XHindi चुदाई कहानी में एक सुंदर लड़की की शादी एक साधारण लड़के से हो गयी, बच्चे हो गए. वो लड़की अब औरत बन चुकी थी और उसकी चुदाई नहीं हो पा रही थी.
ये कोई साधारण सेक्स कहानी नहीं है, बल्कि सच्चाई पर आधारित है.
आम लोगों को हर उस चीज में मजा आता है, जो सेक्स से जुड़ी हो … बस उनका मनोरंजन होना चाहिए.
इसलिए आज आप भी इस XHindi चुदाई कहानी को सिर्फ एक मनोरंजक सेक्स कहानी ही समझ कर मजा लें.
उत्तर प्रदेश के एक गांव में एक 19 साल का लड़का रहता था.
वह अपने मां बाप की 2 बहनों में इकलौता बेटा था.
उसका नाम राजू था.
वह तेली समाज से था.
वह सरसों के तेल व अन्य खाने का सामान का व्यापार करता था.
उसके पास कोई बहुत अधिक धन या जमीन आदि भी नहीं थी, फिर भी उसके मां बाप ने एक सुंदर लड़की से उसकी शादी करवा दी.
उस लड़की का नाम चुन्नी था और उसकी उम्र अभी कमसिन थी.
राजू ने अपनी खूबसूरत बीवी की चूत चोद चोद कर हर साल एक बच्चा निकाला और 4 बच्चे निकाल दिए.
जब तक उसकी बीवी खुद सही से जमाने को समझ पाती, तब तक की उम्र में उसने 4 बच्चे पैदा कर दिए थे.
फिर समय निकलता गया.
जब तक चुन्नी अधेड़ उम्र की हुई, तब तक उसके बच्चे भी जवान हो गए.
अब उसके बच्चों की उम्र कुछ इस तरह से हो गई थी.
बड़ा बेटा सोनू उम्र 21 साल.
उससे छोटा बेटा मोनू उम्र 20 साल.
उससे छोटी बेटी डोली की उम्र 19 साल और डोली से छोटा बेटा था कक्कू, उसकी उम्र 18 साल थी.
जब चुन्नी की जवानी निखरी, तो वह एकदम कांटा माल हो गई थी.
उसके चारों बच्चे भी जवान हो गए थे.
हालांकि चुन्नी को देख कर कोई यह नहीं कह सकता था कि वह इन चार जवान बच्चों की मां है.
वह बड़ी ही मस्त माल हो गई थी.
उसका गदराया हुआ जिस्म, मोटे मोटे दूध, उठी हुई गांड और कचौरी सी फूली हुई चुत थी.
जिस वक्त चुन्नी बिस्तर पर कबड्डी खेलती थी तो अच्छे से अच्छा लंड भी उसकी चुत में गोता लगा कर धन्य महसूस करता था.
हालांकि यह कबड्डी बाद में होना शुरू हुई थी.
आज की कहानी में आप चुन्नी की प्यासी चुत की चुदाई का एक गैरमर्द से आगाज कैसे हुआ, वह सुनिए.
चुन्नी का पति राजू भी दिन रात चुन्नी को चोदने की वजह से कमजोर हो गया और वह बुड्ढा दिखने लगा था.
अब राजू के लंड से चुन्नी की चुदाई पहले जैसी नहीं हो पा रही थी, इसी वजह से चुन्नी की चूत में हमेशा कुछ कमी रह जाती थी.
चुत में लंड की कमजोरी के अलावा घर का खर्च भी ज्यादा होने लगा था, इसकी वजह से राजू परेशान रहने लगा था.
वैसे भी आज का जमाना और 20 साल पहले के जमाने मे काफी फर्क था.
पहले कम पैसे में भी गुजारा हो जाता था पर अब महंगी स्कूल शिक्षा और कपड़े दवाएं आदि एक अकेला आदमी कैसे पूरा कर सकता था.
