लिकिंग अ वर्जिन पुसी स्टोरी में मैंने अपने दोस्त की फंतासी पूरी करने के लिए अपनी कुंवारी सहेली को तैयार कर लिया था. मैं उसे होटल के कमरे में ले गयी.
यह कहानी सुनें.
फ्रेंड्स, मैं आरोही आपको अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग का मजा देने के लिए हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
मेरी प्यासी चूत को मिला NRI डॉक्टर का लंड
में आप पढ़ चुके थे कि असीम ने होटल के कमरे में किस तरह से मुझे चोद कर रौंद दिया था.
जब मैं असीम से अलग हुई तो उन्होंने मुझे अगले दिन कुंवारी चुत वाली पीहू को साथ लाने की याद दिलाई.
मैंने भी हंस कर हामी भर दी.
अब आगे लिकिंग अ वर्जिन पुसी स्टोरी:
असीम के साथ बिताई वह पहली मदहोश रात मेरे जिस्म और दिमाग में इस कदर बस चुकी थी कि पूरी रात मेरी आंखों से नींद गायब थी.
मेरी चूत में असीम के गाढ़े वीर्य की वह गर्माहट अभी भी महसूस हो रही थी.
सुबह होते ही मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही मिशन था … असीम से किया हुआ वह वादा पूरा करना और उनकी ‘थ्री-गर्ल्स’ वाली फैंटेसी की पहली सीढ़ी चढ़ना.
मुझे अपनी सहेली पीहू को हर हाल में उस होटल के कमरे तक लाना था.
पीहू मेरी सबसे पक्की सहेली थी लेकिन वह स्वभाव से थोड़ी शर्मीली और संकोची थी.
उसने आज तक किसी मर्द को अपना बदन नहीं सौंपा था, यहां तक कि वह अभी भी पूरी तरह वर्जिन थी.
दोपहर में जब मैं उससे मिली, तो मैंने उसे अपनी और असीम की कल की चुदाई का सारा किस्सा बेहद मिर्च-मसाला लगाकर सुनाया.
मैंने उसे बताया कि असीम कोई आम मर्द नहीं बल्कि सिंगापुर के एक जाने-माने सेक्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, जिनके हाथों में ऐसा जादू है कि औरत दर्द भूलकर स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है.
शुरुआत में पीहू बहुत झिझकी.
उसने अपनी उंगली के नाखून चबाते हुए कहा- आरोही, मुझे डर लगता है यार! मैंने आज तक किसी मर्द के सामने अपने कपड़े नहीं उतारे और वह तो इतने बड़े डॉक्टर हैं. कहीं मुझे दर्द हुआ तो?
मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा- अरे पगली, कल उन्होंने मेरी चूत को अपनी जीभ से ऐसा चाटा कि मैं पांच मिनट में ही पानी-पानी हो गई! वह पहले तेरी बुर को अपनी जीभ से सहलाएंगे, तेरा सारा डर निकाल देंगे. तू बस मेरे कहने पर चल, आज हम दोनों मिलकर उस पचास साल के तजुर्बेकार मर्द का सारा पानी निकाल देंगी!
मेरे बार-बार उकसाने और लेस्बियन एक्ट का लालच देने पर आखिरकार पीहू का सतीत्व भी डगमगा गया.
उसकी आंखों में भी वासना की एक हल्की सी चमक तैरने लगी.
वह असीम से अपना तन का मिलन करवाने के लिए राजी हो गई.
शाम के ठीक सात बजे हम दोनों जयपुर के उसी आलीशान होटल की लिफ्ट में थे.
आज की रात को यादगार बनाने के लिए हम दोनों ने विशेष तैयारी की थी.
मैंने ब्लैक कलर की बेहद टाइट वन-पीस ड्रेस पहनी थी, जिसके नीचे सिर्फ एक थोंग (पतली पैंटी) थी.
पीहू ने पिंक कलर का एक स्लीवलेस टॉप और व्हाइट शॉर्ट्स पहना हुआ था.
पीहू का रंग एकदम गोरा था और उसके बूब्स का साइज 32बी था, जो एकदम कड़क और गोल थे.
यह शॉर्ट ड्रेस उसके ऊपर बेहद दिलकश लग रही थी.
हम दोनों का रूप देखकर लिफ्ट में खड़ा हर मर्द हमें ही घूर रहा था.
जब मैंने असीम के सुइट नंबर 405 के दरवाजे पर बेल बजाई.
तो कुछ ही पल में दरवाजा खुला.
सामने असीम खड़े थे जो वाइन-कलर का सिल्क नाइट गाउन पहने हुए थे.
जैसे ही उनकी नजरें मुझ पर और मेरे साथ खड़ी सहमी सी, गोरी-चिट्टी पीहू पर पड़ीं, उनकी आंखों की भूख चार गुना बढ़ गई.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हैलो डॉक्टर … देखिये, मैं अपना वादा पूरा करने के लिए अपनी जानू पीहू को आपके पास ले आई हूँ.
असीम ने आगे बढ़कर हम दोनों को अन्दर लिया और दरवाजा लॉक कर दिया.
कमरे में हल्की नीली लाइट जल रही थी और बहुत ही धीमा रोमांटिक म्यूज़िक बज रहा था.
असीम ने पीहू की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बेहद संजीदगी से कहा- हैलो पीहू … डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. तुम आरोही की सहेली हो, तो आज से मेरी भी सबसे खास दोस्त हो.
पीहू ने थरथराते हाथों से उनसे हाथ मिलाया और बोली- हैलो डॉक्टर सर!
