हार्डकोर सेक्स विद अ लव्ड मैन का मजा लिया मैंने सिंगापूर के एक डॉक्टर के साथ जिनसे चुदाई के सपने मैंने एक अरसे से संजोये थे. मैं उनसे अपनी सील खुलवाना चाहती थी पर मेरी वासना ठहर ना सकी.
फ्रेंड्स, मैं आरोही आपके सामने अपनी मदभरी सेक्स कहानी को लिख रही हूँ.
इस कहानी का पूरा आनन्द लेने के लिए आपको इससे पहले प्रकाशित हुई कहानी
कमसिन लड़की की चूत की प्यास
को जरूर पढ़ना चाहिए … क्योंकि आज की कहानी की शुरुआत किस तरह से हुई थी, यदि उसको जाने बिना आप इसे पढ़ेंगे तो शायद उतना मजा नहीं आएगा.
मैं लिंक दे रही हूँ, प्लीज एक बार जरूर पढ़ें कि सिंगापुर में रहने वाले असीम से चैट के माध्यम से किस तरह से हम तीनों लड़कियों की मुलाकात हुई और भारत में हम तीनों के साथ सेक्स करके असीम ने अपनी फंतासी को पूर्ण करने का वादा किया.
आज की इस हार्डकोर सेक्स विद अ लव्ड मैन का मजा कहानी में असीम की सेक्स फंतासियों का बड़ा ही कामुक विवरण है. आइए जानते हैं.
असीम से चैट पर हुई उन तमाम कामुक और उत्तेजक बातों के बाद, आखिरकार वह वक्त आ ही गया, जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार था.
असीम से चैट करते हुए मुझे पूरे तीन महीने बीत चुके थे. इन तीन महीनों का एक-एक दिन मैंने असीम की याद में और अपनी चूत में उंगलियां कर-करके काटा था.
जब भी मैं रात को अपने बिस्तर पर लेटी होती, तो मेरे दिमाग में सिर्फ असीम का वह पचास साल का तजुर्बेकार चेहरा और उनकी कामुक बातें घूमती रहती थीं.
मैंने अपनी सहेली जैसी बहन पीहू को भी धीरे-धीरे इस बात के लिए मनाना शुरू कर दिया था और अन्जू तो पहले से ही असीम के रंग में रंगी हुई थी.
जून के उस तड़पते हुए महीने में असीम का मैसेज आया कि वे दिल्ली पहुंच चुके हैं और वहां से सीधे जयपुर आ रहे हैं.
उन्होंने जयपुर के एक बेहद आलीशान और पॉश होटल में अपने लिए एक सुइट बुक किया था.
जब उन्होंने मुझे होटल का नाम और रूम नंबर व्हाट्सएप किया तो मेरे पूरे बदन में करंट दौड़ गया.
मेरी चूत में एक अजीब सी सनसनाहट होने लगी और ऐसा लगा जैसे बरसों की प्यासी बुर को आज उसका असली मालिक मिलने वाला है.
मैं उस दिन सुबह-सुबह ही तैयार होने लगी.
मैंने खास तौर पर असीम की पसंद को ध्यान में रखते हुए अपने बदन के सारे अनचाहे बाल पूरी तरह साफ किए थे.
मेरी चूत एकदम चिकनी, रेशमी और बिना बालों के किसी कली जैसी चमक रही थी.
मैंने एक बेहद बोल्ड, ब्लैक कलर की शॉर्ट स्कर्ट और डीप-नेक टॉप पहना, जिसके अन्दर मैंने कोई ब्रा नहीं पहनी थी ताकि मेरे गोल-गोल बूब्स के निप्पल सीधे टॉप के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को तैयार दिखें.
नीचे मैंने एक बेहद पतली, रेड कलर की लेस वाली पैंटी पहनी थी.
आईने में खुद को देखकर मुझे पूरा यकीन हो गया था कि आज असीम मुझे देखते ही दीवाने हो जाएंगे.
जब मैं होटल पहुंची और लिफ्ट से होते हुए उनके सुइट के दरवाजे के सामने खड़ी हुई तो मेरा दिल बहुत ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था.
मैंने गहरी सांस ली और दरवाजे पर हल्की सी नॉक की.
कुछ ही सेकंड में दरवाजा खुला और सामने असीम खड़े थे.
पचास-बावन साल की उम्र के असीम का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक था.
उनकी आंखों में एक डॉक्टर वाली संजीदगी थी.
