फ्री पोर्न कहानी में मैं अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने होटल जा रहा था. रास्ते में एक आंटी ने लिफ्ट मांग ली. वो आंटी कैसे मेरे साथ होटल के कमरे में चुदी?
दोस्तो, मेरा नाम विकी है और मैं हरियाणा के पलवल का रहने वाला हूँ।
मैं इस साइट पर 7 साल से कहानी पढ़ रहा हूँ।
आज मैं अपना एक अनुभव शेयर करने जा रहा हूँ।
ये मेरी पहली कहानी है. मेरी फ्री पोर्न कहानी में अगर कोई गलती हो जाए तो कृपया मुझे माफ कर देना।
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ।
मेरी उम्र 22, शरीर गोरा, गुड लुकिंग हूँ, 5’6″ हाइट और मेरा लंड 6″ लंबा है।
ये बात गर्मियों की है।
मेरा मेरी गर्लफ्रेंड के साथ रूम पर जाने का प्लान था तो मैंने होटल में रूम बुक कर दिया और मैं सुबह घर से निकल गया।
रास्ते में एक आंटी जिसकी उम्र लगभग 32 साल थी, उसने मुझसे लिफ्ट माँगी तो मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठा लिया।
मैं बहुत खुश था।
तभी अचानक मेरी गर्लफ्रेंड का कॉल आया।
वो अनजान आंटी बाइक पर पीछे बैठी हुई थी।
मैं फ़ोन उठाकर बात करने लगा तो मेरी गर्लफ्रेंड ने कहा, “मुझे आज कुछ ज़रूरी काम है तो आज का प्लान कैंसिल करते हैं, किसी और दिन मिलते हैं!”
मेरा सब मूड ख़राब हो गया क्योंकि मैंने सब तैयारी कर रखी थी।
मैं अपनी गर्लफ्रेंड से लड़ने लगा, “तुमने पहले क्यों नहीं बताया!”
और ग़ुस्से में फ़ोन काट दिया।
कुछ दूर चलने के बाद उस अनजान महिला ने पूछा, “किससे लड़ाई कर रहे थे?”
तो मैंने उन्हें सब बात बतायी।
उन्होंने कहा, “प्यार से बात करो, वो मान जाएगी!”
तो मैंने दुबारा अपनी गर्लफ्रेंड को कॉल किया तो उसने कहा, “आज बिलकुल भी पॉसिबल नहीं है, मैं नहीं आ सकती!”
और मैंने फिर से फ़ोन काट दिया।
फिर मैं चलने लगा और उस आंटी ने कहा, “कभी और चले जाना!”
मैंने उससे कहा, “मैंने सब तैयारी कर रखी थी, रूम भी बुक करा दिया और अब उसने मना कर दिया।”
फिर हम आगे चलने लगे तो मैंने उनसे पूछा, “तुम कहाँ जा रही हो?”
तो उन्होंने बताया- मैं जॉब के लिए किसी से मिलने जा रही थी। मैं जहाँ जा रही थी, उन्होंने पहले तो सुबह 10 बजे बुलाया था लेकिन अब उनका फ़ोन आया था कि 3 बजे आना तो मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ, तब तक वहाँ आराम करूँगी।
मैंने भी उनसे कहा, “मैं भी अब जो रूम बुक किया है वहाँ जाके आराम ही करूँगा। अगर तुम चाहो तो वहाँ ही आराम कर लेना।”
तो वो कुछ नहीं बोली।
मैंने उनसे दुबारा पूछा तो उन्होंने कहा, “अगर तुम 3 बजे तक रुको तो मैं चल सकती हूँ।”
तो मैंने भी उनसे कहा, “मैं तो शाम तक ही रुकूँगा।”
तो वो मान गई।
अब मैंने बाइक होटल की तरफ़ लगा दी और मन ही मन सोचने लगा कि आज कुछ काम बन ही जाए।
हम होटल पहुँच गए।
उन्होंने मुझसे कहा, “मुझे डर लग रहा है।”
मैंने कहा, “चिंता मत करो, मैं यहाँ आता-जाता रहता हूँ तो मैं सबको जानता हूँ।”
थोड़ी देर में हम रूम में पहुँच गए।
रूम एसी वाला था तो हम आराम से रूम में बैठ गए और बातें करने लगे।
मैं आपको उसके बारे में बताना भूल गया। उसका नाम कविता था।
उसका रंग हल्का गेहुँआ, चेहरा गोल और नाक पतला सा था, आँखें बड़ी-बड़ी हैं लेकिन बहुत ही आकर्षक व नशीली थीं।
उसकी चूची ज़्यादा बड़ी नहीं थी लेकिन एक हाथ में तो उसकी एक चूची भी नहीं आ सकती और उसकी कमर बिल्कुल पतली और नीचे से तो वो 36 इंच की ही होगी।
रूम एसी के कारण बिल्कुल ठंडा हो गया.
