बिग ऐस्स मॅाम स्टोरी में मेरे पिताजी बाहर रहते थे तो माँ की चुदाई नहीं हो पाती थी. माँ की एक सहेली का जवान बेटा था. माँ ने अपनी सहेली के साथ मिलकर उसे पटाया.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम पवन है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ.
मैं आपकी सेवा में एक बार फिर से हाजिर हूँ.
यह बिग ऐस्स मॅाम स्टोरी उस समय की है, जब खेतों में फसल कटाई होती है.
आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूँ कि यह कहानी मेरे सामने नहीं घटी थी लेकिन मुझे इस कहानी का एक एक सीन मालूम है.
वह सब एक रहस्य है जिसे आपको जानने की शायद जरूरत नहीं है.
पहले मैं अपनी मां के बारे में बताता हूँ.
मेरी मां का नाम सुरेखा है.
उनकी उम्र 45 साल है.
खेतों में काम करने की वजह से उनका बदन कसा हुआ है.
उनके दूध एकदम कड़क हैं और 36 इंच के हैं.
गांड चालीस की है जो खेतों में काम करने की वजह से बाहर को निकली हुई है.
बिग ऐस्स मॅाम का रंग सांवला है.
उनकी एक सहेली भी है उनका नाम गीता है.
गीता चाची का भी बदन कसा हुआ है, उनके दूध का साइज मां के मुकाबले थोड़ा कम है.
शायद 34 इंच के रहे होंगे.
चाची की भी गांड बाहर को निकली हुई है और उनकी गांड का आकार शायद 36 का रहा होगा.
चाची एकदम गोरी हैं.
वे दोनों रोज सुबह उठकर घर का काम निपटा कर खेतों में काम करने निकल जाती थीं.
उनकी सेक्स लाइफ ना के बराबर थी क्योंकि सेक्स आदि के लिए उनको ज्यादा समय मिल ही नहीं पाता था.
मेरे पिता जी तो सालों से मां के साथ रहते ही नहीं थे तो खेती का सारा काम मेरी मां ही देखती थीं.
गीता चाची का लड़का भी कभी-कभी छुट्टी के दिन खेतों में जाता था.
वह दिखने में ठीक-ठाक था.
उसका नाम विजय था और वह 18 साल का हो गया था.
वह खेतों में आता और अपना फोन लेकर टाइम पास करता रहता था.
एक दिन मां और गीता चाची काम कर रही थीं तो वह झाड़ के नीचे बैठकर फोन देख रहा था.
उसका ध्यान मां की बिग ऐस्स पर गया तो उसे ख्याल आया कि मेरी मां की गांड कितनी सेक्सी है.
वह मन ही मन विचार करने लगा और मोबाइल में एक पॉर्न साइट खोल कर सेक्स के वीडियो देखने लगा.
सेक्स के वीडियो देख कर उसका लंड तनकर बड़ा हो गया.
वह अपने लंड को ऊपर से मसलने लगा.
मां और गीता चाची जब काम करके थक गईं तो वे दोनों आराम करने झाड़ के नीचे आ गईं.
वह मेरी मां को घूर कर देखने लगा.
मां ने अपनी साड़ी अपने वक्ष स्थल से हटा कर कमर से लपेट कर रखी थी, ऊपर सिर्फ ब्लाउज था जो पसीने की वजह से उनके मम्मों से चिपका हुआ था.
मां के मम्मों के निप्पल तने हुए साफ दिख रहे थे.
यही हाल गीता चाची का भी था.
वे भी इसी पोजीशन में थीं लेकिन विजय का ध्यान सिर्फ मेरी मां पर जा रहा था.
मां उसकी इस हरकत से अनजान थीं.
फिर वे दोनों बैठकर आराम कर रही थीं.
उन दोनों को बीड़ी पीने की आदत थी तो वे दोनों बीड़ी पीती हुई बातें कर रही थीं और किसी बात को लेकर हंस रही थीं.