लेकिन जैसे ही उनकी नज़र मेरे जवान, 18 साल के भरपूर बदन पर पड़ी, उनकी आंखों में एक भूखे मर्द की चमक साफ दिखाई देने लगी.
मैं कमरे के अन्दर दाखिल हुई और उन्होंने पीछे से दरवाजा बंद करके लॉक कर दिया.
कमरे में एसी की ठंडी हवा चल रही थी लेकिन हम दोनों के बीच की गर्मी इतनी तेज़ थी कि माहौल एकदम भारी हो गया.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हैलो डॉक्टर साहब! आखिरकार आप आ ही गए. आपको अंदाज़ा नहीं है कि मैंने इस दिन का कितना इंतज़ार किया है!
असीम ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, उनके चेहरे पर एक गहरी मुस्कान आ गई.
उन्होंने कहा- हैलो आरोही! चैट पर तो तुम कमाल लगती ही थी, लेकिन सच कहूं तो हकीकत में तुम किसी अप्सरा जैसी दिखती हो. तुम्हारा ये जवान और गदराया हुआ बदन देखकर तो किसी भी मर्द का ईमान डोल जाए!
यह सुनते ही मेरी सारी झिझक गायब हो गई.
मैंने कदम आगे बढ़ाया और सीधे उनके गले से लिपट गई.
उनके बदन से एक बेहद महंगी और मदहोश कर देने वाली कोलोन की खुशबू आ रही थी.
मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और खुद को पूरी तरह उनके हवाले कर दिया.
असीम ने भी बिना कोई वक्त गंवाए अपनी मजबूत बांहें मेरी पतली कमर पर कस दीं.
उनके हाथों का वह पहला छुअन इतना जादुई था कि मेरी चूत ने तुरंत ही पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
असीम ने अपनी उंगलियों से मेरी ठुड्डी को ऊपर उठाया और सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
उनका चुंबन बबलू की तरह उतावला या अनगढ़ नहीं था; उसमें एक ठहराव था, एक तजुर्बा था.
वे बहुत ही धीरे-धीरे, सहलाते हुए मेरे ऊपर और नीचे के होंठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगे.
मैंने भी अपना मुँह खोल दिया और अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी.
हमारी जीभें एक-दूसरे से टकराने लगीं और मैं उनके मुँह के नमकीन स्वाद को गटकने लगी.
चूमते-चूमते असीम के हाथ मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरे बूब्स पर चले गए.
उन्होंने मेरे टाइट और कड़क हो चुके बूब्स को अपनी हथेलियों में भरा और धीरे-धीरे दबाना शुरू किया.
‘उफ्फ़ आरोही … तुम्हारे ये बूब्स कितने टाइट हैं! बिल्कुल कच्चे आम की तरह!’ असीम ने चूमते हुए फुसफुसाया.
मैंने कराहते हुए कहा- आह असीम … इन्हें मसलो … आपके इन हाथों के लिए ही तो ये इतने दिनों से तरस रहे थे!
असीम ने बिना देर किए मेरे टॉप को ऊपर खींचा और एक ही झटके में उसे मेरे बदन से अलग कर दिया.
चूंकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए टॉप के अलग होते ही मेरे दोनों गोरे, सुडौल स्तन उनके सामने पूरी तरह आज़ाद हो गए.
कमरे की डिम लाइट में मेरे स्तनों के कड़क हो चुके भूरे निप्पल साफ चमक रहे थे.
असीम ने अपनी उंगलियों से दोनों निप्पलों को पकड़ा और उन्हें मरोड़ना शुरू किया.
उस तीखे दर्द और मज़े के मिश्रण से मेरे मुँह से एक लंबी चीख निकली- आहह असीम … उफ्फ़ माँ … बहुत मज़ा आ रहा है!
वे बेड पर बैठ गए और मुझे अपनी जांघों पर बिठा लिया.
अब मेरा चेहरा उनके सामने था. असीम नीचे झुके और सीधे मेरे दाहिने बूब्स को अपने पूरे मुँह में भर लिया.
वे किसी भूखे बच्चे की तरह मेरे निप्पल को अपनी जीभ से सहलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे.
उनके मुँह की गर्मी और थूक से मेरा पूरा स्तन भीग गया.
दूसरे हाथ से वे मेरे बाएं बूब्स को हॉर्न की तरह दबा रहे थे.
मैंने उनकी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिए.
डॉक्टर असीम की छाती चौड़ी थी और उस पर हल्के-हल्के बाल थे.
मैंने अपनी हथेलियां उनकी छाती पर फेरते हुए उनके निप्पलों को सहलाया.