वहाँ एक कंबल पड़ा हुआ था तो हम दोनों उसमें बैठ गए और बातें करने लगे।
हम दोनों बिल्कुल चिपककर बैठे हुए थे.
मैं बिल्कुल चुप बैठ गया।
तो उन्होंने पूछा, “ऐसे उदास क्यों बैठे हो?”
मैंने कहा, “मेरा बहुत मन था गर्लफ्रेंड से मिलने का, उससे किस और हग करने का। वो नहीं आई इसलिए थोड़ा उदास हूँ।”
उसने कहा, “चलो कोई बात नहीं, मुझे अपनी गर्लफ्रेंड मान लो आज के लिए।”
तो मैंने उससे कहा, “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?”
उसने मेरी तरफ़ देखा और ग़ुस्से से मना कर दिया और हम ऐसे ही चुप बैठे रहे कुछ देर तक।
फिर वो बोली, “बस एक किस, उसके बाद कुछ नहीं!”
मैंने कहा, “हाँ।”
मैं उसकी तरफ़ किस करने को बढ़ा।
कुछ ही पलों में हमारे होठ मिल गए।
वो किस हमारे बीच 10 मिनट तक चलती रही।
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा।
वो मदहोश होने लगी और मेरे होठों को काटने लगी।
मैं उसके शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा।
फिर मैंने उससे कमीज उतारने को कहा तो उसने कहा, “किस की बात हुई थी बस!”
तो मैं फिर से उसे किस करने लगा।
साथ ही साथ बूब्स भी दबा रहा था।
फिर उसकी गर्दन पर किस करने लगा तो उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मुझसे बिल्कुल चिपक कर किस करने लगी।
मैंने उससे दुबारा कमीज उतरने को कहा तो वो मान गई।
वो सफ़ेद ब्रा में थी।
मैंने किस करते-करते उसकी ब्रा खोल दी और उसके बूब्स चूसने लगा, उसके निप्पल को काटने लगा।
उसके मुँह से अब सिसकारियाँ निकलने लगी थीं, “आआ आआह आ आआ अह्ह ह्ह्ह…”
अब मेरा एक हाथ उनकी सलवार में जा चुका था और उनकी पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत में उंगली करी तो अचानक से हिल गई।
वह सेक्स में इतनी मदहोश थी कि उसको पता ही नहीं चला कि मेरा हाथ कब उसकी चूत तक पहुँच गया।
मैंने उनकी सलवार खोल दी और पेंटी भी उतार दी।
उनकी चूत एकदम क्लीन शेव थी।
अब मैं उसके पैरों पर किस करने लगा।
किस करते-करते मैं उसकी चूत को देखने लगा।
वो शर्मा रही थी और बोल रही थी, “क्या देख रहे हो!”
यार, मैंने बहुत गर्ल्स एंड आंटीज़ के साथ सेक्स किया है बट यह सब से मस्त थी।
फिर मैं बेड पर आ गया एंड उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए।
और बिना वक़्त खराब किए मैं उनके पेट पर किस करते हुए उनकी चूत तक आ गया।
मैंने उनकी चूत पर जीभ घुमाई।
फिर मैं आंटी की चूत को दिल खोलकर चूसने लगा।
पहले मैंने एक से दो बार चूत को नीचे से ऊपर तक चाटा और फिर धीरे से मैं अपनी स्पीड को बढ़ाता गया।
फिर मैंने चखकर महसूस किया कि उनकी चूत का स्वाद बहुत ही अच्छा और मस्की था और उनके जिस्म के पसीने का स्वाद भी उनकी चूत के स्वाद के साथ मिलकर आ रहा था।
मैं उनकी चूत को बहुत अच्छी तरह से चूसता गया और आंटी अपनी कमर को पागलों की तरह ऊपर-नीचे करके हिला रही थी।
फिर मैंने तुरंत उनके बूब्स को पकड़ लिया और धीरे-धीरे से दबाने लगा था और अब मैं उनकी चूत को लगातार ज़ोर से चूस भी रहा था।
अब मेरे कुछ देर चूसने, चाटने के बाद आंटी ने मेरे सर को बहुत ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया और वो अचानक से झड़ गई.