असीम ने हम दोनों को सोफे पर बिठाया और हमारे लिए रेड वाइन के दो ग्लास तैयार किए.
वाइन के दो-चार घूंट अन्दर जाते ही पीहू के चेहरे की लाली बढ़ गई और उसका संकोच थोड़ा कम होने लगा.
असीम मेरे करीब आए और उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.
वे बहुत ही शिद्दत से मेरी जीभ को चूस रहे थे.
यह दृश्य देखकर पीहू की सांसें तेज होने लगीं.
असीम ने चूमते-चूमते अपना एक हाथ बढ़ाया और पीहू की जांघ पर रख दिया.
उनके गर्म हाथ का स्पर्श पाते ही पीहू सिहर उठी, लेकिन उसने अपना पैर पीछे नहीं खींचा.
असीम ने अपना मुँह मेरे होंठों से हटाया और पीहू की तरफ बढ़े.
‘पीहू … तुम बेहद खूबसूरत हो. क्या मैं इस सुंदर चेहरे को चूम सकता हूँ?’ असीम ने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा.
पीहू ने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं, जो उसकी रज़ामंदी थी.
असीम झुके और उन्होंने पीहू के गुलाबी, अछूते होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
पीहू के लिए यह पहला मर्दाना स्पर्श था.
असीम बहुत ही धीरे-धीरे उसके होंठों का रस चूसने लगे.
धीरे-धीरे पीहू ने भी अपने हाथ असीम के कंधों पर रख दिए और उनके चुंबन का जवाब देने लगी.
यह देखकर मैंने पीहू के टॉप के नीचे अपना हाथ घुसा दिया और उसके कड़क बूब्स को सहलाने लगी.
अब माहौल पूरी तरह कामुक हो चुका था.
असीम पीहू को चूम रहे थे और मैं पीहू के बूब्स को मसल रही थी.
पीहू के मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकलने लगी थीं- उफ्फ़ … आह … आरोही … डॉक्टर!
असीम ने हम दोनों को बेड पर चलने का इशारा किया.
हम तीनों किंग-साइज बेड के बीचों-बीच आ गए. असीम ने अपने नाइट गाउन को उतार कर फेंक दिया.
वे अन्दर पूरी तरह नंगे थे और उनका 7 इंच का सांवला लंड पूरी ताकत से खड़ा होकर आसमान की तरफ ताक रहा था.
पीहू ने जब पहली बार इतना बड़ा और कड़क लंड अपनी आंखों के सामने देखा, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं.
वह डर के मारे थोड़ा पीछे हटने लगी.
यह देखकर मैंने पीहू को संभाला.
मैंने अपने वन-पीस ड्रेस की जिप खोली और उसे उतार कर फेंक दिया.
अब मैं सिर्फ एक काली पतली पैंटी में थी.
फिर मैंने पीहू के टॉप को ऊपर उठाया और उसे ऊपर से पूरी तरह से नंगी कर दिया.
अब केवल नीचे शॉर्ट्स और पैंटी बची थी.
पीहू ने भी अन्दर कोई ब्रा नहीं पहनी थी.
उसके दोनों गोरे, सुडौल स्तन, जिन पर गुलाबी रंग के छोटे-छोटे निप्पल थे, कमरे की लाइट में चमक रहे थे.
‘ओह गॉड पीहू … तुम्हारे बूब्स तो कमाल के हैं!’ असीम ने तारीफ करते हुए कहा.
मैंने असीम की फंतासी को याद करते हुए पीहू को बेड पर सीधा लिटा दिया.
मैंने उसकी शॉर्ट्स और पैंटी को एक साथ नीचे खींचकर उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया.
पीहू की चूत को देखकर असीम के चेहरे पर एक गजब की संतुष्टि आ गई.
पीहू की चूत पर एक भी बाल नहीं था; वह एकदम साफ, गुलाबी और कली की तरह बंद थी क्योंकि वह अभी तक कुंवारी थी.
मैंने पीहू के ऊपर आकर उसके होंठों को चूमना शुरू किया और अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी बंद चूत के दाने को उंगली से सहलाने लगी.
पीहू मेरी बांहों में मचलने लगी.
वह बोली- आह आरोही … वहां बहुत अजीब सा लग रहा है … कुछ बह रहा है वहां से!
मैंने हंसते हुए कहा- पगली, तेरी बुर पानी छोड़ रही है. अब देख डॉक्टर साहब इसका इलाज कैसे करते हैं.
असीम बिना वक्त गंवाए पीहू के पैरों के बीच बैठ गए.
उन्होंने पीहू की दोनों गोरी जांघों को पूरी तरह फैलाया और अपना मुँह सीधे उसकी कुंवारी चूत पर जमा दिया.
‘आहहह!’ पीहू बिस्तर से उछल पड़ी.
उसने असीम के बालों को अपने हाथों में कसकर जकड़ लिया.
असीम ने अपनी जीभ को एक धारदार औजार की तरह पीहू की चूत की पतली दरार के अन्दर डाला और ऊपर-नीचे चाटना शुरू कर दिया.
वे अपनी जीभ से पीहू के क्लीटोरिस (दाने) को चूस रहे थे.
पीहू ने अपनी जिंदगी में ऐसा सुख कभी नहीं सोचा था.
लिकिंग अ वर्जिन पुसी से उसकी बंद चूत से काम-रस का फव्वारा फूट पड़ा.
असीम उस सारे कुंवारी चूत के अमृत को बड़े चाव से चाट-चाट कर पी रहे थे.