असीम अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुके थे.
उन्होंने मुझे बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी शॉर्ट स्कर्ट की जिप खोलकर उसे मेरी टांगों से नीचे सरका दिया.
अब मैं बेड पर सिर्फ एक पतली सी रेड पैंटी में लेटी हुई थी.
असीम बेड पर मेरे पैरों के बीच आ गए.
उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत के उभार को अपनी हथेली से दबाया.
मेरी पैंटी मेरी चूत के पानी से पूरी तरह गीली होकर चिपक चुकी थी.
असीम ने मुस्कुराते हुए कहा- आरोही, तुम्हारी चूत तो अभी से बाढ़ ला चुकी है! चलो, आज तुम्हारी इस प्यासी बुर को वह सुख देते हैं जो इसने पहले कभी नहीं पाया.
उन्होंने धीरे से मेरी पैंटी को नीचे खींचा और मेरे पैरों से बाहर निकाल दिया.
अब मैं उनके सामने पूरी तरह नंगी, अपनी दोनों टांगें फैलाए लेटी थी.
असीम ने जब मेरी चूत को देखा, तो उनके मुँह से एक गहरी आह निकली.
मेरी चूत पूरी तरह साफ, चिकनी और गुलाबी थी, जिसके होंठ थोड़े से खुले हुए थे और उनमें से काम-रस लगातार बह रहा था.
‘लाजवाब! बिल्कुल ऐसी ही चूत जैसी मेरी फंतासी थी—एकदम चिकनी, साफ और रसीली!’ असीम ने तारीफ करते हुए कहा.
वे अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरी चूत के बिल्कुल करीब आए.
जैसे ही उनकी गर्म और गीली जीभ मेरी चूत के दाने (clitoris) पर छुई, मेरे पूरे बदन में एक तगड़ा झटका लगा.
मैंने बिस्तर की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर जकड़ लिया.
असीम ने अपनी जीभ से मेरी चूत के दाने को गोल-गोल घुमाते हुए चाटना शुरू कर दिया.
वे अपनी जीभ को मेरी चूत की दरार के अन्दर डालते और फिर बाहर निकाल कर मेरे दाने को अपने होंठों से चूस लेते.
‘आहह असीम जी … उफ्फ़ … मर गई! ओ गॉड … कितना अच्छा चाट रहे हो आप! बबलू ने कभी ऐसा नहीं किया … आहह … चाटो मेरी चूत को … पूरी खा जाओ इसे!’ मैं वासना के मारे बेड पर अपनी गांड ऊपर-नीचे पटकते हुए चिल्लाने लगी.
असीम का तजुर्बा यहां साफ दिख रहा था.
वे बिना थके, लगातार 15 मिनट तक मेरी चूत को किसी स्वादिष्ट रसीली गुजिया की तरह चाटते रहे.
उनकी लार और मेरी चूत का पानी मिलकर एक हो चुका था और कमरे में ‘चप-चप, लप-लप’ की कामुक आवाज़ गूंज रही थी.
मेरी बुर की नसें अब पूरी तरह खिंच चुकी थीं.
मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है.
मैंने असीम के सिर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर और कसकर दबा दिया.
‘असीम … मैं आ रही हूँ … उफ्फ़ … मैं झड़ रही हूँ … आहहह!’
मेरी चूत ने ज़ोर-ज़ोर से संकुचन करना शुरू कर दिया और काम-रस की एक तेज़ बौछार असीम के मुँह के अन्दर छूट गई.
असीम ने मेरी चूत के उस सारे नमकीन और मीठे रस को बड़े मज़े से गटक लिया और मेरी चूत को पूरी तरह चाटकर साफ कर दिया.
मैं पूरी तरह पस्त होकर बेड पर हांफ रही थी.
मुझे अपनी जिंदगी में पहली बार चूत चटवाने का ऐसा असीम आनन्द मिला था.
अभी मैं शांत भी नहीं हुई थी कि असीम खड़े हुए और उन्होंने अपनी पैंट और चड्डी को एक साथ नीचे उतार दिया.
जैसे ही उनका लंड बाहर आया, मेरी आंखें फटी की फटी रह गई.
पचास साल की उम्र में भी उनका लंड किसी जवान घोड़े की तरह एकदम कड़क, काले-सांवले रंग का और करीब 7 इंच लंबा था.
उनके लंड की मोटाई इतनी थी कि देखकर ही मेरी बुर दोबारा पानी छोड़ने लगी.
