हॉट मॅाम Xxx स्टोरी में मेरी माँ ने अपनी सहेली के जवान बेटे को पटाकर उसका लंड चूसकर अगले दिन चुदाई का प्रोग्राम बना लिया. खेतों में उसने मेरी मम्मी को कैसे चोदा?
दोस्तो, मैं पवन अपनी सेक्स कहानी में आपको मां की सहेली के लड़के विजय से मां की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
मेरी माँ ने अपनी सहेली के बेटे का लंड चूसा
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि मेरी मां ने विजय कर लंड अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया था.
अब आगे हॉट मॅाम Xxx स्टोरी:
विजय का हाथ धीरे-धीरे मां की चूत को रगड़ने लगा.
मां भी टोपे को जोर-जोर से चूसने लगीं.
विजय भी चूत रगड़ने लगा, तो मां की चूत एकदम गीली हो गई.
अचानक किसी जानवर की आवाज से मां और विजय अलग हो गए.
मां ने देखा कि विजय का लंड पहले से काफी बड़ा हो चुका था.
अब मां लंड की लंबाई से डर रही थीं कि इतना बड़ा लंड उनकी चूत पता नहीं झेल भी पाएगी या नहीं!
विजय बोला- क्या देख रही हो काकी?
‘देख रही हूँ, इतना बड़ा कैसे लूँगी!’
वे चुप हो गईं.
‘क्या काकी, लेने का इरादा हो गया?’
मां शर्माने लगीं.
‘काकी, अब इसे ठंडा करो …. नहीं तो रात भर सोने नहीं देगा!’
मां बोलीं- कैसे ठंडा करूं?
तो वह बोला- मुँह में लेकर चूस कर इसका रस निकाल दो न!
मां बोलीं- मुँह में तो …
विजय उनकी बात काटते हुए बोला- चूत में कल कंडोम आने के बाद ले लेना!
तो मां शर्माने लगीं और विजय कर लंड मुँह में लेकर आगे-पीछे करने लगीं.
विजय मां के सिर को पकड़ कर नीचे दबा रहा था.
मां की आंखें बड़ी-बड़ी हो रही थीं.
थोड़ा सा लंड ही मुँह में जा पा रहा था.
ऐसे ही कुछ देर तक मां लौड़े को ऊपर-नीचे करती रही थीं और अपने हाथ से उसे जोर-जोर से हिला भी रही थीं.
दो मिनट के बाद विजय का शरीर अकड़ने लगा और उसने अचानक से मां के मुँह में पिचकारी मार दी.
मां गुस्से में चिल्लाने लगीं.
विजय बोला- काकी, माफ कीजिएगा … मुझे पता नहीं था कि ऐसा हो जाएगा … ये मेरा पहली बार है.
तो मां बोलीं- कोई बात नहीं, मैं आगे से खुद ही ध्यान रखूँगी.
विजय खुश हो गया.
वे दोनों थोड़ा-बहुत काम करके घर चले गए.
दूसरे दिन विजय बहाना करके स्कूल नहीं गया, सीधा सरकारी अस्पताल गया.
वहां जाकर चोरी-छुपे एक डिब्बा कंडोम को उठाकर ले आया.
उधर से वह सीधे खेत में पहुंच गया.
मां काम कर रही थीं.
वह जाकर झाड़ के नीचे बैठ गया.
मां दोपहर में आराम करने आईं, तब देखा तो वे बोलीं- विजय तू कब आया?
‘अभी आया काकी, आपको ध्यान नहीं था.’
मां बोलीं- क्या बात है? आज स्कूल गया नहीं? तेरी मां भी आज नहीं आई?
विजय बोला- काकी, कल का काम अधूरा था इसलिए मैंने उन्हें आने से मना कर दिया.
‘क्या बोल रहा है तू?’
विजय कंडोम बताते हुए बोला- देखो, मैं फुकना लेकर आया हूँ!
मां हैरान हो गईं और बोली- नालायक!
विजय हंसने लगा और उसने मां के हाथ में मोबाइल दे दिया.
उसमें पहले से ही एक चुदाई की फिल्म चल रही थी.
मां को भी चुदाई देखने में मजा आने लगा.
‘काकी, ऐसा ही हम दोनों भी करते हैं!’
मां- नहीं, कोई आ जाएगा.
‘चलो झाड़ियों में चलते हैं, उधर कोई नहीं आएगा.’
फिर मां तैयार हो गईं और वे विजय के साथ झाड़ियों में जाने लगी थीं.
झाड़ियों में जाते ही विजय ने अपना पैंट खोल दिया और उसने मां से भी साड़ी उतारने को कह दिया.
मां ने भी झट से अपनी साड़ी उतार दी और उसे बिछा दी.
विजय मां के ब्लाउज के बटन खोल दिए.
बटन खुलते ही मां के दोनों रस भरे दूध आजाद हो गए.
विजय बोला- पूरा ब्लाउज हटा दो न काकी.
मगर मां ने पूरा ब्लाउज उतारने के लिए मना कर दिया.