‘उफ्फ़ … डॉक्टर साहब … मम्मा रे … मर गई! ये क्या कर रहे हो … आह … बहुत मज़ा आ रहा है … आरोही मुझे बचाओ … मैं पागल हो जाऊंगी!’ पीहू बेड पर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाती हुई चीख रही थी.
मैंने पीहू के एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और उसके निप्पल को चूसने लगी.
अब पीहू ऊपर और नीचे दोनों तरफ से पूरी तरह काम-रस में डूब चुकी थी.
असीम लगातार 20 मिनट तक पीहू की बुर को लॉलीपॉप की तरह चूसते रहे.
पीहू का पूरा बदन कांपने लगा, उसकी जांघें अकड़ गईं और उसने अपनी चूत का सारा पानी असीम के मुँह में छोड़ दिया.
वह हांफती हुई बेड पर ढह गई.
पीहू के झड़ते ही असीम खड़े हुए.
उनका लंड अब काम-रस से पूरी तरह भीग चुका था और और भी ज्यादा कड़क हो गया था.
मैंने असीम से कहा- असीम जी, पीहू अभी वर्जिन है, तो आप शुरुआत मेरे साथ कीजिये ताकि पीहू देख कर पूरी तरह तैयार हो जाए.
असीम ने मुस्कुराते हुए मुझे बेड के किनारे पर घोड़ी (डॉगी स्टाइल पोजीशन) बना दिया.
मेरी मटकती हुई गांड उनके लंड के सामने थी.
असीम ने पीछे से अपने लंड को मेरी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में पूरा 7 इंच का मूसल मेरी बुर के अन्दर धकेल दिया.
मैंने अपने मुँह से ‘आहहह … उफ्फ़ असीम!’ की एक तीखी कराह निकाली.
चूंकि मेरी चूत कल की चुदाई से थोड़ी खुली हुई थी इसलिए उनका मोटा लंड बहुत ही स्मूथली अन्दर-बाहर होने लगा.
‘फच-फच, फच-फच’ की आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा.
पीहू बेड पर लेटी हुई अपनी फटी आंखों से यह सब देख रही थी.
एक मर्द का लंड एक औरत की चूत में कैसे अन्दर-बाहर होता है, यह नजारा उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर रहा था.
उसकी चूत दोबारा पानी छोड़ने लगी थी.
असीम ने मुझे चोदते हुए पीहू से कहा- पीहू, आगे आओ और आरोही के मुँह में अपना बूब्स दे दो.
पीहू घुटनों के बल चलती हुई मेरे मुँह के पास आई.
मैंने तुरंत उसके एक गोरे चूचे को अपने मुँह में भर लिया और उसके निप्पल को अपनी जीभ से दबाने लगी.
उस वक्त असीम पीछे से मेरी चूत फाड़ रहे थे और मैं आगे से अपनी सहेली के स्तनों का रस ले रही थी.
यह दृश्य किसी नेस्टी एडल्ट फिल्म जैसा था.
असीम बहुत ही पावरफुल धक्के मार रहे थे.
उनका लंड मेरी चूत की गहराई से टकरा रहा था और मुझे चरम सुख की तरफ ले जा रहा था.
लगभग 15 मिनट तक मुझे बुरी तरह पेलने के बाद असीम ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला जो पूरी तरह मेरे पानी से सना हुआ था.
अब बारी पीहू की थी.
असीम ने पीहू को बेड पर पीठ के बल लिटाया और उसकी टांगों को मोड़कर छाती से सटा दिया.
पीहू की गुलाबी चूत अब पूरी तरह असीम के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थी.
असीम ने अपने लंड के सुपाड़े पर मेरी चूत का पानी लगाया ताकि वह चिकना हो जाए.
‘पीहू, थोड़ा सा दर्द होगा, लेकिन उसके बाद जो मज़ा मिलेगा, वह तुम कभी भूल नहीं पाओगी. अपनी सांसें रोक कर रखना!’ असीम ने प्यार से समझाया.
पीहू ने डर के मारे मेरी तरफ देखा, मैंने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और कहा- घबरा मत पीहू, बस इस तजुर्बेकार मर्द के लंड का मज़ा ले.
असीम ने अपने लंड की मुंडी को पीहू के तंग छेद पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का मारा.
‘आआह अह मम्मा … मर गई … निकालो … बहुत दर्द हो रहा है!’ पीहू बहुत ज़ोर से चीख पड़ी और उसकी आंखों से आंसू निकल आए.
असीम का आधा लंड पीहू की कुंवारी बुर को फाड़कर अन्दर घुस चुका था.
पीहू की बुर की सील टूट चुकी थी और उसके छेद से खू.न की कुछ बूंदें निकलकर असीम के सांवले लंड पर लग गई थीं.
असीम कुछ मिनट के लिए रुक गए ताकि पीहू का दर्द थोड़ा कम हो सके.
मैं पीहू के होंठों को चूमकर उसका ध्यान भटकाने लगी.
जैसे ही पीहू का बदन थोड़ा शांत हुआ, असीम ने एक और गहरा धक्का मारा और पूरा 7 इंच का लंड पीहू की चूत के गर्भाशय की दीवार से जा टकराया.
पीहू ने अपने दांत मेरे कंधे पर गड़ा दिए.
लेकिन अब, दर्द की जगह धीरे-धीरे एक तीखे और मीठे मज़े ने ले ली थी.
असीम ने बहुत ही प्यार से, धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू किया.
‘चुपाक-चुपाक’ की आवाज़ होने लगी.
पीहू की तंग बुर असीम के मोटे लंड को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थी, जिससे असीम के मुँह से भी ‘उफ्फ़ … आह … ‘ की आवाजें निकल रही थीं.