लंड के सुपाड़े पर नसें उभरी हुई थीं जो उसकी सख्ती को बयां कर रही थीं.
मैंने बिना कहे अपने घुटनों के बल आई और उनके लंड को अपने दोनों हाथों में थाम लिया.
उसका सुपाड़ा इतना गर्म था जैसे कोई जलता हुआ कोयला हो.
मैंने अपना मुँह खोला और उनके लंड के टॉप को अपने होंठों के बीच दबाकर चूसना शुरू कर दिया.
‘उफ्फ़ आरोही … तुम तो बहुत अच्छी तरह चूसती हो!’ असीम ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा.
मैंने उनके पूरे लंड को अपने मुँह के अन्दर लेने की कोशिश की, जिससे मेरा पूरा मुँह भर गया और लंड सीधे मेरे गले की घंटी को छूने लगा.
मैं अपने सिर को आगे-पीछे करते हुए उनके लंड को किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी और बीच-बीच में नीचे लटक रहे उनके दोनों आंडों को अपनी जीभ से सहलाती रही.
असीम के मुँह से भी अब ‘आह-आह’ की आवाज़ें निकलने लगी थीं.
लगभग 10 मिनट तक लंड चुसवाने के बाद असीम ने मुझे बेड पर पीठ के बल लिटा दिया.
उन्होंने मेरी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया.
इस पोजीशन में मेरी चूत पूरी तरह खुलकर ऊपर की तरफ आ गई थी, जो असीम के मोटे लंड का स्वागत करने के लिए बेताब थी.
असीम ने अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चूत के गीले छेद पर टिकाया और मुझसे आंखें मिलाते हुए कहा- तैयार हो आरोही? अब तुम्हें एक परिपक्व मर्द की चुदाई का असली स्वाद मिलेगा.’
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए कहा- हां असीम … पूरे अन्दर तक उतार दो इसे … मुझे अपनी चूत में आपके इस गर्म लौड़े को महसूस करना है!’
असीम ने अपनी कमर को एक हल्का सा झटका दिया और उनका आधा लंड एक ही बार में मेरी चूत की गहराई को नाप गया.
‘आहह हह!’ मेरे मुँह से एक तीखी और मज़ेदार चीख निकली. हालांकि मेरी सील पहले ही टूट चुकी थी, लेकिन असीम का लंड इतना मोटा था कि उसने मेरी चूत की दीवारों को पूरी तरह खींच दिया.
असीम रुके नहीं, उन्होंने दूसरा गहरा धक्का मारा और इस बार पूरा 7 इंच का लंड मेरी चूत के आखिरी कोने से जा टकराया.
मेरी बुर पूरी तरह ठसाठस भर चुकी थी.
असीम ने अब अपनी कमर को एक निश्चित लय में चलाना शुरू किया.
वे पूरा लंड बाहर खींचते और फिर पूरी ताकत से अन्दर धकेल देते.
कमरे में ‘फच-फच, फच-फच’ की तीखी आवाज़ें गूंजने लगीं.
असीम की चुदाई में बबलू जैसा अंधापन नहीं था, बल्कि एक गजब का कंट्रोल था.
वे हर धक्के के साथ मेरे बूब्स को सहला रहे थे और मेरे होंठों को चूम रहे थे.
मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मैं किसी राजा की बांहों में हूँ.
‘ओह असीम … आप बहुत गजब के चोदू हो! आह … आपके धक्के सीधे मेरे दिल पर लग रहे हैं … और तेज़ करो … हां, वैसे ही … मुझे पूरी तरह से पेल दो!’ मैं वासना में पूरी तरह अंधी होकर गंदी-गंदी बातें करने लगी थी.
असीम ने मेरी टांगों को कंधों से हटाकर सीधे बेड पर फैलाया और मेरे ऊपर पूरी तरह लेटकर अपनी रफ्तार बढ़ा दी.
अब वे किसी मशीन की तरह मेरे अन्दर धक्के मार रहे थे.
हर धक्के पर उनके आंडों की जोड़ी मेरी गांड के निचले हिस्से से ‘चटाक-चटाक’ टकरा रही थी.
मज़े के मारे मेरी आंखें बंद हो रही थीं और मेरा पूरा बदन पसीने से नहा चुका था.
लगभग 20 मिनट की उस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मेरी चूत की दीवारें दोबारा सिकुड़ने लगीं.
मैं अपने दूसरे ऑर्गेज्म के करीब थी.
मैंने चिल्लाते हुए कहा- असीम … मैं फिर से झड़ने वाली हूँ … प्लीज मत रुकना … ज़ोर से मारो … आहह!’