शायद उन दोनों में किसी मर्द को लेकर चर्चा हो रही थी और उनकी हंसी बता रही थी कि वे दोनों सेक्स को लेकर हंस रही थीं.
तभी अचानक मां की नजर विजय के पैंट पर बने तंबू पर चली गई.
मां ने गीता से कहा- तेरा लड़का बड़ा हो गया है, देख उसका सामान फूल रहा है!
वे दोनों हंसने लगीं.
विजय समझ गया कि वे दोनों उसे देख कर ही कुछ बात कर रही हैं तो उसने शर्म से सर झुका लिया और वह नीचे देखने लगा.
उस वक्त मेरी मां की आंखों में एक अलग किस्म की चमक आ गई थी.
ऐसे ही दिन गुजरते गए.
विजय को जब भी मौका मिलता, वह मेरी मां को वासना से देखता.
मेरी मां भी उसकी नजरों को भांपने लगी थीं तो वे भी उसे देख कर मुस्कुरा देती थीं.
अब तो विजय रोज स्कूल की छुट्टी के बाद खेतों में आने लगा था.
जब वह देर से आता, तो मां बोलतीं- गीता, विजय अभी तक नहीं आया?
एक दिन गीता चाची को लगा कि सुरेखा ऐसे रोज क्यों पूछ रही है.
उस दिन चाची ने मजाक में बोला- उसका लंड इतना पसंद आ गया क्या तुझे?
यह सुनकर मेरी मां शर्म के मारे नीचे देखती हुई हंसने लगीं और बोलीं- इसमें बुरा क्या है, विजय भी सीख जाएगा … और मेरा भी इतने सालों का सूखा खत्म हो जाएगा!
फिर गीता चाची बोलीं- देख सुरेखा, अगर उसका छोटा हुआ और तुझे तड़प ज्यादा लग गई तो क्या करेगी? तो एक काम करते हैं, पहले उसका लंड देखते हैं … फिर तय करते हैं.
मेरी मां ने हंस कर हामी भर दी.
अगले दिन किसी बहाने से वे दोनों खेतों के पास बह रही नदी के पास जाने लगीं.
गीता चाची ने विजय से कहा- चलो नदी पर नहाने चलते हैं.
विजय ने हामी भर दी और वह भी उनके साथ जाने लगा.
उसे भी लग रहा था कि आज उसे मेरी मां की जवानी देखने को मिल जाएगी.
नदी के किनारे पहुंच कर मां और गीता चाची ने अपनी-अपनी साड़ी उतार कर साइड में रख दी.
वे दोनों सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं.
ये देखकर विजय की हालत खराब हो गई.
विजय भी उनके साथ नदी में जाने लगा.
तब गीता चाची बोलीं- कपड़े उतार दे न!
विजय ना-नुकुर करने लगा.
मेरी मां बोलीं- बेटा, तुझे इन्हीं हाथों से नहलाया है बहुत बार … अब शर्म मत कर और कपड़े उतार कर नंगा ही आ जा.
विजय ने शर्माते हुए कपड़े उतारे, तो उसका लंड देखकर दोनों हैरान हो गईं.
इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा लंड देख कर दोनों ने मुँह पर हाथ रख लिया.
विजय भी लंड को हाथों से छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए नदी में आकर नहाने लगा.
मां की आंखों में अलग चमक आ गई थी.
उनकी चुत से पानी रिसने लगा था.
मां ने गीता चाची से कहा- इसको अपने हिसाब से मैं तैयार करती हूँ!
तो गीता चाची ने जवाब दिया- तेरे बेटे जैसा है, जैसा तू चाहे.
क्योंकि गीता चाची को मालूम था कि मां उसके साथ कुछ गलत नहीं करेगी.
साथ ही चाची जरा हैरान भी थीं कि उनकी सहेली सुरेखा इतना बड़ा लंड कैसे ले लेगी.
फिर असली खेल शुरू हुआ.
मां वैसे तो सीधी-सादी औरत थीं, उनको ये सब जम नहीं रहा था लेकिन चुदास के चलते उन्होंने शायद मन बना लिया था.