‘ओह पीहू … तुम्हारी चूत तो बहुत ही टाइट है! ऐसा मज़ा मुझे बरसों बाद मिला है!’ असीम ने हांफते हुए कहा.
पीहू को अब असली मज़ा आने लगा था.
उसका दर्द पूरी तरह गायब हो चुका था और वह अपनी गांड को ऊपर उठा-उठाकर असीम के धक्कों का साथ देने लगी थी.
‘आहह असीम … हां … और अन्दर तक मारो … उफ्फ़ … मुझे पूरा चोद दो आज … अपनी बना लो मुझे!’ पीहू वासना के चरम पर चिल्ला रही थी.
असीम पिछले आधे घंटे से बिना रुके हम दोनों कलियों को बारी-बारी से चोद रहे थे.
अब वे अपने अंतिम पड़ाव पर थे.
उन्होंने पीहू को बेड पर सीधा लिटाया और मुझे पीहू के ऊपर लेटने को कहा.
अब मैं पीहू के ऊपर थी और हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे और असीम ने पीहू की टांगें अपने कंधों पर रखकर अपनी रफ्तार को सुपरफास्ट मोड पर डाल दिया.
वे किसी बेकाबू सांड की तरह पीहू की चूत में धक्के मार रहे थे.
पीहू का पूरा बदन हिल रहा था.
उसके बूब्स हवा में उछल रहे थे, जिन्हें मैं अपने हाथों से मसल रही थी.
हम तीनों की सांसें और जिस्म का पसीना एक हो चुका था.
‘आरोही … पीहू … मैं झड़ने वाला हूँ! मेरा माल निकलने वाला है!’ असीम ने हांफते हुए चेतावनी दी.
‘अन्दर ही डालो असीम … पीहू की चूत में ही छोड़ दो सारा पानी!’ मैंने चिल्लाकर कहा.
असीम ने तीन-चार बेहद ताकतवर और आखिरी धक्के मारे और उनका पूरा लंड पीहू की बुर के अन्दर तक धंस गया.
उसी पल, असीम के लंड ने गर्म-गर्म गाढ़े वीर्य के झरने पीहू की चूत के अन्दर छोड़ दिए.
वीर्य का वह सैलाब इतना ज्यादा था कि पीहू की चूत से बहकर बेड की चादर पर गिरने लगा.
पीहू ने एक लंबी सिसकारी भरी और असीम के नीचे पूरी तरह शांत हो गई.
असीम भी थककर हम दोनों के ऊपर ढह गए.
कमरे में सिर्फ हम तीनों की हांफने की आवाज़ें आ रही थीं.
असीम की ‘थ्री-गर्ल्स’ फंतासी का पहला और सबसे रोमांचक भाग आज पूरी तरह मुकम्मल हो चुका था.
पीहू आज एक लड़की से पूरी तरह औरत बन चुकी थी और उसके चेहरे पर एक गजब का संतोष और चमक थी.
हम तीनों करीब एक घंटे तक बेड पर नंगे ही एक-दूसरे की बांहों में लिपटे रहे.
असीम बीच-बीच में हम दोनों के बूब्स और चूत को सहला रहे थे.
पीहू अब पूरी तरह असीम की दीवानी हो चुकी थी.
वह उनके लंड को अपने हाथों में लेकर सहला रही थी, जो अब शांत हो चुका था.
रात के करीब ग्यारह बज चुके थे.
मैंने पीहू से कहा- चलो पीहू, अब हमें घर चलना चाहिए, वरना घर पर सब शक करेंगे.
पीहू ने भारी मन से असीम की बांहों से खुद को अलग किया.
हम दोनों ने बाथरूम में जाकर अपने जिस्म को साफ किया, जहां अभी भी असीम के लंड की गंध आ रही थी.
कपड़े पहनकर जब हम कमरे में वापस आई तो असीम ने हम दोनों को गले से लगाया और हमारी तारीफों के पुल बांध दिए.
पीहू ने असीम की आंखों में देखते हुए कहा- असीम जी, थैंक यू सो मच! आपने मेरा सारा डर दूर कर दिया. मैं लाइफ में कभी नहीं भूलूंगी कि मेरी सील आपके जैसे कमाल के मर्द ने तोड़ी है.
असीम ने हंसते हुए कहा- मज़ा तो मुझे आया पीहू … और आरोही, अब हमारी अगली रात अन्जू के साथ होगी, राइट?
मैंने मुस्कुराते हुए अपनी उंगली उनके होंठों पर रखी और कहा- बिल्कुल डॉक्टर साहब! अब अगले भाग में अन्जू भी हमारे साथ होगी और तब आपकी वह ‘थ्री-गर्ल्स’ वाली पूरी फंतासी एक साथ इसी बेड पर मुकम्मल होगी. तब तक के लिए आप अपना लंड तैयार रखिये!
असीम ने मुस्कुराकर हामी भरी.
मैं और पीहू एक-दूसरे का हाथ पकड़कर, अपने जिस्म में एक अनोखा और गहरा सुख लेकर होटल के कमरे से बाहर निकलीं और जयपुर की ठंडी रात में अपने घर की तरफ बढ़ गईं.
दोस्तो, उम्मीद है कि आप सभी की टांगों के बीच तूफान आया होगा.
मुझे जरूर से बताएं कि कैसा लगी लिकिंग अ वर्जिन पुसी स्टोरी?