असीम ने भी अपनी रफ्तार को अपनी चरम सीमा पर पहुंचा दिया.
उन्होंने पांच-छह बेहद तेज़ और गहरे धक्के मारे.
मेरा पानी छूटने ही वाला था कि असीम ने कहा- आरोही … मेरा भी निकलने वाला है … मैं तुम्हारे अन्दर ही छोड़ रहा हूँ!
‘हां … डाल दो … अपना सारा गर्म माल मेरी चूत के अन्दर भर दो!’ मैंने पागलों की तरह कहा.
असीम ने एक आखिरी, सबसे गहरा धक्का मारा और उनका लंड मेरी चूत के अन्दर पूरी तरह धंस गया.
उसी पल उनके लंड ने गर्म-गर्म वीर्य की कई गाढ़ी पिचकारियां मेरी चूत के अन्दर छोड़ दीं.
उनका वह गर्म माल जब मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों से टकराया, तो मुझे जो जन्नत का सुख मिला, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.
हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए करीब 10 मिनट तक बेड पर वैसे ही पड़े रहे और हमारी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हुईं.
दोपहर से लेकर देर शाम तक, असीम ने मुझे एक बार और पोजीशन बदलकर पीछे से (डॉगी स्टाइल में) चोदा.
उस दिन मुझे पहली बार अहसास हुआ कि एक अनुभवी और समझदार मर्द के साथ सेक्स करने का असली मज़ा क्या होता है.
मैं खुद को बेहद भाग्यशाली समझ रही थी कि मुझे असीम जैसा पार्टनर मिला, जिसने मेरी वासना की आग को इतनी तसल्ली और मोहब्बत से बुझाया था.
शाम के करीब सात बज चुके थे.
कमरे की खिड़की से जयपुर शहर की बत्तियां चमकने लगी थीं.
मुझे अब घर वापस जाना था क्योंकि मम्मी-पापा के आने का समय हो रहा था.
मैंने बेड से उठकर बाथरूम में खुद को साफ किया और अपनी फटी हुई स्कर्ट और टॉप को दोबारा पहना.
असीम बेड पर चादर ओढ़े लेटे हुए मुस्कुरा रहे थे.
मैं उनके पास गई, उनके होंठों पर एक आखिरी प्यार भरा किस किया और कहा- असीम जी, आज आपने मुझे जो सुख दिया है, मैं उसे जिंदगी भर नहीं भूल सकती. मैं सच में बहुत भाग्यशाली हूँ कि आप मेरी जिंदगी में आए.’
असीम ने मेरा हाथ पकड़कर चूमा और बोले- मज़ा तो मुझे भी बहुत आया, आरोही. लेकिन याद है ना, हमारी बात अधूरी है? मेरी थ्री-गर्ल्स वाली फंतासी अभी बाकी है.
मैंने शरारती मुस्कान के साथ उनसे वादा किया- आप बिल्कुल फिक्र मत कीजिए डॉक्टर साहब. कल मैं अपनी सहेली पीहू को किसी भी तरह मनाकर यहां इसी कमरे में लेकर आऊंगी. कल रात आप, मैं और पीहू मिलकर वह धमाल मचाएंगे कि आपकी वह फंतासी भी हमेशा के लिए मुकम्मल हो जाएगी. अन्जू को भी हम अगले दिन शामिल कर लेंगे.
असीम ने सहमति में सिर हिलाया और मुस्कुराए.
मैंने उन्हें ‘बाय’ कहा और भारी मन से लेकिन एक गहरे शारीरिक और मानसिक सुख के साथ होटल के कमरे से बाहर निकल कर अपने घर की तरफ चल दी.
मेरी आंखों में अब कल की उस होने वाली वाइल्ड और नेस्टी रात के सपने तैर रहे थे.
दोस्तो, हार्डकोर सेक्स विद अ लव्ड मैन का मजा कहानिके अगले भाग में क्या लिखूँगी, इसका अंदाजा तो आपको हो ही गया होगा, तो रोमांच को बना रहने देती हूँ और अगले भाग में मिलती हूँ.
आपके मेल व कमेंट्स का मुझे इंतजार रहेगा.
फ्रेंड्स, मैं आरोही आपके सामने अपनी मदभरी सेक्स कहानी को लिख रही हूँ.