उस दिन नहाने के बाद मेरी मां ने विजय को अपनी चूचियां दिखा कर सैट कर लिया था और उसकी भूखी निगाहों को देख कर समझ लिया था कि लौंडा जरा सी ढील देने में फिसल कर चुत में घुस जाएगा.
यह बात चाची ने भी समझ ली थी.
अभी उनका यह तय नहीं था कि वे अपने बेटे के लंड से चुदाई का मजा लेंगी या नहीं!
दूसरे दिन विजय की छुट्टी थी.
विजय भी खेत में आया हुआ था.
गीता चाची कुछ काम का बहाना बना कर जानबूझ कर मेरी मां के साथ नहीं आई थीं.
मां और विजय आराम कर रहे थे.
तब मां ने बीड़ी का धुआँ उड़ाते हुए कहा- विजय, तेरा इतना बड़ा कैसे हो गया?
तो विजय भी अनजान बनते हुए बोला- क्या बड़ा हो गया काकी?
मां शर्माती हुई बोली- लंड.
तो वह बोला- मैं कुछ समझा नहीं काकी?
और हंसने लगा.
मां बोलीं- भोला मत बन!
वह बोला- काकी, इससे भी बड़े-बड़े होते हैं.
मां हैरान होकर बोलीं- हाय दैया क्या बोल रहा है? मुझे तो यकीन ही नहीं होता.
विजय ने झट से अपना मोबाइल बाहर निकाला और एक सेक्स वीडियो दिखाया, जिसमें एक काला अफ्रीकन आदमी अपने बड़े लंड से एक औरत को चोद रहा था.
मां उसके बड़े लंड को देख कर आश्चर्यचकित रह गईं.
वे बोलीं- विजय, ये क्या है? इतना बड़ा लिया तो मैं तो मर ही जाऊंगी!
तो विजय बोला- काकी, अभी तक कोई नहीं मरा, देखो ये औरत कैसे मजे ले रही है. आप भी चाहो तो …
वह अपनी बात को काटते हुए चुप हो गया.
मां समझ गईं कि इसकी भी चोदने की इच्छा है.
मां बोली- वह उसने सफेद-सफेद क्या लगाया हुआ है अपने लंड पर?
तो विजय बोला- ये कंडोम है काकी.
मां समझी नहीं कि कंडोम क्या होता है.
वे दोनों इसी तरह की बातें करते हुए एक-दूसरे के साथ काफी खुल चुके थे.
मां ने विजय से पूछा- इस कंडोम से क्या होता है?
विजय ने समझाया- ये पहन लेने से लंड का पानी इसमें ही रहता है और बच्चा या कोई बीमारी नहीं लगती.
मां ये सुनकर आश्चर्यचकित रह गईं कि लोग कहां से कहां पहुंच गए!
फिर वे विजय से कहने लगीं- और क्या-क्या होता है?
विजय ने मोबाइल मां के हाथ में दे दिया.
अब विजय और मां साथ में वीडियो देखने लगे.
वीडियो देखते-देखते मां गर्म हो गईं.
उनकी चूत पानी से चिप-चिप होने लगी.
मां का एक हाथ चूत पर चला गया.
बाजू में विजय धीरे-धीरे अपने लंड को मसलते हुए मां को तिरछी नजर से देख रहा था.
फिर विजय हिम्मत करके लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगा.
मां ये सब देखकर और गर्म हो गईं.
चुदाई की वीडियो में मां ने देखा कि वह औरत उस आदमी का काला लंड मुँह में ले रही है.
मां ने कहा- हिश्ट… कितनी गंदी लड़की है, भला इसे कोई मुँह में लेता है?
तो विजय बोला- काकी, लोग इससे ही मजा करते हैं आप भी करो कभी!
विजय ने मां के हाथ को लंड पर रख दिया.
मां हैरान हो गईं और कहने लगीं कि तुम्हारा लंड इतना गर्म और मोटा क्यों है?
विजय हंसकर बोला- काकी … ये अभी और बड़ा होगा आप प्यार करोगी तो!