अगले भाग में मैं आपको असीम की तीसरी फैन्टेसी का मजा लिखूँगी, जिसमें हम तीन लड़कियां एक साथ असीम के लंड से खेल कर आपको मजा देंगी.
बाय.
यह कहानी सुनें.
फ्रेंड्स, मैं आरोही आपको अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग का मजा देने के लिए हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
मेरी प्यासी चूत को मिला NRI डॉक्टर का लंड
में आप पढ़ चुके थे कि असीम ने होटल के कमरे में किस तरह से मुझे चोद कर रौंद दिया था.
जब मैं असीम से अलग हुई तो उन्होंने मुझे अगले दिन कुंवारी चुत वाली पीहू को साथ लाने की याद दिलाई.
मैंने भी हंस कर हामी भर दी.
अब आगे लिकिंग अ वर्जिन पुसी स्टोरी:
असीम के साथ बिताई वह पहली मदहोश रात मेरे जिस्म और दिमाग में इस कदर बस चुकी थी कि पूरी रात मेरी आंखों से नींद गायब थी.
मेरी चूत में असीम के गाढ़े वीर्य की वह गर्माहट अभी भी महसूस हो रही थी.
सुबह होते ही मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही मिशन था … असीम से किया हुआ वह वादा पूरा करना और उनकी ‘थ्री-गर्ल्स’ वाली फैंटेसी की पहली सीढ़ी चढ़ना.
मुझे अपनी सहेली पीहू को हर हाल में उस होटल के कमरे तक लाना था.
पीहू मेरी सबसे पक्की सहेली थी लेकिन वह स्वभाव से थोड़ी शर्मीली और संकोची थी.
उसने आज तक किसी मर्द को अपना बदन नहीं सौंपा था, यहां तक कि वह अभी भी पूरी तरह वर्जिन थी.
दोपहर में जब मैं उससे मिली, तो मैंने उसे अपनी और असीम की कल की चुदाई का सारा किस्सा बेहद मिर्च-मसाला लगाकर सुनाया.
मैंने उसे बताया कि असीम कोई आम मर्द नहीं बल्कि सिंगापुर के एक जाने-माने सेक्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, जिनके हाथों में ऐसा जादू है कि औरत दर्द भूलकर स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है.
शुरुआत में पीहू बहुत झिझकी.
उसने अपनी उंगली के नाखून चबाते हुए कहा- आरोही, मुझे डर लगता है यार! मैंने आज तक किसी मर्द के सामने अपने कपड़े नहीं उतारे और वह तो इतने बड़े डॉक्टर हैं. कहीं मुझे दर्द हुआ तो?
मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा- अरे पगली, कल उन्होंने मेरी चूत को अपनी जीभ से ऐसा चाटा कि मैं पांच मिनट में ही पानी-पानी हो गई! वह पहले तेरी बुर को अपनी जीभ से सहलाएंगे, तेरा सारा डर निकाल देंगे. तू बस मेरे कहने पर चल, आज हम दोनों मिलकर उस पचास साल के तजुर्बेकार मर्द का सारा पानी निकाल देंगी!
मेरे बार-बार उकसाने और लेस्बियन एक्ट का लालच देने पर आखिरकार पीहू का सतीत्व भी डगमगा गया.
उसकी आंखों में भी वासना की एक हल्की सी चमक तैरने लगी.
वह असीम से अपना तन का मिलन करवाने के लिए राजी हो गई.
शाम के ठीक सात बजे हम दोनों जयपुर के उसी आलीशान होटल की लिफ्ट में थे.
आज की रात को यादगार बनाने के लिए हम दोनों ने विशेष तैयारी की थी.
मैंने ब्लैक कलर की बेहद टाइट वन-पीस ड्रेस पहनी थी, जिसके नीचे सिर्फ एक थोंग (पतली पैंटी) थी.
पीहू ने पिंक कलर का एक स्लीवलेस टॉप और व्हाइट शॉर्ट्स पहना हुआ था.
पीहू का रंग एकदम गोरा था और उसके बूब्स का साइज 32बी था, जो एकदम कड़क और गोल थे.
यह शॉर्ट ड्रेस उसके ऊपर बेहद दिलकश लग रही थी.
हम दोनों का रूप देखकर लिफ्ट में खड़ा हर मर्द हमें ही घूर रहा था.
जब मैंने असीम के सुइट नंबर 405 के दरवाजे पर बेल बजाई.
तो कुछ ही पल में दरवाजा खुला.
सामने असीम खड़े थे जो वाइन-कलर का सिल्क नाइट गाउन पहने हुए थे.
जैसे ही उनकी नजरें मुझ पर और मेरे साथ खड़ी सहमी सी, गोरी-चिट्टी पीहू पर पड़ीं, उनकी आंखों की भूख चार गुना बढ़ गई.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हैलो डॉक्टर … देखिये, मैं अपना वादा पूरा करने के लिए अपनी जानू पीहू को आपके पास ले आई हूँ.
असीम ने आगे बढ़कर हम दोनों को अन्दर लिया और दरवाजा लॉक कर दिया.
कमरे में हल्की नीली लाइट जल रही थी और बहुत ही धीमा रोमांटिक म्यूज़िक बज रहा था.
असीम ने पीहू की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बेहद संजीदगी से कहा- हैलो पीहू … डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. तुम आरोही की सहेली हो, तो आज से मेरी भी सबसे खास दोस्त हो.
पीहू ने थरथराते हाथों से उनसे हाथ मिलाया और बोली- हैलो डॉक्टर सर!
असीम ने हम दोनों को सोफे पर बिठाया और हमारे लिए रेड वाइन के दो ग्लास तैयार किए.