इस कहानी का पूरा आनन्द लेने के लिए आपको इससे पहले प्रकाशित हुई कहानी
कमसिन लड़की की चूत की प्यास
को जरूर पढ़ना चाहिए … क्योंकि आज की कहानी की शुरुआत किस तरह से हुई थी, यदि उसको जाने बिना आप इसे पढ़ेंगे तो शायद उतना मजा नहीं आएगा.
मैं लिंक दे रही हूँ, प्लीज एक बार जरूर पढ़ें कि सिंगापुर में रहने वाले असीम से चैट के माध्यम से किस तरह से हम तीनों लड़कियों की मुलाकात हुई और भारत में हम तीनों के साथ सेक्स करके असीम ने अपनी फंतासी को पूर्ण करने का वादा किया.
आज की इस हार्डकोर सेक्स विद अ लव्ड मैन का मजा कहानी में असीम की सेक्स फंतासियों का बड़ा ही कामुक विवरण है. आइए जानते हैं.
असीम से चैट पर हुई उन तमाम कामुक और उत्तेजक बातों के बाद, आखिरकार वह वक्त आ ही गया, जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार था.
असीम से चैट करते हुए मुझे पूरे तीन महीने बीत चुके थे. इन तीन महीनों का एक-एक दिन मैंने असीम की याद में और अपनी चूत में उंगलियां कर-करके काटा था.
जब भी मैं रात को अपने बिस्तर पर लेटी होती, तो मेरे दिमाग में सिर्फ असीम का वह पचास साल का तजुर्बेकार चेहरा और उनकी कामुक बातें घूमती रहती थीं.
मैंने अपनी सहेली जैसी बहन पीहू को भी धीरे-धीरे इस बात के लिए मनाना शुरू कर दिया था और अन्जू तो पहले से ही असीम के रंग में रंगी हुई थी.
जून के उस तड़पते हुए महीने में असीम का मैसेज आया कि वे दिल्ली पहुंच चुके हैं और वहां से सीधे जयपुर आ रहे हैं.
उन्होंने जयपुर के एक बेहद आलीशान और पॉश होटल में अपने लिए एक सुइट बुक किया था.
जब उन्होंने मुझे होटल का नाम और रूम नंबर व्हाट्सएप किया तो मेरे पूरे बदन में करंट दौड़ गया.
मेरी चूत में एक अजीब सी सनसनाहट होने लगी और ऐसा लगा जैसे बरसों की प्यासी बुर को आज उसका असली मालिक मिलने वाला है.
मैं उस दिन सुबह-सुबह ही तैयार होने लगी.
मैंने खास तौर पर असीम की पसंद को ध्यान में रखते हुए अपने बदन के सारे अनचाहे बाल पूरी तरह साफ किए थे.
मेरी चूत एकदम चिकनी, रेशमी और बिना बालों के किसी कली जैसी चमक रही थी.
मैंने एक बेहद बोल्ड, ब्लैक कलर की शॉर्ट स्कर्ट और डीप-नेक टॉप पहना, जिसके अन्दर मैंने कोई ब्रा नहीं पहनी थी ताकि मेरे गोल-गोल बूब्स के निप्पल सीधे टॉप के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को तैयार दिखें.
नीचे मैंने एक बेहद पतली, रेड कलर की लेस वाली पैंटी पहनी थी.
आईने में खुद को देखकर मुझे पूरा यकीन हो गया था कि आज असीम मुझे देखते ही दीवाने हो जाएंगे.
जब मैं होटल पहुंची और लिफ्ट से होते हुए उनके सुइट के दरवाजे के सामने खड़ी हुई तो मेरा दिल बहुत ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था.
मैंने गहरी सांस ली और दरवाजे पर हल्की सी नॉक की.
कुछ ही सेकंड में दरवाजा खुला और सामने असीम खड़े थे.
पचास-बावन साल की उम्र के असीम का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक था.
उनकी आंखों में एक डॉक्टर वाली संजीदगी थी.
लेकिन जैसे ही उनकी नज़र मेरे जवान, 18 साल के भरपूर बदन पर पड़ी, उनकी आंखों में एक भूखे मर्द की चमक साफ दिखाई देने लगी.
मैं कमरे के अन्दर दाखिल हुई और उन्होंने पीछे से दरवाजा बंद करके लॉक कर दिया.
कमरे में एसी की ठंडी हवा चल रही थी लेकिन हम दोनों के बीच की गर्मी इतनी तेज़ थी कि माहौल एकदम भारी हो गया.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हैलो डॉक्टर साहब! आखिरकार आप आ ही गए. आपको अंदाज़ा नहीं है कि मैंने इस दिन का कितना इंतज़ार किया है!
