड वैसे भी उत्तेजित होकर खड़ा हो गया था.
पिंकी ने तभी करवट बदली, जिससे पिंकी का मुँह अब हमारी तरफ हो गया था और नितंब जीजाजी की तरफ.

अब जीजाजी उसके नितंबों की दरार में अपने लंड में कसकर दबाते हुए उसके दोनों स्तनों को प्यार से सहला रहे थे और हौले हौले से भींच कर दबा रहे थे.
शोभना और पिंकी मदभरी सिसकारियां भरने लगी थीं.

जीजाजी एक हाथ से पिंकी को दबोच कर कर उसके स्तनों को मींज रहे थे, तो अपने दूसरे हाथ से वे पिंकी की बुर में उंगली अन्दर बाहर कर रहे थे.
पिंकी रह रह कर उछल रही थी और आह आह कर रही थी.

इधर मैंने भी शोभना की चुत में उंगली घुसा दी.

शोभना बोली- प्रिंस, जीभ से करो ना … मुझे अच्छा लगेगा. तुम्हारे जीजाजी तो बस अपनी बहन में ही लगे रहते हैं, मैं भी उन्हें मना नहीं करती हूं कि पिंकी के अभी खेलने खाने के दिन हैं, कितने दिन हमारे साथ रहेगी. शादी हो जाएगी तो पराये घर चली जाएगी. इसलिए जब तक साथ में है, उन्हें अपनी बहन को प्यार कर लेने दो.

मैंने भी सहमति जताई और शोभना के होंठों को अपने होंठों से भींचते पर एक गहरा चुम्बन दे दिया.
मैं बोला- हां शोभना, भाई बहन में प्यार होना ही चाहिए.

शोभना ने अपने होंठों को वापस मेरे मुँह से लगा दिया तो मैं भी उसके मुँह में मुँह लगाकर होंठों को मस्ती से चूमने लगा.
उसने मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चुत पर रख कर इशारा किया, तो मैं शोभना के पैरों के पास आ गया.

मैंने उसके दोनों पैरों को मोड़कर अलग अलग करके फैला दिया और शोभना की चुत को प्यार से चूमा.

उसकी चुत पर एक भी बाल नहीं था. एकदम चिकनी मक्खन लगी पावरोटी की तरह फूली हुई मस्त चुत थी.

मैंने उंगली से चुत की दोनों फांकों को अलग किया और चुत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी.
उसने भी आह करके मेरे सर को अपनी चुत में दबा लिया और बालों को पकड़ कर चुत रगड़वाने लगी.

मैं भी उसकी चुत में अपनी पूरी जीभ को एकदम अन्दर तक घुसेड़ कर पूरे छेद को चाटने और चूसने लगा.
शोभना बदस्तूर आह आह करती हुई मेरे सिर को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चुत में दबाए जा रही थी.

कुछ ही देर में वह मस्त हो गई और जोर जोर से अपने नितंबों को बिस्तर पर पटकती हुई अपने मुँह से ‘आह आह और जोर से चूस आह!’ चिल्लाने लगी.

मैं भी कहां रूकने वाला था.
मैं शोभना के पति की मौजूदगी में उसकी चुत को लगातार चूसे और चाटते जा रहा था.

शोभना कुछ ही मिनट में झड़ गयी और निढाल हो गई.
मैं उसकी चुत से निकले रस को चूसता चाटता रहा.

इससे शोभना फिर से गर्मा गई और उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया.

मैं उसके ऊपर तो आया लेकिन 69 की पोजीशन में आ गया.
उसने भी सहर्ष मुझे अपने ऊपर इस अवस्था में ले लिया और मेरे लौड़े को अपने मुँह में ले लिया.

मेरा पूरा लंड शोभना के मुँह के अन्दर था और मेरा मुँह शोभना की चुत में लगा था.

शोभना ने पहले धीरे धीरे मेरे लंड को चुभलाना शुरू किया और कुछ ही पलों के बाद वह तेजी से लंड चूसने लगी.

उसके चूसने से ऐसा लगा रहा था कि वह मेरा पूरा लंड ही खा जाएगी.
मैंने भी अपना पूरा मुँह शोभना की चुत के अन्दर घुसेड़ दिया था और शोभना के दोनों पैरों को मोड़कर, फैलाकर इस तरह कर लिया था कि मेरी जीभ और होंठ शोभना की चुत की पूरी गहराई तक अन्दर चले जाएं.

हम दोनों दम भर एक दूसरे की चुत और लंड को चूस और चाट रहे थे.
शोभना कभी कभी अपनी जांघों को सटाकर मेरे सिर को दबा देती तो मेरा सांस लेना मुश्किल हो जाता.

करीब आधा घंटा तक लगातार चूसते चाटते रहने के बाद आखिरकार मेरे लंड और शोभना की चुत से तेजी से रस की फुहार छूट पड़ी.

हम दोनों ने एक दूसरे का रस पूरी तरह से गटक लिया और चाट चाट कर एक दूसरे की चुत और लंड को एकदम साफ कर दिया.
हम दोनों संतुष्ट हो गए.

दस मिनट वैसे ही पड़े रहने के बाद मैं शोभना के ऊपर से उतर गया और उसके बाजू में लेट कर स्तनों को सहलाते हुए मजा लेने लगा.
उसने मेरी तरफ प्यार से देखा तो मैंने उसके होंठों पर एक गहरा चुम्बन लिया और कसकर भींच लिया.

हमें देखकर पिंकी और जीजाजी भी जोश में आ गए थे और वे दोनों भी खुल कर मस्ती करने लगे थे.
जीजा जी पिंकी की चुत में मुँह घुसाकर उसकी बुर को चाट रहे थे और उसके स्तनों को जोर जोर से मसल रहे थे.