वाइन के दो-चार घूंट अन्दर जाते ही पीहू के चेहरे की लाली बढ़ गई और उसका संकोच थोड़ा कम होने लगा.
असीम मेरे करीब आए और उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.
वे बहुत ही शिद्दत से मेरी जीभ को चूस रहे थे.
यह दृश्य देखकर पीहू की सांसें तेज होने लगीं.
असीम ने चूमते-चूमते अपना एक हाथ बढ़ाया और पीहू की जांघ पर रख दिया.
उनके गर्म हाथ का स्पर्श पाते ही पीहू सिहर उठी, लेकिन उसने अपना पैर पीछे नहीं खींचा.
असीम ने अपना मुँह मेरे होंठों से हटाया और पीहू की तरफ बढ़े.
‘पीहू … तुम बेहद खूबसूरत हो. क्या मैं इस सुंदर चेहरे को चूम सकता हूँ?’ असीम ने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा.
पीहू ने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं, जो उसकी रज़ामंदी थी.
असीम झुके और उन्होंने पीहू के गुलाबी, अछूते होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
पीहू के लिए यह पहला मर्दाना स्पर्श था.
असीम बहुत ही धीरे-धीरे उसके होंठों का रस चूसने लगे.
धीरे-धीरे पीहू ने भी अपने हाथ असीम के कंधों पर रख दिए और उनके चुंबन का जवाब देने लगी.
यह देखकर मैंने पीहू के टॉप के नीचे अपना हाथ घुसा दिया और उसके कड़क बूब्स को सहलाने लगी.
अब माहौल पूरी तरह कामुक हो चुका था.
असीम पीहू को चूम रहे थे और मैं पीहू के बूब्स को मसल रही थी.
पीहू के मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकलने लगी थीं- उफ्फ़ … आह … आरोही … डॉक्टर!
असीम ने हम दोनों को बेड पर चलने का इशारा किया.
हम तीनों किंग-साइज बेड के बीचों-बीच आ गए. असीम ने अपने नाइट गाउन को उतार कर फेंक दिया.
वे अन्दर पूरी तरह नंगे थे और उनका 7 इंच का सांवला लंड पूरी ताकत से खड़ा होकर आसमान की तरफ ताक रहा था.
पीहू ने जब पहली बार इतना बड़ा और कड़क लंड अपनी आंखों के सामने देखा, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं.
वह डर के मारे थोड़ा पीछे हटने लगी.
यह देखकर मैंने पीहू को संभाला.
मैंने अपने वन-पीस ड्रेस की जिप खोली और उसे उतार कर फेंक दिया.
अब मैं सिर्फ एक काली पतली पैंटी में थी.
फिर मैंने पीहू के टॉप को ऊपर उठाया और उसे ऊपर से पूरी तरह से नंगी कर दिया.
अब केवल नीचे शॉर्ट्स और पैंटी बची थी.
पीहू ने भी अन्दर कोई ब्रा नहीं पहनी थी.
उसके दोनों गोरे, सुडौल स्तन, जिन पर गुलाबी रंग के छोटे-छोटे निप्पल थे, कमरे की लाइट में चमक रहे थे.
‘ओह गॉड पीहू … तुम्हारे बूब्स तो कमाल के हैं!’ असीम ने तारीफ करते हुए कहा.
मैंने असीम की फंतासी को याद करते हुए पीहू को बेड पर सीधा लिटा दिया.
मैंने उसकी शॉर्ट्स और पैंटी को एक साथ नीचे खींचकर उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया.
पीहू की चूत को देखकर असीम के चेहरे पर एक गजब की संतुष्टि आ गई.
पीहू की चूत पर एक भी बाल नहीं था; वह एकदम साफ, गुलाबी और कली की तरह बंद थी क्योंकि वह अभी तक कुंवारी थी.
मैंने पीहू के ऊपर आकर उसके होंठों को चूमना शुरू किया और अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी बंद चूत के दाने को उंगली से सहलाने लगी.
पीहू मेरी बांहों में मचलने लगी.
वह बोली- आह आरोही … वहां बहुत अजीब सा लग रहा है … कुछ बह रहा है वहां से!
मैंने हंसते हुए कहा- पगली, तेरी बुर पानी छोड़ रही है. अब देख डॉक्टर साहब इसका इलाज कैसे करते हैं.
असीम बिना वक्त गंवाए पीहू के पैरों के बीच बैठ गए.
उन्होंने पीहू की दोनों गोरी जांघों को पूरी तरह फैलाया और अपना मुँह सीधे उसकी कुंवारी चूत पर जमा दिया.
‘आहहह!’ पीहू बिस्तर से उछल पड़ी.
उसने असीम के बालों को अपने हाथों में कसकर जकड़ लिया.
असीम ने अपनी जीभ को एक धारदार औजार की तरह पीहू की चूत की पतली दरार के अन्दर डाला और ऊपर-नीचे चाटना शुरू कर दिया.
वे अपनी जीभ से पीहू के क्लीटोरिस (दाने) को चूस रहे थे.
पीहू ने अपनी जिंदगी में ऐसा सुख कभी नहीं सोचा था.
लिकिंग अ वर्जिन पुसी से उसकी बंद चूत से काम-रस का फव्वारा फूट पड़ा.
असीम उस सारे कुंवारी चूत के अमृत को बड़े चाव से चाट-चाट कर पी रहे थे.
‘उफ्फ़ … डॉक्टर साहब … मम्मा रे … मर गई! ये क्या कर रहे हो … आह … बहुत मज़ा आ रहा है … आरोही मुझे बचाओ … मैं पागल हो जाऊंगी!’ पीहू बेड पर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाती हुई चीख रही थी.