राजू का व्यापार भी ख़त्म होने की कगार पर हो गया था.
वह पूंजी खाने लगा था तो अपने व्यापार को भी नहीं उठा पा रहा था.
कुछ दिनों बाद उसने अपने घर पर ही एक दुकान खोल दी.
अब राजू खुद पूरा दिन गांव गांव में जाकर फेरी लगाता और उसके बच्चे दुकान चलाते.
जब तक उसके बच्चे स्कूल से नहीं आते, तब तक दुकान को चुन्नी संभालती.
फिर जब 2 बजे दोपहर को बच्चे स्कूल से आ जाते, तब बारी बारी से बच्चे दुकान संभालते.
ऐसे ही कुछ महीने बीत गए.
चुन्नी भी दुकान पर बैठती तो मोहल्ले में जो अमीर जाट और गुर्जर रहते थे, वे उससे हंसी मजाक करने लगे थे.
चुन्नी भी उनके अमीर होने के वजह से कुछ नहीं बोलती और वे लोग दुकान के ग्राहक भी थे, तो कुछ नहीं कहती थी.
धीरे धीरे चुन्नी को भी उसकी पहले वाली चुदाई याद आती, पर बेचारी करे तो क्या करे … उसे उन अमीरों की मस्ती भरी बातों में रस आने लगा.
फिर एक दिन एक जाट, जो करीब 50 साल का रहा होगा, उसका नाम भूप सिंह था.
वह दुकान पर आकर बोला- ललानी, मजा तो तुम ही ले रही हो जवानी का!
चुन्नी तनिक गुस्से में बोली- चाचा, अपनी उम्र का तो तनिक लिहाज करो, मैं तुमसे मजाक करने लायक हूँ क्या?
भूप सिंह बोला- ललानी उम्र को छोड़ो, आज भी तेरी चाची पानी मांगे है मेरे सामने!
चुन्नी गुस्से में बोली- जो सामान लेना है, ले लो … और जाओ यहां से!
भूप सिंह बोला- सामान तो लेनो है, पर तू देगी ही ना … तुझे तो उस राजू सूखे का ही पसन्द आवे है.
ये बात सुनकर चुन्नी को इतना गुस्सा आया कि उसे लगा कि वह तराजू के बांट से भूप सिंह का सर फोड़ दे.
पर उसने सिर्फ गुस्से में दुकान को बंद कर दिया और झुक कर दरवाजा मैं ताला लगाने लगी.
इतने में भूप सिंह ने मौका देख कर चुन्नी के पीछे हाथ फेर दिया.
चुन्नी अचानक उठ खड़ी हुई और गुस्से में बोली- आप हद से आगे बढ़ रहे हो!
यह कह कर वह जल्दी से घर के अन्दर भागने लगी.
भूप सिंह अपने लौड़े को सहलाते हुए बोला- तेरे पास जो गाड़ी है, उसे चलाने के लिए मेरे जैसा हट्टा कट्टा मर्द चाहिए. उस मरियल राजू के शरीर में और उसके गेयर में अब वह ताकत नहीं बची है.
चुन्नी ने उसकी बातों को सुन कर अनसुना किया और घर में घुस कर दरवाजा लगा लिया.
पर अभी भी चुन्नी के कानों में भूप सिंह की ये बात गूँजती रही कि राजू के गेयर में ताकत नहीं रही.
उसे बात समझ में आ गई थी कि भूप सिंह गेयर माने लंड में ताकत खत्म हो गई की बात कर रहा था!
उसने अपने कमरे में आकर भूप को बहुत गाली दी और सो गई.
जब स्कूल से बच्चे घर आए तो उन्होंने दुकान के बारे में पूछा.
चुन्नी ने बच्चों से तबियत खराब होने का बहाना बना दिया और मन ही मन अपने आदमी के गेयर को चैक करने की सोचने लगी.