अब उनकी चूत का रस मेरे पूरे चेहरे पर था।
मैं जितना हो सके उसे पी गया और बाकी मुझे मजबूरन मुँह से बाहर निकालना पड़ा क्योंकि उनकी चूत से बहुत ज़्यादा रस बाहर निकल रहा था।
फिर मुझसे और रहा नहीं गया और मैं आंटी के पैरों के बीच में गया और मैंने अपना लंड हाथ में ले लिया।
अब मैं उसे आंटी की चूत के दाने पर रगड़ने लगा था।
फिर आंटी मुझसे कहने लगी, “प्लीज अब तो डाल दो इसे अंदर. और रहा नहीं जा रहा!”
इसलिए मैंने जोश में आकर एक ही ज़ोरदार झटके में उनकी चूत के अंदर अपना पूरा का पूरा लंड डाल दिया.
क्योंकि अब हालात बहुत ही गरमा गए थे, इसलिए हम दोनों बिल्कुल पागल हो चुके थे और इसलिए मैं तुरंत ही आंटी को ज़ोर-ज़ोर से लगातार धक्के देकर चोदने लगा।
मैं आंटी की तरफ़ झुका और ज़ोर से चोदते-चोदते ही मैं आंटी के होठों को चूमने लगा और हम दोनों हवस के इस एहसास में पूरी तरह से डूब चुके थे।
मैं आंटी को बिल्कुल पागलों की तरह चोद रहा था और वो भी अपनी कमर को हिला-हिलाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी।
दोस्तो, वो एहसास बहुत ही कमाल का था, जो किसी भी शब्दों में बताया ही नहीं जा सकता।
फिर मैं कुछ देर के धक्कों के बाद अब झड़ने वाला था और मैंने आंटी को यह बताया और उनसे पूछा, “मैं अपना वीर्य कहाँ निकालूँ?”
तो वो मुझसे तुरंत बोली, “तुम मेरे अंदर ही अपना गरम-गरम लावा निकाल दो!”
उनके मुँह से यह बात सुनकर मैंने अब उन्हें और भी ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि वो भी अब झड़ने वाली है।
फिर मैंने आंटी के बूब्स को चूसना शुरू किया और फिर मैं उनके निप्पल को हल्के से काटने लगा तो आंटी झड़ने लगी और वो बिल्कुल पागलों की तरह छटपटाने लगी।
उसके बाद मैं और रोक नहीं पाया और मैं भी अब झड़ गया।
फिर हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे को देखने लगे और हमारे होठ एक बार फिर से एक-दूसरे से टकराए।
अब हम दोनों एक-दूसरे के होठों को चख रहे थे।
फिर वो मुझसे बोली, “मेरे पति ने मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं करवाया, उन्होंने कभी भी मुझे ऐसा मज़ा नहीं दिया और यह मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सेक्स अनुभव है। तुम्हारे साथ मुझे सेक्स करने में बहुत मज़ा आया और तुम्हें बहुत अच्छा चुदाई का अनुभव है!”
हम दोनों वैसे ही थोड़ी देर सो गए।
उसके बाद हम उठे और हमने एक बार और चुदाई की, फिर अपने कपड़े पहन कर खाना ऑर्डर किया।
खाना खाने के बाद हमने अपने नंबर एक्सचेंज किए।
उसके बाद हमने अगले वीक मिलने का प्लान बनाया.