अब विजय ने आगे हाथ बढ़ा कर मां के पेटीकोट का नाड़ा खोलने का प्रयास किया.
तभी मां बोलीं- विजय, रुक जा कोई आ जाएगा.
‘नहीं काकी, कोई नहीं आएगा क्योंकि अपने खेत सबसे आखिरी में हैं.
फिर मां ने अपने हाथ से अपने पेटीकोट को खोल कर अलग कर दिया.
मेरी मां की चूत एकदम बालों से भरी हुई और कड़क थी.
विजय मेरी मां की झांटों वाली चुत को सहलाने लगा.
मां भी मादक सिसकारियां लेती हुई बोलीं- आह्ह्ह विजय… बड़ी आग लग रही है.
विजय नीचे झुक गया और वह मेरी मां की चूत को चाटने लगा.
मां ने एकदम से उसे रोक दिया- हट विजय … ये गंदी जगह है!
विजय ने झट से मोबाइल में वीडियो लगा दिया- जैसे ये करते हैं, वैसे हम भी करेंगे!
मां ने चुत चटाई देखी तो वे राज़ी हो गईं.
उस वीडियो में एक आदमी औरत की चूत चाट रहा था.
अब विजय भी मां की चुत चाटने लगा.
मां को भी मजा आने लगा और वे कामुक सिसकारियां लेती हुई बोलीं- आह विजय बेटा, बहुत अच्छा लग रहा है!
कुछ देर बाद विजय अपनी दो उंगलियों को एक साथ मेरी मां की चूत में पेल कर अन्दर-बाहर करने लगा.
इससे मां और पागल हो गईं.
विजय ने इसी तरह से मां को झाड़ दिया और उनकी चुत के रस को चाट कर साफ कर दिया.
मां चुत चटने से गर्म हो गईं और वे वापस विजय के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.
विजय मेरी मां के दूध दबा रहा था और मजे ले रहा था.
मां अब विजय के लंड के नीचे लटक रहे उसके दोनों अंडकोषों को भी चाट रही थीं.
वे जोर-जोर से मुँह में अंडकोषों को लेकर अन्दर-बाहर कर रही थीं.
विजय चुदास से भर गया और बोला- काकी, अभी से बिना काम किए झाड़ दोगी क्या?
मां ने यह सुना तो उसका लंड छोड़ दिया और बोलीं- अब क्या करना है?
विजय ने मां को हाथ में कंडोम दे दिया और बोला- काकी, लौड़े को बरसाती पहनाओ!
मां उसके लंड पर कंडोम चढ़ाने की नाकाम कोशिश करने लगीं.
मगर उन्हें पता ही नहीं था कि किस तरह से लंड पर कंडोम चढ़ाया जाता है!
फिर विजय ने एक वीडियो दिखाया.
मां वैसे करने लगीं पर उन्हें जानकारी नहीं थी तो कंडोम फट गया.
विजय बोला- काकी, ऐसे नहीं.
उसने एक और कंडोम निकाल कर मां को दे दिया और हाथ पकड़ कर कंडोम को खोल कर लंड के सुपारे पर चढ़ाया उसके बाद कंडोम की रबर के किनारे को हाथ से सरका कर उसे चढ़ाने लगा.
कंडोम लौड़े पर चढ़ तो गया मगर वह नौ इंच के लौड़े के हिसाब से कुछ छोटा था तो पूरा लंड कंडोम से नहीं ढक पा रहा था.
हालांकि मां खुश हो रही थीं कि वे कंडोम लगाना सीख गईं.
उतने में विजय ने कहा- चलो काकी, चित लेट जाओ!
मां बोलीं- बहुत बड़ा है विजय … मैं कैसे लूँ पाऊंगी इतना बड़ा?
तो विजय ने कहा- मैं धीरे-धीरे करूँगा. आप बोलेंगी तो रुक जाऊंगा!
मां बोलीं- ठीक है.
फिर विजय ने टोपे पर थूक लगाकर मां की चूत को फैलाते हुए कहा- काकी, बहुत बाल हैं.
मां बोली- क्या कर लूँ? किसके लिए काटूँ?
तो विजय कुछ नहीं बोला.
सुपाड़ा मां की चूत पर लगाकर उसने धक्का लगाया.
तो लंड चूत में नहीं जा रहा था, बार-बार साइड में जा रहा था.
मां बोलीं- नालायक चूत का छेद तो ढूँढ नहीं पा रहा है और चोदने चला काकी को!
वह बोला- मैं कौन सा अंभवी चुदक्कड़ हूँ काकी … आज पहली बार तो चुत मिली है चोदने को!
तो मां बोलीं- ओह मुझे ही ध्यान रखना चाहिए, तेरा पहली बार है.
अब मां ने उसके लंड को पकड़ा और चूत में दबाकर बोलीं- अब धीरे-धीरे धक्का मार!
विजय ने धक्का मारा तो लंड अन्दर घुस गया.
मां सिसक उठीं और दर्द से कराहने लगीं.
विजय डर गया और बोला- क्या हुआ काकी?