उसकी बहुत दिनों से चुदाई नहीं हुई थी तो वह रात को अपने पति राजू से चोदने की कहने लगी.
राजू ने कहा- पगला गई हो क्या … अब हमारे बच्चे जवान हो गए हैं … और मैं बहुत थक भी गया हूं बुरी तरह से तो ये सब बकवास बंद कर!
फिर चुन्नी ने भूप के बारे में बताया- वह मुझसे अजीब अजीब तरह से मजाक करता है!
राजू बोला- वे लोग गांव में काफी जमीन ज्यादाद वाले लोग हैं … और अमीर लोग हर किसी से मज़ाक करते हैं. में उनसे मना कर दूंगा और समझा दूंगा.
चुन्नी अपने मन में गुस्सा लेकर सो गई.
सुबह फिर वही बच्चों का स्कूल जाना और राजू का फेरी पर निकल जाना हुआ.
चुन्नी ने भी घर का काम निपटा कर दुकान खोल ली.
आज उसे डर था कि भूप सिंह ना आ जाए.
पर वह नहीं आया, उसकी जगह मोहल्ले के कुछ लड़के सिगरेट पीने और कोल्डड्रिंक पीने आ गए.
उन्होंने भी मजाक किया- भाभी, इतनी लेट क्यों दुकान खोलती हो!
दूसरा बोला- राजू भईया भाभी को लेट ही फ्री करते होंगे. भाभी हैं भी तो इतनी सुन्दर!
चुन्नी बोली- दस बजे दुकान खुलती है. घर का काम भी करना होता है और अगर कोई सामान तुमको लेना हो तो और भी दुकान हैं मोहल्ले में, उनसे ले लिया करो न!
उन लड़कों में से एक बोला- भाभी, हमें तो आपका सामान ही अच्छा लगता है, औरों का नहीं!
चुन्नी समझ तो गई कि कौन से सामान की बात कर रहे हैं, पर वह कुछ बोली नहीं.
अब ऐसे ही हर दिन उससे कोई ना कोई अश्लील मजाक करता रहता.
ऐसे ही हर रात वह अपने आदमी से चिपकती, पर राजू उसे कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देता.
एक दो बार उसने जिद करके चुदना चाहा, पर राजू का लंड कुछ देर में ही निकल जाता और चुन्नी प्यासी रह जाती.
ऐसे ही दिन बीतने लगे.
फिर एक दिन उसकी दुकान पर आने वाले एक दूध वाले से चुन्नी बोली- तुम दूध किस रेट देते हो?
दूध वाले का पूरा नाम तो नबी आलम था पर उसे लोग आलम ही कहते थे.
ये पहले भी काफी बार चुन्नी से मजाक कर चुका था … पर आज पहली बार चुन्नी ने बात छेड़ी थी.
आलम बोला- रेट छोड़ो ललानी, बस आप ये बताओ कब से दूध दूँ आपको?
चुन्नी बोली- हमारा आधा लीटर दूध दूसरे दूध वाले से आता है, पर आजकल वह ज्यादा पानी मिला रहा है.
आलम बोला- मार्केट रेट तो 55 रुपए लीटर है, ललानी सिर्फ तुम्हारे लिए 50 रुपए लगेगा!
चुन्नी बोली- ठीक है, मैं आज उनसे मना कर दूंगी, कल से तुम दूध देना शुरू कर देना.
आलम बोला- मेरा दूध पीकर देखो ललानी, सबका दूध भूल जाओगी!
इस बात पर चुन्नी हंस पड़ी और बोली- तुम भी दूध देते हो क्या?
आलम बोला- देता तो मैं भी हूँ, पर वह सिर्फ आपके लिए निकलेगा .. जब पीना हो बता देना!
चुन्नी उसकी बात सुनकर चुप हो गई और कुछ नहीं बोली.
वह समझ गई कि ये साला दूध की जगह लंड की क्रीम की बात करने लगा है.