कैसे मैंने उनकी गाँड मारी वो अगली कहानी में बताऊँगा।
अब जब भी हमारे पास समय रहता है हम मिलते रहते हैं।
आपको फ्री पोर्न कहानी कैसी लगी मुझे मेल पर ज़रूर बताइए ताकि मैं आपके लिए आगे भी अच्छी-अच्छी कहानी लिखता रहूँ।
दोस्तो, मेरा नाम विकी है और मैं हरियाणा के पलवल का रहने वाला हूँ।
मैं इस साइट पर 7 साल से कहानी पढ़ रहा हूँ।
आज मैं अपना एक अनुभव शेयर करने जा रहा हूँ।
ये मेरी पहली कहानी है. मेरी फ्री पोर्न कहानी में अगर कोई गलती हो जाए तो कृपया मुझे माफ कर देना।
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ।
मेरी उम्र 22, शरीर गोरा, गुड लुकिंग हूँ, 5’6″ हाइट और मेरा लंड 6″ लंबा है।
ये बात गर्मियों की है।
मेरा मेरी गर्लफ्रेंड के साथ रूम पर जाने का प्लान था तो मैंने होटल में रूम बुक कर दिया और मैं सुबह घर से निकल गया।
रास्ते में एक आंटी जिसकी उम्र लगभग 32 साल थी, उसने मुझसे लिफ्ट माँगी तो मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठा लिया।
मैं बहुत खुश था।
तभी अचानक मेरी गर्लफ्रेंड का कॉल आया।
वो अनजान आंटी बाइक पर पीछे बैठी हुई थी।
मैं फ़ोन उठाकर बात करने लगा तो मेरी गर्लफ्रेंड ने कहा, “मुझे आज कुछ ज़रूरी काम है तो आज का प्लान कैंसिल करते हैं, किसी और दिन मिलते हैं!”
मेरा सब मूड ख़राब हो गया क्योंकि मैंने सब तैयारी कर रखी थी।
मैं अपनी गर्लफ्रेंड से लड़ने लगा, “तुमने पहले क्यों नहीं बताया!”
और ग़ुस्से में फ़ोन काट दिया।
कुछ दूर चलने के बाद उस अनजान महिला ने पूछा, “किससे लड़ाई कर रहे थे?”
तो मैंने उन्हें सब बात बतायी।
उन्होंने कहा, “प्यार से बात करो, वो मान जाएगी!”
तो मैंने दुबारा अपनी गर्लफ्रेंड को कॉल किया तो उसने कहा, “आज बिलकुल भी पॉसिबल नहीं है, मैं नहीं आ सकती!”
और मैंने फिर से फ़ोन काट दिया।
फिर मैं चलने लगा और उस आंटी ने कहा, “कभी और चले जाना!”
मैंने उससे कहा, “मैंने सब तैयारी कर रखी थी, रूम भी बुक करा दिया और अब उसने मना कर दिया।”
फिर हम आगे चलने लगे तो मैंने उनसे पूछा, “तुम कहाँ जा रही हो?”
तो उन्होंने बताया- मैं जॉब के लिए किसी से मिलने जा रही थी। मैं जहाँ जा रही थी, उन्होंने पहले तो सुबह 10 बजे बुलाया था लेकिन अब उनका फ़ोन आया था कि 3 बजे आना तो मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ, तब तक वहाँ आराम करूँगी।
मैंने भी उनसे कहा, “मैं भी अब जो रूम बुक किया है वहाँ जाके आराम ही करूँगा। अगर तुम चाहो तो वहाँ ही आराम कर लेना।”
तो वो कुछ नहीं बोली।
मैंने उनसे दुबारा पूछा तो उन्होंने कहा, “अगर तुम 3 बजे तक रुको तो मैं चल सकती हूँ।”
तो मैंने भी उनसे कहा, “मैं तो शाम तक ही रुकूँगा।”
तो वो मान गई।
अब मैंने बाइक होटल की तरफ़ लगा दी और मन ही मन सोचने लगा कि आज कुछ काम बन ही जाए।
हम होटल पहुँच गए।
उन्होंने मुझसे कहा, “मुझे डर लग रहा है।”
मैंने कहा, “चिंता मत करो, मैं यहाँ आता-जाता रहता हूँ तो मैं सबको जानता हूँ।”
थोड़ी देर में हम रूम में पहुँच गए।
रूम एसी वाला था तो हम आराम से रूम में बैठ गए और बातें करने लगे।
मैं आपको उसके बारे में बताना भूल गया। उसका नाम कविता था।
उसका रंग हल्का गेहुँआ, चेहरा गोल और नाक पतला सा था, आँखें बड़ी-बड़ी हैं लेकिन बहुत ही आकर्षक व नशीली थीं।
उसकी चूची ज़्यादा बड़ी नहीं थी लेकिन एक हाथ में तो उसकी एक चूची भी नहीं आ सकती और उसकी कमर बिल्कुल पतली और नीचे से तो वो 36 इंच की ही होगी।
रूम एसी के कारण बिल्कुल ठंडा हो गया.