मां बोलीं- चल नालायक, ऐसी बात करता है!
लंड अभी तक मां के हाथ में ही था.
धीरे-धीरे मेरी मां उसके लंड को ऊपर-नीचे कर रही थीं. उसका लंड फूलने लगा और लगभग नौ इंच का बड़ा सा मूसल हो गया.
मेरी मां मस्ती से उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ कर हिला रही थीं.
विजय ने भी अपने एक हाथ को आगे बढ़ाया और मेरी मां के दूध को दबाने लगा.
मेरी मां ब्रा और पैंटी नहीं पहनती हैं तो वे भी मस्त होने लगीं.
धीरे-धीरे मां को खुमारी चढ़ने लगी.
विजय भी उनके मादक पसीने की खुशबू से पागल हो रहा था.
फिर वह मेरी मां से बोला- काकी, आप इस औरत की तरह करो, मजा आएगा!
मां को करने का मन था लेकिन ना-नुकुर करने में लगी थीं.
विजय ने कहा- एक बार लेकर तो देखो!
मां बोलीं- बेशर्म, तुझे शर्म नहीं आती … काकी को ये सब बोलने में?
‘काकी, मैं जानता हूँ आप और मां क्या सोचती हैं.’
मां हैरान होकर बोलीं- तुझे कैसे पता?
‘मैंने मां के साथ नदी में बात सुन ली थी. इसीलिए वे आज साथ में नहीं आई हैं ताकि आप मुझे सैट कर लें.’
मां यह सुनकर अब एकदम से खुल चुकी थीं.
उन्होंने अपने मुँह को झुकाकर लंड का टोपा मुँह में ले लिया.
विजय के लंड का टोपा भी पहाड़ी आलू की तरह मोटा था.
मां ने थोड़ा मुँह और खोला तो सिर्फ टोपा मुँह में गया. वे ऊपर-नीचे करने लगीं.
विजय आंखें बंद करके लंड के चूसने जाने का मजा ले रहा था.
दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आपको बिग ऐस्स मॅाम स्टोरी में मजा आ रहा होगा. प्लीज अपने मेल जरूर भेजें.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम पवन है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ.
मैं आपकी सेवा में एक बार फिर से हाजिर हूँ.
यह बिग ऐस्स मॅाम स्टोरी उस समय की है, जब खेतों में फसल कटाई होती है.
आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूँ कि यह कहानी मेरे सामने नहीं घटी थी लेकिन मुझे इस कहानी का एक एक सीन मालूम है.
वह सब एक रहस्य है जिसे आपको जानने की शायद जरूरत नहीं है.
पहले मैं अपनी मां के बारे में बताता हूँ.
मेरी मां का नाम सुरेखा है.
उनकी उम्र 45 साल है.
खेतों में काम करने की वजह से उनका बदन कसा हुआ है.
उनके दूध एकदम कड़क हैं और 36 इंच के हैं.
गांड चालीस की है जो खेतों में काम करने की वजह से बाहर को निकली हुई है.
बिग ऐस्स मॅाम का रंग सांवला है.
उनकी एक सहेली भी है उनका नाम गीता है.
गीता चाची का भी बदन कसा हुआ है, उनके दूध का साइज मां के मुकाबले थोड़ा कम है.
शायद 34 इंच के रहे होंगे.
चाची की भी गांड बाहर को निकली हुई है और उनकी गांड का आकार शायद 36 का रहा होगा.
चाची एकदम गोरी हैं.
वे दोनों रोज सुबह उठकर घर का काम निपटा कर खेतों में काम करने निकल जाती थीं.
उनकी सेक्स लाइफ ना के बराबर थी क्योंकि सेक्स आदि के लिए उनको ज्यादा समय मिल ही नहीं पाता था.
मेरे पिता जी तो सालों से मां के साथ रहते ही नहीं थे तो खेती का सारा काम मेरी मां ही देखती थीं.
गीता चाची का लड़का भी कभी-कभी छुट्टी के दिन खेतों में जाता था.