फिर दूसरे दिन जब आलम दूध देने आया तो सब लोग तैयार हो रहे थे.
सबके सामने वह कुछ ज्यादा नहीं बोला और दूध देकर चला गया.
फिर सबके जाने के बाद रोज की तरह आज भूप सिंह भी दुकान पर आ गया और बोला- ललानी, ये बात तुम्हारी अच्छी नहीं है कि तुमने हमारे बीच की बातें राजू से कह दी!
चुन्नी बोली- तो क्या हुआ चाचा? तुम भी तो उस दिन कुछ ज्यादा ही बोल रहे थे?
भूप सिंह बोला- ललानी, तू चाचा मत बोला कर … और रही बात उस दिन की, तो मैं आज भी कह रहा हूं कि तेरी गाड़ी चलाना राजू के बस की ना है. चल सच सच बता, तेरी गाड़ी कितनी बार चलती है रात को!
चुन्नी ये सुनकर चुप हो गई और बोली- चाचा तुमसे बहस करना बेकार है.
भूप सिंह बोला- जिस दिन मेरे गेयर से तूने गाड़ी चलवा ली न … उस दिन तुझे मैं चाचा नहीं लगूंगा. मेरी लुगाई से जाकर पूछ, कैसे हर रात को हाथ जोड़ती है मेरे सामने!
चुन्नी चुप हो गई और कुछ नहीं बोली मगर उसे आज भूप सिंह पर ज्यादा गुस्सा नहीं आ रहा था.
उसे तो उसकी बातों पर हंसी आ रही थी.
कुछ देर तक भूप सिंह आएं-बाएं बकता रहा पर चुन्नी ने उसकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया.
वह बस चुपचाप उसकी बकवास सुनकर मुस्कुराती रही.
फिर थक हार कर भूप सिंह भी चला गया.
अब तो आए दिन हर कोई चुन्नी से मजाक करता रहता.
इन सब मादरचोद किस्म के लोगों के मजाक को अनसुना करने से चुन्नी की दुकानदारी अच्छी चलने लगी.
अब तो पूरा मोहल्ला बस चुन्नी को जल्दी दुकान खोलने को कहता, पर चुन्नी हर रोज़ घर का काम निपटा कर ही दुकान खोलती.
अब तो चुन्नी को भी दुकान पर बैठने में मजा आने लगा था, पर क्या करे … बेचारी दोपहर के बाद तो बच्चे स्कूल से आ जाते और उसे उठना पड़ता.
गांव वाले भी चाहते थे कि चुन्नी भाभी या चुन्नी चाची के दर्शन उन्हें दोपहर बाद भी हों, पर बच्चे स्कूल से आने के बाद दुकान संभाल लेते.
पता भी नहीं चला कि कब महीना बीत गया और चुन्नी अब अन्दर से सभी के मजाक से गर्म भी होने लगी थी.
फिर चुन्नी की जिंदगी में एक नया मोड़ आया.
चुन्नी आलम से महीने से भी 10/12 दिन ऊपर दूध ले चुकी थी पर उसने आज तक एक बार भी पैसों के लिए नहीं कहा.
फिर एक दिन दूध लेते टाइम चुन्नी नबी आलम से बोली- महीना हो गया, फिर भी तुमने दूध का हिसाब नहीं मांगा?
नबी आलम बोला- अरे ललानी हो जाएगा हिसाब … तुम बस ये बताओ कि आधा लीटर दूध में गुजारा हो जाता है तुम्हारा?
चुन्नी बोली- इस महंगाई में अगर दूध की चाय मिल रही है, तो ये क्या कम है?
नबी आलम बोला- अरे ललानी, कम से कम अपना ना सही … मगर बच्चों का तो ख्याल करो. राजू भईया को तो तुम देखती ही हो कि कितने दुबले पतले हो गए हैं. अब बच्चों को भी ऐसे ही बनाओगी क्या?