असीम ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, उनके चेहरे पर एक गहरी मुस्कान आ गई.
उन्होंने कहा- हैलो आरोही! चैट पर तो तुम कमाल लगती ही थी, लेकिन सच कहूं तो हकीकत में तुम किसी अप्सरा जैसी दिखती हो. तुम्हारा ये जवान और गदराया हुआ बदन देखकर तो किसी भी मर्द का ईमान डोल जाए!
यह सुनते ही मेरी सारी झिझक गायब हो गई.
मैंने कदम आगे बढ़ाया और सीधे उनके गले से लिपट गई.
उनके बदन से एक बेहद महंगी और मदहोश कर देने वाली कोलोन की खुशबू आ रही थी.
मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और खुद को पूरी तरह उनके हवाले कर दिया.
असीम ने भी बिना कोई वक्त गंवाए अपनी मजबूत बांहें मेरी पतली कमर पर कस दीं.
उनके हाथों का वह पहला छुअन इतना जादुई था कि मेरी चूत ने तुरंत ही पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
असीम ने अपनी उंगलियों से मेरी ठुड्डी को ऊपर उठाया और सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
उनका चुंबन बबलू की तरह उतावला या अनगढ़ नहीं था; उसमें एक ठहराव था, एक तजुर्बा था.
वे बहुत ही धीरे-धीरे, सहलाते हुए मेरे ऊपर और नीचे के होंठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगे.
मैंने भी अपना मुँह खोल दिया और अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी.
हमारी जीभें एक-दूसरे से टकराने लगीं और मैं उनके मुँह के नमकीन स्वाद को गटकने लगी.
चूमते-चूमते असीम के हाथ मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरे बूब्स पर चले गए.
उन्होंने मेरे टाइट और कड़क हो चुके बूब्स को अपनी हथेलियों में भरा और धीरे-धीरे दबाना शुरू किया.
‘उफ्फ़ आरोही … तुम्हारे ये बूब्स कितने टाइट हैं! बिल्कुल कच्चे आम की तरह!’ असीम ने चूमते हुए फुसफुसाया.
मैंने कराहते हुए कहा- आह असीम … इन्हें मसलो … आपके इन हाथों के लिए ही तो ये इतने दिनों से तरस रहे थे!
असीम ने बिना देर किए मेरे टॉप को ऊपर खींचा और एक ही झटके में उसे मेरे बदन से अलग कर दिया.
चूंकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए टॉप के अलग होते ही मेरे दोनों गोरे, सुडौल स्तन उनके सामने पूरी तरह आज़ाद हो गए.
कमरे की डिम लाइट में मेरे स्तनों के कड़क हो चुके भूरे निप्पल साफ चमक रहे थे.
असीम ने अपनी उंगलियों से दोनों निप्पलों को पकड़ा और उन्हें मरोड़ना शुरू किया.
उस तीखे दर्द और मज़े के मिश्रण से मेरे मुँह से एक लंबी चीख निकली- आहह असीम … उफ्फ़ माँ … बहुत मज़ा आ रहा है!
वे बेड पर बैठ गए और मुझे अपनी जांघों पर बिठा लिया.
अब मेरा चेहरा उनके सामने था. असीम नीचे झुके और सीधे मेरे दाहिने बूब्स को अपने पूरे मुँह में भर लिया.
वे किसी भूखे बच्चे की तरह मेरे निप्पल को अपनी जीभ से सहलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे.
उनके मुँह की गर्मी और थूक से मेरा पूरा स्तन भीग गया.
दूसरे हाथ से वे मेरे बाएं बूब्स को हॉर्न की तरह दबा रहे थे.
मैंने उनकी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिए.
डॉक्टर असीम की छाती चौड़ी थी और उस पर हल्के-हल्के बाल थे.
मैंने अपनी हथेलियां उनकी छाती पर फेरते हुए उनके निप्पलों को सहलाया.
असीम अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुके थे.
उन्होंने मुझे बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी शॉर्ट स्कर्ट की जिप खोलकर उसे मेरी टांगों से नीचे सरका दिया.
अब मैं बेड पर सिर्फ एक पतली सी रेड पैंटी में लेटी हुई थी.
असीम बेड पर मेरे पैरों के बीच आ गए.
उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत के उभार को अपनी हथेली से दबाया.
मेरी पैंटी मेरी चूत के पानी से पूरी तरह गीली होकर चिपक चुकी थी.