वह दिखने में ठीक-ठाक था.
उसका नाम विजय था और वह 18 साल का हो गया था.
वह खेतों में आता और अपना फोन लेकर टाइम पास करता रहता था.
एक दिन मां और गीता चाची काम कर रही थीं तो वह झाड़ के नीचे बैठकर फोन देख रहा था.
उसका ध्यान मां की बिग ऐस्स पर गया तो उसे ख्याल आया कि मेरी मां की गांड कितनी सेक्सी है.
वह मन ही मन विचार करने लगा और मोबाइल में एक पॉर्न साइट खोल कर सेक्स के वीडियो देखने लगा.
सेक्स के वीडियो देख कर उसका लंड तनकर बड़ा हो गया.
वह अपने लंड को ऊपर से मसलने लगा.
मां और गीता चाची जब काम करके थक गईं तो वे दोनों आराम करने झाड़ के नीचे आ गईं.
वह मेरी मां को घूर कर देखने लगा.
मां ने अपनी साड़ी अपने वक्ष स्थल से हटा कर कमर से लपेट कर रखी थी, ऊपर सिर्फ ब्लाउज था जो पसीने की वजह से उनके मम्मों से चिपका हुआ था.
मां के मम्मों के निप्पल तने हुए साफ दिख रहे थे.
यही हाल गीता चाची का भी था.
वे भी इसी पोजीशन में थीं लेकिन विजय का ध्यान सिर्फ मेरी मां पर जा रहा था.
मां उसकी इस हरकत से अनजान थीं.
फिर वे दोनों बैठकर आराम कर रही थीं.
उन दोनों को बीड़ी पीने की आदत थी तो वे दोनों बीड़ी पीती हुई बातें कर रही थीं और किसी बात को लेकर हंस रही थीं.
शायद उन दोनों में किसी मर्द को लेकर चर्चा हो रही थी और उनकी हंसी बता रही थी कि वे दोनों सेक्स को लेकर हंस रही थीं.
तभी अचानक मां की नजर विजय के पैंट पर बने तंबू पर चली गई.
मां ने गीता से कहा- तेरा लड़का बड़ा हो गया है, देख उसका सामान फूल रहा है!
वे दोनों हंसने लगीं.
विजय समझ गया कि वे दोनों उसे देख कर ही कुछ बात कर रही हैं तो उसने शर्म से सर झुका लिया और वह नीचे देखने लगा.
उस वक्त मेरी मां की आंखों में एक अलग किस्म की चमक आ गई थी.
ऐसे ही दिन गुजरते गए.
विजय को जब भी मौका मिलता, वह मेरी मां को वासना से देखता.
मेरी मां भी उसकी नजरों को भांपने लगी थीं तो वे भी उसे देख कर मुस्कुरा देती थीं.
अब तो विजय रोज स्कूल की छुट्टी के बाद खेतों में आने लगा था.
जब वह देर से आता, तो मां बोलतीं- गीता, विजय अभी तक नहीं आया?
एक दिन गीता चाची को लगा कि सुरेखा ऐसे रोज क्यों पूछ रही है.
उस दिन चाची ने मजाक में बोला- उसका लंड इतना पसंद आ गया क्या तुझे?
यह सुनकर मेरी मां शर्म के मारे नीचे देखती हुई हंसने लगीं और बोलीं- इसमें बुरा क्या है, विजय भी सीख जाएगा … और मेरा भी इतने सालों का सूखा खत्म हो जाएगा!
फिर गीता चाची बोलीं- देख सुरेखा, अगर उसका छोटा हुआ और तुझे तड़प ज्यादा लग गई तो क्या करेगी? तो एक काम करते हैं, पहले उसका लंड देखते हैं … फिर तय करते हैं.
मेरी मां ने हंस कर हामी भर दी.
अगले दिन किसी बहाने से वे दोनों खेतों के पास बह रही नदी के पास जाने लगीं.
गीता चाची ने विजय से कहा- चलो नदी पर नहाने चलते हैं.