मैंने पीहू के एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और उसके निप्पल को चूसने लगी.
अब पीहू ऊपर और नीचे दोनों तरफ से पूरी तरह काम-रस में डूब चुकी थी.
असीम लगातार 20 मिनट तक पीहू की बुर को लॉलीपॉप की तरह चूसते रहे.
पीहू का पूरा बदन कांपने लगा, उसकी जांघें अकड़ गईं और उसने अपनी चूत का सारा पानी असीम के मुँह में छोड़ दिया.
वह हांफती हुई बेड पर ढह गई.
पीहू के झड़ते ही असीम खड़े हुए.
उनका लंड अब काम-रस से पूरी तरह भीग चुका था और और भी ज्यादा कड़क हो गया था.
मैंने असीम से कहा- असीम जी, पीहू अभी वर्जिन है, तो आप शुरुआत मेरे साथ कीजिये ताकि पीहू देख कर पूरी तरह तैयार हो जाए.
असीम ने मुस्कुराते हुए मुझे बेड के किनारे पर घोड़ी (डॉगी स्टाइल पोजीशन) बना दिया.
मेरी मटकती हुई गांड उनके लंड के सामने थी.
असीम ने पीछे से अपने लंड को मेरी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में पूरा 7 इंच का मूसल मेरी बुर के अन्दर धकेल दिया.
मैंने अपने मुँह से ‘आहहह … उफ्फ़ असीम!’ की एक तीखी कराह निकाली.
चूंकि मेरी चूत कल की चुदाई से थोड़ी खुली हुई थी इसलिए उनका मोटा लंड बहुत ही स्मूथली अन्दर-बाहर होने लगा.
‘फच-फच, फच-फच’ की आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा.
पीहू बेड पर लेटी हुई अपनी फटी आंखों से यह सब देख रही थी.
एक मर्द का लंड एक औरत की चूत में कैसे अन्दर-बाहर होता है, यह नजारा उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर रहा था.
उसकी चूत दोबारा पानी छोड़ने लगी थी.
असीम ने मुझे चोदते हुए पीहू से कहा- पीहू, आगे आओ और आरोही के मुँह में अपना बूब्स दे दो.
पीहू घुटनों के बल चलती हुई मेरे मुँह के पास आई.
मैंने तुरंत उसके एक गोरे चूचे को अपने मुँह में भर लिया और उसके निप्पल को अपनी जीभ से दबाने लगी.
उस वक्त असीम पीछे से मेरी चूत फाड़ रहे थे और मैं आगे से अपनी सहेली के स्तनों का रस ले रही थी.
यह दृश्य किसी नेस्टी एडल्ट फिल्म जैसा था.
असीम बहुत ही पावरफुल धक्के मार रहे थे.
उनका लंड मेरी चूत की गहराई से टकरा रहा था और मुझे चरम सुख की तरफ ले जा रहा था.
लगभग 15 मिनट तक मुझे बुरी तरह पेलने के बाद असीम ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला जो पूरी तरह मेरे पानी से सना हुआ था.
अब बारी पीहू की थी.
असीम ने पीहू को बेड पर पीठ के बल लिटाया और उसकी टांगों को मोड़कर छाती से सटा दिया.
पीहू की गुलाबी चूत अब पूरी तरह असीम के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थी.
असीम ने अपने लंड के सुपाड़े पर मेरी चूत का पानी लगाया ताकि वह चिकना हो जाए.
‘पीहू, थोड़ा सा दर्द होगा, लेकिन उसके बाद जो मज़ा मिलेगा, वह तुम कभी भूल नहीं पाओगी. अपनी सांसें रोक कर रखना!’ असीम ने प्यार से समझाया.
पीहू ने डर के मारे मेरी तरफ देखा, मैंने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और कहा- घबरा मत पीहू, बस इस तजुर्बेकार मर्द के लंड का मज़ा ले.
असीम ने अपने लंड की मुंडी को पीहू के तंग छेद पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का मारा.
‘आआह अह मम्मा … मर गई … निकालो … बहुत दर्द हो रहा है!’ पीहू बहुत ज़ोर से चीख पड़ी और उसकी आंखों से आंसू निकल आए.
असीम का आधा लंड पीहू की कुंवारी बुर को फाड़कर अन्दर घुस चुका था.
पीहू की बुर की सील टूट चुकी थी और उसके छेद से खू.न की कुछ बूंदें निकलकर असीम के सांवले लंड पर लग गई थीं.
असीम कुछ मिनट के लिए रुक गए ताकि पीहू का दर्द थोड़ा कम हो सके.
मैं पीहू के होंठों को चूमकर उसका ध्यान भटकाने लगी.
जैसे ही पीहू का बदन थोड़ा शांत हुआ, असीम ने एक और गहरा धक्का मारा और पूरा 7 इंच का लंड पीहू की चूत के गर्भाशय की दीवार से जा टकराया.
पीहू ने अपने दांत मेरे कंधे पर गड़ा दिए.
लेकिन अब, दर्द की जगह धीरे-धीरे एक तीखे और मीठे मज़े ने ले ली थी.
असीम ने बहुत ही प्यार से, धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू किया.
‘चुपाक-चुपाक’ की आवाज़ होने लगी.
पीहू की तंग बुर असीम के मोटे लंड को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थी, जिससे असीम के मुँह से भी ‘उफ्फ़ … आह … ‘ की आवाजें निकल रही थीं.