वहाँ एक कंबल पड़ा हुआ था तो हम दोनों उसमें बैठ गए और बातें करने लगे।
हम दोनों बिल्कुल चिपककर बैठे हुए थे.
मैं बिल्कुल चुप बैठ गया।
तो उन्होंने पूछा, “ऐसे उदास क्यों बैठे हो?”
मैंने कहा, “मेरा बहुत मन था गर्लफ्रेंड से मिलने का, उससे किस और हग करने का। वो नहीं आई इसलिए थोड़ा उदास हूँ।”
उसने कहा, “चलो कोई बात नहीं, मुझे अपनी गर्लफ्रेंड मान लो आज के लिए।”
तो मैंने उससे कहा, “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?”
उसने मेरी तरफ़ देखा और ग़ुस्से से मना कर दिया और हम ऐसे ही चुप बैठे रहे कुछ देर तक।
फिर वो बोली, “बस एक किस, उसके बाद कुछ नहीं!”
मैंने कहा, “हाँ।”
मैं उसकी तरफ़ किस करने को बढ़ा।
कुछ ही पलों में हमारे होठ मिल गए।
वो किस हमारे बीच 10 मिनट तक चलती रही।
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा।
वो मदहोश होने लगी और मेरे होठों को काटने लगी।
मैं उसके शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा।
फिर मैंने उससे कमीज उतारने को कहा तो उसने कहा, “किस की बात हुई थी बस!”
तो मैं फिर से उसे किस करने लगा।
साथ ही साथ बूब्स भी दबा रहा था।
फिर उसकी गर्दन पर किस करने लगा तो उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मुझसे बिल्कुल चिपक कर किस करने लगी।
मैंने उससे दुबारा कमीज उतरने को कहा तो वो मान गई।
वो सफ़ेद ब्रा में थी।
मैंने किस करते-करते उसकी ब्रा खोल दी और उसके बूब्स चूसने लगा, उसके निप्पल को काटने लगा।
उसके मुँह से अब सिसकारियाँ निकलने लगी थीं, “आआ आआह आ आआ अह्ह ह्ह्ह…”
अब मेरा एक हाथ उनकी सलवार में जा चुका था और उनकी पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत में उंगली करी तो अचानक से हिल गई।
वह सेक्स में इतनी मदहोश थी कि उसको पता ही नहीं चला कि मेरा हाथ कब उसकी चूत तक पहुँच गया।
मैंने उनकी सलवार खोल दी और पेंटी भी उतार दी।
उनकी चूत एकदम क्लीन शेव थी।
अब मैं उसके पैरों पर किस करने लगा।
किस करते-करते मैं उसकी चूत को देखने लगा।
वो शर्मा रही थी और बोल रही थी, “क्या देख रहे हो!”
यार, मैंने बहुत गर्ल्स एंड आंटीज़ के साथ सेक्स किया है बट यह सब से मस्त थी।
फिर मैं बेड पर आ गया एंड उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए।
और बिना वक़्त खराब किए मैं उनके पेट पर किस करते हुए उनकी चूत तक आ गया।
मैंने उनकी चूत पर जीभ घुमाई।
फिर मैं आंटी की चूत को दिल खोलकर चूसने लगा।
पहले मैंने एक से दो बार चूत को नीचे से ऊपर तक चाटा और फिर धीरे से मैं अपनी स्पीड को बढ़ाता गया।
फिर मैंने चखकर महसूस किया कि उनकी चूत का स्वाद बहुत ही अच्छा और मस्की था और उनके जिस्म के पसीने का स्वाद भी उनकी चूत के स्वाद के साथ मिलकर आ रहा था।
मैं उनकी चूत को बहुत अच्छी तरह से चूसता गया और आंटी अपनी कमर को पागलों की तरह ऊपर-नीचे करके हिला रही थी।
फिर मैंने तुरंत उनके बूब्स को पकड़ लिया और धीरे-धीरे से दबाने लगा था और अब मैं उनकी चूत को लगातार ज़ोर से चूस भी रहा था।
अब मेरे कुछ देर चूसने, चाटने के बाद आंटी ने मेरे सर को बहुत ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया और वो अचानक से झड़ गई.