विजय ने हामी भर दी और वह भी उनके साथ जाने लगा.
उसे भी लग रहा था कि आज उसे मेरी मां की जवानी देखने को मिल जाएगी.
नदी के किनारे पहुंच कर मां और गीता चाची ने अपनी-अपनी साड़ी उतार कर साइड में रख दी.
वे दोनों सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं.
ये देखकर विजय की हालत खराब हो गई.
विजय भी उनके साथ नदी में जाने लगा.
तब गीता चाची बोलीं- कपड़े उतार दे न!
विजय ना-नुकुर करने लगा.
मेरी मां बोलीं- बेटा, तुझे इन्हीं हाथों से नहलाया है बहुत बार … अब शर्म मत कर और कपड़े उतार कर नंगा ही आ जा.
विजय ने शर्माते हुए कपड़े उतारे, तो उसका लंड देखकर दोनों हैरान हो गईं.
इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा लंड देख कर दोनों ने मुँह पर हाथ रख लिया.
विजय भी लंड को हाथों से छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए नदी में आकर नहाने लगा.
मां की आंखों में अलग चमक आ गई थी.
उनकी चुत से पानी रिसने लगा था.
मां ने गीता चाची से कहा- इसको अपने हिसाब से मैं तैयार करती हूँ!
तो गीता चाची ने जवाब दिया- तेरे बेटे जैसा है, जैसा तू चाहे.
क्योंकि गीता चाची को मालूम था कि मां उसके साथ कुछ गलत नहीं करेगी.
साथ ही चाची जरा हैरान भी थीं कि उनकी सहेली सुरेखा इतना बड़ा लंड कैसे ले लेगी.
फिर असली खेल शुरू हुआ.
मां वैसे तो सीधी-सादी औरत थीं, उनको ये सब जम नहीं रहा था लेकिन चुदास के चलते उन्होंने शायद मन बना लिया था.
उस दिन नहाने के बाद मेरी मां ने विजय को अपनी चूचियां दिखा कर सैट कर लिया था और उसकी भूखी निगाहों को देख कर समझ लिया था कि लौंडा जरा सी ढील देने में फिसल कर चुत में घुस जाएगा.
यह बात चाची ने भी समझ ली थी.
अभी उनका यह तय नहीं था कि वे अपने बेटे के लंड से चुदाई का मजा लेंगी या नहीं!
दूसरे दिन विजय की छुट्टी थी.
विजय भी खेत में आया हुआ था.
गीता चाची कुछ काम का बहाना बना कर जानबूझ कर मेरी मां के साथ नहीं आई थीं.
मां और विजय आराम कर रहे थे.
तब मां ने बीड़ी का धुआँ उड़ाते हुए कहा- विजय, तेरा इतना बड़ा कैसे हो गया?
तो विजय भी अनजान बनते हुए बोला- क्या बड़ा हो गया काकी?
मां शर्माती हुई बोली- लंड.
तो वह बोला- मैं कुछ समझा नहीं काकी?
और हंसने लगा.
मां बोलीं- भोला मत बन!
वह बोला- काकी, इससे भी बड़े-बड़े होते हैं.
मां हैरान होकर बोलीं- हाय दैया क्या बोल रहा है? मुझे तो यकीन ही नहीं होता.
विजय ने झट से अपना मोबाइल बाहर निकाला और एक सेक्स वीडियो दिखाया, जिसमें एक काला अफ्रीकन आदमी अपने बड़े लंड से एक औरत को चोद रहा था.
मां उसके बड़े लंड को देख कर आश्चर्यचकित रह गईं.
वे बोलीं- विजय, ये क्या है? इतना बड़ा लिया तो मैं तो मर ही जाऊंगी!
तो विजय बोला- काकी, अभी तक कोई नहीं मरा, देखो ये औरत कैसे मजे ले रही है. आप भी चाहो तो …
वह अपनी बात को काटते हुए चुप हो गया.
मां समझ गईं कि इसकी भी चोदने की इच्छा है.