चुन्नी बोली- पर इस महंगाई में उन्हें कहां से दूध पिलाऊं!
नबी आलम बोला- फिक्र मत करो, अब से 2 लीटर दूध लिया करो और खूब दूध पियो.
चुन्नी बोली- नहीं नहीं, दो लीटर हमसे ना पिया जाएगा. तुम्हारा दूध इतना महंगा भी है!
नबी आलम ने चारों तरफ देखा और बोला- ललानी कम से कम बच्चों की तो फिक्र कर लो, राजू भाई की तो शादी हो गई.
अगर बच्चे दुबले पतले बीमार से होंगे तो शादी के लिए कोई रिश्ता भी नहीं आएगा!
चुन्नी बोली- ये बात तो ठीक है, पर अगर तुम 50 का 2 लीटर दोगे तो हम ले लेंगे.
चुन्नी को लगा कि ये मना कर देगा क्योंकि इतनी महंगाई में जहां पहले ये पानी मिला दूध 55 रूपए लीटर ले रही थी, आज नबी आलम से एकदम गाड़ा एक बूंद भी पानी नहीं मिला दूध 50 रुपए प्रति लीटर ले रही है … और अब 50 में 2 लीटर तो कोई भी नहीं देगा!
पर नबी आलम ने उसका चेहरा देखकर कहा- ललानी तुम भी क्या … घर की बात में पैसों को बीच में लाती हो … वे बच्चे मेरे भी हैं.
चुन्नी बोली- और हां, अगर पैसे देने में देर लगी तो घर के चक्कर नहीं लगाना और मुँह भी नहीं बिगाड़ना!
नबी आलम बोला- ललानी, तुम मुझे पराया समझती हो, पर मैं नहीं.
वह 2 लीटर दूध देकर चला गया.
दूसरे दिन चुन्नी ने अपने बच्चों से हिसाब जुड़वा कर 46 दिन के दूध के रूपए रख दिए.
अगले दिन जब नबी आलम दूध देने आया तो चुन्नी ने उसे ज़िद करके दूध के पैसे दे दिए.
नबी आलम पैसे लेकर कुछ देर सोच में पड़ गया और बोला- ललानी, कल दूध देर से मिलेगा, मुझे कुछ काम है.
चुन्नी बोली- कोई बात नहीं.
फिर नबी आलम चला गया और दूसरे दिन नबी आलम गली में खड़ा होकर बच्चों और राजू के जाने का इन्तजार करने लगा.
करीब 9 बजे जब राजू और बच्चे चले गए तब वह चुन्नी के घर दूध की बाल्टी और कुछ सामान लेकर घुस गया.
उसने चुन्नी को आवाज लगाई तो चुन्नी आ गई.
फिर नबी आलम अपना सामान नीचे रख कर चुन्नी के सामने बोला- ललानी, तुमने मेरी बात नहीं मानी और मुझे दूध के पैसे दे ही दिए. अब तुम्हें मेरी बात माननी पड़ेगी और ये कुछ सामान लेना पड़ेगा तुम्हें!
चुन्नी ने बहुत मना किया, पर नबी आलम बोला- मैं ये सामान वापस तो लेकर नहीं जाऊंगा, तुम चाहे तो फेंक देना.
यह कह कर वह अचानक से चुन्नी के गले लग गया और उसे कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया.
चुन्नी ने इसकी कभी सपने में कल्पना नहीं की थी.
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे उसकी पकड़ से निकले.
अपने नीचे उसे नबी आलम का उसकी लुंगी में खड़ा लंड भी महसूस होने लगा था.
दोस्तो, आपको अब तक समझ में आ रहा होगा कि नबी आलम ने चुन्नी को चोद दिया, लेकिन इधर एक ट्विस्ट है.
वह क्या है, इसे मैं XHindi चुदाई कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
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धन्यवाद.