अब उनकी चूत का रस मेरे पूरे चेहरे पर था।
मैं जितना हो सके उसे पी गया और बाकी मुझे मजबूरन मुँह से बाहर निकालना पड़ा क्योंकि उनकी चूत से बहुत ज़्यादा रस बाहर निकल रहा था।
फिर मुझसे और रहा नहीं गया और मैं आंटी के पैरों के बीच में गया और मैंने अपना लंड हाथ में ले लिया।
अब मैं उसे आंटी की चूत के दाने पर रगड़ने लगा था।
फिर आंटी मुझसे कहने लगी, “प्लीज अब तो डाल दो इसे अंदर. और रहा नहीं जा रहा!”
इसलिए मैंने जोश में आकर एक ही ज़ोरदार झटके में उनकी चूत के अंदर अपना पूरा का पूरा लंड डाल दिया.
क्योंकि अब हालात बहुत ही गरमा गए थे, इसलिए हम दोनों बिल्कुल पागल हो चुके थे और इसलिए मैं तुरंत ही आंटी को ज़ोर-ज़ोर से लगातार धक्के देकर चोदने लगा।
मैं आंटी की तरफ़ झुका और ज़ोर से चोदते-चोदते ही मैं आंटी के होठों को चूमने लगा और हम दोनों हवस के इस एहसास में पूरी तरह से डूब चुके थे।
मैं आंटी को बिल्कुल पागलों की तरह चोद रहा था और वो भी अपनी कमर को हिला-हिलाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी।
दोस्तो, वो एहसास बहुत ही कमाल का था, जो किसी भी शब्दों में बताया ही नहीं जा सकता।
फिर मैं कुछ देर के धक्कों के बाद अब झड़ने वाला था और मैंने आंटी को यह बताया और उनसे पूछा, “मैं अपना वीर्य कहाँ निकालूँ?”
तो वो मुझसे तुरंत बोली, “तुम मेरे अंदर ही अपना गरम-गरम लावा निकाल दो!”
उनके मुँह से यह बात सुनकर मैंने अब उन्हें और भी ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि वो भी अब झड़ने वाली है।
फिर मैंने आंटी के बूब्स को चूसना शुरू किया और फिर मैं उनके निप्पल को हल्के से काटने लगा तो आंटी झड़ने लगी और वो बिल्कुल पागलों की तरह छटपटाने लगी।
उसके बाद मैं और रोक नहीं पाया और मैं भी अब झड़ गया।
फिर हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे को देखने लगे और हमारे होठ एक बार फिर से एक-दूसरे से टकराए।
अब हम दोनों एक-दूसरे के होठों को चख रहे थे।
फिर वो मुझसे बोली, “मेरे पति ने मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं करवाया, उन्होंने कभी भी मुझे ऐसा मज़ा नहीं दिया और यह मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सेक्स अनुभव है। तुम्हारे साथ मुझे सेक्स करने में बहुत मज़ा आया और तुम्हें बहुत अच्छा चुदाई का अनुभव है!”
हम दोनों वैसे ही थोड़ी देर सो गए।
उसके बाद हम उठे और हमने एक बार और चुदाई की, फिर अपने कपड़े पहन कर खाना ऑर्डर किया।
खाना खाने के बाद हमने अपने नंबर एक्सचेंज किए।
उसके बाद हमने अगले वीक मिलने का प्लान बनाया.
कैसे मैंने उनकी गाँड मारी वो अगली कहानी में बताऊँगा।
अब जब भी हमारे पास समय रहता है हम मिलते रहते हैं।
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