‘कुछ नहीं .. तू धीरे-धीरे कर, मैं सहन कर लूंगी!’
विजय धक्के लगाने लगा.
जैसे-जैसे लंड अन्दर जा रहा था, मेरी मां वैसे सिसक उठतीं.
धीरे-धीरे पूरा लंड अन्दर चला गया.
मां छटपटा रही थीं इसी वजह से उन्होंने नीचे हाथ लगाया तो कुछ चिपचिपा सा कुछ लगा.
मां ने हाथ देखा तो खू.न लगा हुआ था.
वे घबरा कर विजय से बोलीं- तूने मेरी सील तोड़ दी!
विजय की समझ में कुछ नहीं आया कि साला अब सील कैसी टूट गई.
लेकिन वह धीरे-धीरे धक्का मारता रहा.
कुछ देर बाद मां को भी उसके साथ चुदने में मजा आने लगा.
उनकी कमर ने लंड से टक्कर लेते हुए वापस झटका लगाया तो विजय ने भी अपने धक्के तेज कर दिए.
कुछ ही पलों बाद नजारा बदल गया.
अब मेरी मां भी उछल-उछलकर विजय के लंड को अपनी चूत में ले रही थीं और मदभरी सिसकारियां ले रही थीं.
हॉट मॅाम Xxx से कराहती हुई बोलीं- आह … चोद विजय बेटा आहह … सीई … आह्ह्ह!
वे दोनों चुदाई में इतने ज्यादा मशगूल हो गए थे कि पास में आई गीता चाची भी उन दोनों को नहीं दिखाई दे रही थीं.
चाची उन दोनों को सेक्स करते हुए देख रही थीं और हैरान भी थीं कि उनके बेटे का इतना बड़ा लंड सुरेखा ने कैसे ले लिया.
विजय और जोर से धक्का मारते हुए बोला- काकी, आपने तो मुझे हैरान कर दिया. मैं सोचता था मैं इतना बड़ा लंड कैसे डाल पाऊंगा!
तो मेरी मां बोलीं- अब से रोजाना मेरी चूत में ये लंड चाहिए … आज से ये चुत तेरी हुई!
यह कहती हुई मेरी मां और तेज तेज धक्का मारने के लिए कहने लगीं.
उधर विजय ताबड़तोड़ लंड पेल रहा था तो इधर मां भी उछल-उछलकर लंड ले रही थीं.
कुछ ही देर बाद मेरी मां अकड़ने लगीं और चूत का फव्वारा छूट गया.
मां झड़ कर ढीली हो गईं.
थोड़ी देर के बाद वे फिर से उछलने लगीं.
विजय अभी झड़ा नहीं था तो वह भी धक्के लगाने लगा.
उसने मेरी मां के एक दूध को अपने मुँह में भरा और खींच खींच कर चूसने लगा और अपने धक्के तेज कर दिए.
मां को दर्द के साथ मजा आ रहा था.
वे अपने कूल्हे उछालने लगीं.
गीता चाची सब देख रही थीं, उन्होंने दोनों को डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा.
करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद विजय बोला- काकी, मैं झड़ने वाला हूँ!
मां बोलीं- अन्दर नहीं … आह बाहर ही निकलना!
तो विजय बोला- अरे काकी, कंडोम है चिंता मत करो!
काकी को मानो राहत मिल गई.
फिर विजय तेज तेज धक्के मारते हुए अकड़ने लगा और एक बड़े धक्के के बाद वह झड़ गया.
तेज धक्के के कारण मां एकदम चिल्ला पड़ीं- नालायक क्या कर दिया? साले मैं रंडी नहीं हूँ.
तो विजय बोला- काकी, अगली बार ध्यान रखूँगा.
फिर वह मां के ऊपर ऐसे ही लेटा रहा.
धीरे-धीरे दोनों की सांसें नियंत्रित हो गईं.
विजय ने लंड बाहर निकाला तो थप की आवाज से निकल आया.
कंडोम में विजय के लंड का पानी देखकर मां हैरान हो गईं कि इतना पानी?
तभी गीता चाची बोलीं- बेटा किसका है?
चाची की आवाज सुनकर वे दोनों शर्मा गए और नीचे देखने लगे.
मां बोलीं- तू कब आई?
गीता बोली- जब तू खू.न देख रही थी, इतना बड़ा कैसे ले लिया तूने?
‘आ … और लेकर तू भी देख ले!’
गीता चाची हंस दीं.
मां की साड़ी पर खू.न लगा हुआ था और उनकी चूत अब भोसड़ा बन चुकी थी.
विजय बोला- काकी, बहुत मजा आया चलो नदी में चलते हैं!
वे तीनों नदी में नहाने चले गए.
दोस्तो, आपको मेरी यह हॉट मॅाम Xxx स्टोरी कैसी लगी?
यदि आपके पत्र मिले, तो आगे का पार्ट भी बहुत जल्दी लेकर आऊंगा जिसमें आप जानेंगे कि कैसे विजय ने दोनों महिलाओं को नंगी करके नदी के किनारे ही चोद दिया!