‘ओह पीहू … तुम्हारी चूत तो बहुत ही टाइट है! ऐसा मज़ा मुझे बरसों बाद मिला है!’ असीम ने हांफते हुए कहा.
पीहू को अब असली मज़ा आने लगा था.
उसका दर्द पूरी तरह गायब हो चुका था और वह अपनी गांड को ऊपर उठा-उठाकर असीम के धक्कों का साथ देने लगी थी.
‘आहह असीम … हां … और अन्दर तक मारो … उफ्फ़ … मुझे पूरा चोद दो आज … अपनी बना लो मुझे!’ पीहू वासना के चरम पर चिल्ला रही थी.
असीम पिछले आधे घंटे से बिना रुके हम दोनों कलियों को बारी-बारी से चोद रहे थे.
अब वे अपने अंतिम पड़ाव पर थे.
उन्होंने पीहू को बेड पर सीधा लिटाया और मुझे पीहू के ऊपर लेटने को कहा.
अब मैं पीहू के ऊपर थी और हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे और असीम ने पीहू की टांगें अपने कंधों पर रखकर अपनी रफ्तार को सुपरफास्ट मोड पर डाल दिया.
वे किसी बेकाबू सांड की तरह पीहू की चूत में धक्के मार रहे थे.
पीहू का पूरा बदन हिल रहा था.
उसके बूब्स हवा में उछल रहे थे, जिन्हें मैं अपने हाथों से मसल रही थी.
हम तीनों की सांसें और जिस्म का पसीना एक हो चुका था.
‘आरोही … पीहू … मैं झड़ने वाला हूँ! मेरा माल निकलने वाला है!’ असीम ने हांफते हुए चेतावनी दी.
‘अन्दर ही डालो असीम … पीहू की चूत में ही छोड़ दो सारा पानी!’ मैंने चिल्लाकर कहा.
असीम ने तीन-चार बेहद ताकतवर और आखिरी धक्के मारे और उनका पूरा लंड पीहू की बुर के अन्दर तक धंस गया.
उसी पल, असीम के लंड ने गर्म-गर्म गाढ़े वीर्य के झरने पीहू की चूत के अन्दर छोड़ दिए.
वीर्य का वह सैलाब इतना ज्यादा था कि पीहू की चूत से बहकर बेड की चादर पर गिरने लगा.
पीहू ने एक लंबी सिसकारी भरी और असीम के नीचे पूरी तरह शांत हो गई.
असीम भी थककर हम दोनों के ऊपर ढह गए.
कमरे में सिर्फ हम तीनों की हांफने की आवाज़ें आ रही थीं.
असीम की ‘थ्री-गर्ल्स’ फंतासी का पहला और सबसे रोमांचक भाग आज पूरी तरह मुकम्मल हो चुका था.
पीहू आज एक लड़की से पूरी तरह औरत बन चुकी थी और उसके चेहरे पर एक गजब का संतोष और चमक थी.
हम तीनों करीब एक घंटे तक बेड पर नंगे ही एक-दूसरे की बांहों में लिपटे रहे.
असीम बीच-बीच में हम दोनों के बूब्स और चूत को सहला रहे थे.
पीहू अब पूरी तरह असीम की दीवानी हो चुकी थी.
वह उनके लंड को अपने हाथों में लेकर सहला रही थी, जो अब शांत हो चुका था.
रात के करीब ग्यारह बज चुके थे.
मैंने पीहू से कहा- चलो पीहू, अब हमें घर चलना चाहिए, वरना घर पर सब शक करेंगे.
पीहू ने भारी मन से असीम की बांहों से खुद को अलग किया.
हम दोनों ने बाथरूम में जाकर अपने जिस्म को साफ किया, जहां अभी भी असीम के लंड की गंध आ रही थी.
कपड़े पहनकर जब हम कमरे में वापस आई तो असीम ने हम दोनों को गले से लगाया और हमारी तारीफों के पुल बांध दिए.
पीहू ने असीम की आंखों में देखते हुए कहा- असीम जी, थैंक यू सो मच! आपने मेरा सारा डर दूर कर दिया. मैं लाइफ में कभी नहीं भूलूंगी कि मेरी सील आपके जैसे कमाल के मर्द ने तोड़ी है.
असीम ने हंसते हुए कहा- मज़ा तो मुझे आया पीहू … और आरोही, अब हमारी अगली रात अन्जू के साथ होगी, राइट?
मैंने मुस्कुराते हुए अपनी उंगली उनके होंठों पर रखी और कहा- बिल्कुल डॉक्टर साहब! अब अगले भाग में अन्जू भी हमारे साथ होगी और तब आपकी वह ‘थ्री-गर्ल्स’ वाली पूरी फंतासी एक साथ इसी बेड पर मुकम्मल होगी. तब तक के लिए आप अपना लंड तैयार रखिये!
असीम ने मुस्कुराकर हामी भरी.
मैं और पीहू एक-दूसरे का हाथ पकड़कर, अपने जिस्म में एक अनोखा और गहरा सुख लेकर होटल के कमरे से बाहर निकलीं और जयपुर की ठंडी रात में अपने घर की तरफ बढ़ गईं.
दोस्तो, उम्मीद है कि आप सभी की टांगों के बीच तूफान आया होगा.
मुझे जरूर से बताएं कि कैसा लगी लिकिंग अ वर्जिन पुसी स्टोरी?
अगले भाग में मैं आपको असीम की तीसरी फैन्टेसी का मजा लिखूँगी, जिसमें हम तीन लड़कियां एक साथ असीम के लंड से खेल कर आपको मजा देंगी.
बाय.