मां बोली- वह उसने सफेद-सफेद क्या लगाया हुआ है अपने लंड पर?
तो विजय बोला- ये कंडोम है काकी.
मां समझी नहीं कि कंडोम क्या होता है.
वे दोनों इसी तरह की बातें करते हुए एक-दूसरे के साथ काफी खुल चुके थे.
मां ने विजय से पूछा- इस कंडोम से क्या होता है?
विजय ने समझाया- ये पहन लेने से लंड का पानी इसमें ही रहता है और बच्चा या कोई बीमारी नहीं लगती.
मां ये सुनकर आश्चर्यचकित रह गईं कि लोग कहां से कहां पहुंच गए!
फिर वे विजय से कहने लगीं- और क्या-क्या होता है?
विजय ने मोबाइल मां के हाथ में दे दिया.
अब विजय और मां साथ में वीडियो देखने लगे.
वीडियो देखते-देखते मां गर्म हो गईं.
उनकी चूत पानी से चिप-चिप होने लगी.
मां का एक हाथ चूत पर चला गया.
बाजू में विजय धीरे-धीरे अपने लंड को मसलते हुए मां को तिरछी नजर से देख रहा था.
फिर विजय हिम्मत करके लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगा.
मां ये सब देखकर और गर्म हो गईं.
चुदाई की वीडियो में मां ने देखा कि वह औरत उस आदमी का काला लंड मुँह में ले रही है.
मां ने कहा- हिश्ट… कितनी गंदी लड़की है, भला इसे कोई मुँह में लेता है?
तो विजय बोला- काकी, लोग इससे ही मजा करते हैं आप भी करो कभी!
विजय ने मां के हाथ को लंड पर रख दिया.
मां हैरान हो गईं और कहने लगीं कि तुम्हारा लंड इतना गर्म और मोटा क्यों है?
विजय हंसकर बोला- काकी … ये अभी और बड़ा होगा आप प्यार करोगी तो!
मां बोलीं- चल नालायक, ऐसी बात करता है!
लंड अभी तक मां के हाथ में ही था.
धीरे-धीरे मेरी मां उसके लंड को ऊपर-नीचे कर रही थीं. उसका लंड फूलने लगा और लगभग नौ इंच का बड़ा सा मूसल हो गया.
मेरी मां मस्ती से उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ कर हिला रही थीं.
विजय ने भी अपने एक हाथ को आगे बढ़ाया और मेरी मां के दूध को दबाने लगा.
मेरी मां ब्रा और पैंटी नहीं पहनती हैं तो वे भी मस्त होने लगीं.
धीरे-धीरे मां को खुमारी चढ़ने लगी.
विजय भी उनके मादक पसीने की खुशबू से पागल हो रहा था.
फिर वह मेरी मां से बोला- काकी, आप इस औरत की तरह करो, मजा आएगा!
मां को करने का मन था लेकिन ना-नुकुर करने में लगी थीं.
विजय ने कहा- एक बार लेकर तो देखो!
मां बोलीं- बेशर्म, तुझे शर्म नहीं आती … काकी को ये सब बोलने में?
‘काकी, मैं जानता हूँ आप और मां क्या सोचती हैं.’
मां हैरान होकर बोलीं- तुझे कैसे पता?
‘मैंने मां के साथ नदी में बात सुन ली थी. इसीलिए वे आज साथ में नहीं आई हैं ताकि आप मुझे सैट कर लें.’
मां यह सुनकर अब एकदम से खुल चुकी थीं.
उन्होंने अपने मुँह को झुकाकर लंड का टोपा मुँह में ले लिया.
विजय के लंड का टोपा भी पहाड़ी आलू की तरह मोटा था.
मां ने थोड़ा मुँह और खोला तो सिर्फ टोपा मुँह में गया. वे ऊपर-नीचे करने लगीं.
विजय आंखें बंद करके लंड के चूसने जाने का मजा ले रहा था.
दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आपको बिग ऐस्स मॅाम स्टोरी में मजा आ रहा होगा. प्लीज अपने मेल जरूर भेजें.