पिंकी आह आह करती हुई बिस्तर पर अपने नितंबों को पटक रही थी.
आखिरकार पिंकी ने जीजाजी को अपने ऊपर खींच लिया और जीजाजी ने अपना पूरा उत्तेजित लंड पिंकी की चुत में घुसेड़ दिया.

एकदम से लंड घुसेड़ने से पिंकी चीखने लगी, तो मुझे न रहा गया और मैंने पिंकी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं उसके स्तनों को सहलाने लगा.
कुछ देर बाद पिंकी ने चीखना बंद कर दिया और वह दो मर्दों का मजा लेने लगी.

जीजाजी धक्का पर धक्का लगा रहे थे और पिंकी जोर जोर से आह, आह चिल्ला रही थी.
जोर जोर से धक्के लगने से पिंकी की आंखों में आंसू भी निकल आए थे, जिनको मैंने अपनी जीभ से व होंठों से चाट लिया.

फिर मैंने पिंकी के माथे और होंठों पर एक गहरा चुम्बन रख दिया.
इधर जीजाजी लगातार धक्के पर धक्का मारते जा रहे थे और पिंकी का चीखना चिल्लाना बंद नहीं हो रहा था.

आखिर में पिंकी चीख मारकर झड़ गयी और शांत हो गयी.
इधर जीजाजी भी झड़ गए और पिंकी के ऊपर निढाल हो गए.

यह देखकर मुझे भी जोश आ गया और मैंने भी शोभना को पकड़ कर उसकी चुत में अपना लंड लगा दिया.
उसके ना ना करते हुए भी मैंने अपने कड़क लौड़े को बहन की चुत में घुसेड़ ही दिया और कस कस कर धक्के लगाने लगा.






आधा घंटा के घमासान संभोग के बाद शोभना और मैं भी झड़ गए और एक दूसरे को कसकर भींच लिया.
मैंने भी शोभना के होंठों को कसकर चूम लिया.

जीजाजी बोले- यह सच है कि पत्नी से संभोग करने से बहुत ज्यादा आनन्द बहन से संभोग करने में आता है.
मैंने भी उनकी बात का समर्थन किया और कहा- हां सही बात है, यही कारण पति पत्नी से ज्यादा गहरा प्यार भाई बहन में होता है.

यह कहते हुए मैंने शोभना को खींच कर अपने बदन से चिपका लिया.
शोभना भी बोली- और नहीं तो क्या … भाई बहन जैसा प्यार पूरी दुनिया में कुछ नहीं होता है. इसलिए तो ये भी अपनी बहन पिंकी तो जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं, यहां तक कि मुझसे भी ज्यादा.

यही सब कहते हुए शोभना ने पिंकी को घुमा लिया और उसे चूम कर बोली- सचमुच हमारी पिंकी सबसे प्यारी और सबसे सुन्दर है … मेरी प्यारी ननद, इसके शादी होकर ससुराल चले जाने पर हम दोनों इसके बिना कैसे रह पाएंगे!
यह कहते हुए शोभना ने पिंकी को अपने अंक में समेट लिया.

हम सभी एक दूसरे को पकड़ कर एक दूसरे से चिपक कर सो गए.

सुबह किसी ने कपड़े पहनने की जरूरत ही नहीं समझी.
सब लोग वैसे ही निवस्त्र दैनिक क्रिया में लग गए.

रविवार था तो सबकी छुट्टी थी और पूरा दिन अपना था.
शोभना वैसे ही नंगी चाय बनाने चली गयी.

चाय बनाकर आई तो हम सब नग्न रह कर ही चाय पीने लगे.
शोभना के बड़े बड़े स्तन बहुत सुन्दर लग रहे थे. पिंकी भी नग्न ही थी, वह भी बहुत सुन्दर लग रही थी.

तभी पिंकी को शरारत सूझी, वह मेरी गोद में बैठ गयी.
जीजाजी ने भी शोभना को खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया और वे शोभना के स्तनों को मसलने लगे.

शोभना भी गर्म होकर जीजाजी को चूमने लगी.

कुछ ही मिनट में वे दोनों हमारे सामने ही सोफे पर बैठे बैठे संभोग करने लगे.

पिंकी मेरी गोद में बैठी थी और हम लोग भी एक दूसरे के साथ छेड़छाड़ करते हुए संभोग दृश्य का आनन्द लेने लगे.
पिंकी ने बताया कि कल भैया को पंद्रह दिन के लिए ऑफिशियल टूर पर जाना है, इसलिए कल का कोटा आज ही पूरा कर ले रहे हैं.

उन दोनों के संभोग कर लेने के बाद हम चारों ने साथ में ही स्नान किया और एक दूसरे को साबुन लगाते मलते, मसलते, नहलाते हुए आनन्द लिया.
उसके बाद भी हमने कपड़े नहीं पहने क्योंकि कल जीजाजी को टूर पर जाना था इसलिए आज के दिन को वे बर्बाद नहीं करना चाहते थे और खुलकर आनन्द लेना चाहते थे.

सो उन्होंने किसी को कपड़े पहनने ही नहीं दिए.
हम नहा धोकर बिना कपड़ों के ही रहे.

दोस्तो, रिश्तों में हुई इस ओपन सेक्स स्टोरी का मजा आप लोगों ने किस हद तक लिया, प्लीज मुझे जरूर बताएं.
मैं आपको इस ओपन सेक्स स्टोरी के अगले भाग में कुछ ऐसे सच को उजागर करूंगा, जिससे आप भी सहमत हो जाएंगे.



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