असीम ने मुस्कुराते हुए कहा- आरोही, तुम्हारी चूत तो अभी से बाढ़ ला चुकी है! चलो, आज तुम्हारी इस प्यासी बुर को वह सुख देते हैं जो इसने पहले कभी नहीं पाया.
उन्होंने धीरे से मेरी पैंटी को नीचे खींचा और मेरे पैरों से बाहर निकाल दिया.
अब मैं उनके सामने पूरी तरह नंगी, अपनी दोनों टांगें फैलाए लेटी थी.
असीम ने जब मेरी चूत को देखा, तो उनके मुँह से एक गहरी आह निकली.
मेरी चूत पूरी तरह साफ, चिकनी और गुलाबी थी, जिसके होंठ थोड़े से खुले हुए थे और उनमें से काम-रस लगातार बह रहा था.
‘लाजवाब! बिल्कुल ऐसी ही चूत जैसी मेरी फंतासी थी—एकदम चिकनी, साफ और रसीली!’ असीम ने तारीफ करते हुए कहा.
वे अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरी चूत के बिल्कुल करीब आए.
जैसे ही उनकी गर्म और गीली जीभ मेरी चूत के दाने (clitoris) पर छुई, मेरे पूरे बदन में एक तगड़ा झटका लगा.
मैंने बिस्तर की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर जकड़ लिया.
असीम ने अपनी जीभ से मेरी चूत के दाने को गोल-गोल घुमाते हुए चाटना शुरू कर दिया.
वे अपनी जीभ को मेरी चूत की दरार के अन्दर डालते और फिर बाहर निकाल कर मेरे दाने को अपने होंठों से चूस लेते.
‘आहह असीम जी … उफ्फ़ … मर गई! ओ गॉड … कितना अच्छा चाट रहे हो आप! बबलू ने कभी ऐसा नहीं किया … आहह … चाटो मेरी चूत को … पूरी खा जाओ इसे!’ मैं वासना के मारे बेड पर अपनी गांड ऊपर-नीचे पटकते हुए चिल्लाने लगी.
असीम का तजुर्बा यहां साफ दिख रहा था.
वे बिना थके, लगातार 15 मिनट तक मेरी चूत को किसी स्वादिष्ट रसीली गुजिया की तरह चाटते रहे.
उनकी लार और मेरी चूत का पानी मिलकर एक हो चुका था और कमरे में ‘चप-चप, लप-लप’ की कामुक आवाज़ गूंज रही थी.
मेरी बुर की नसें अब पूरी तरह खिंच चुकी थीं.
मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है.
मैंने असीम के सिर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर और कसकर दबा दिया.
‘असीम … मैं आ रही हूँ … उफ्फ़ … मैं झड़ रही हूँ … आहहह!’
मेरी चूत ने ज़ोर-ज़ोर से संकुचन करना शुरू कर दिया और काम-रस की एक तेज़ बौछार असीम के मुँह के अन्दर छूट गई.
असीम ने मेरी चूत के उस सारे नमकीन और मीठे रस को बड़े मज़े से गटक लिया और मेरी चूत को पूरी तरह चाटकर साफ कर दिया.
मैं पूरी तरह पस्त होकर बेड पर हांफ रही थी.
मुझे अपनी जिंदगी में पहली बार चूत चटवाने का ऐसा असीम आनन्द मिला था.
अभी मैं शांत भी नहीं हुई थी कि असीम खड़े हुए और उन्होंने अपनी पैंट और चड्डी को एक साथ नीचे उतार दिया.
जैसे ही उनका लंड बाहर आया, मेरी आंखें फटी की फटी रह गई.
पचास साल की उम्र में भी उनका लंड किसी जवान घोड़े की तरह एकदम कड़क, काले-सांवले रंग का और करीब 7 इंच लंबा था.
उनके लंड की मोटाई इतनी थी कि देखकर ही मेरी बुर दोबारा पानी छोड़ने लगी.
लंड के सुपाड़े पर नसें उभरी हुई थीं जो उसकी सख्ती को बयां कर रही थीं.
मैंने बिना कहे अपने घुटनों के बल आई और उनके लंड को अपने दोनों हाथों में थाम लिया.
उसका सुपाड़ा इतना गर्म था जैसे कोई जलता हुआ कोयला हो.
मैंने अपना मुँह खोला और उनके लंड के टॉप को अपने होंठों के बीच दबाकर चूसना शुरू कर दिया.
‘उफ्फ़ आरोही … तुम तो बहुत अच्छी तरह चूसती हो!’ असीम ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा.
मैंने उनके पूरे लंड को अपने मुँह के अन्दर लेने की कोशिश की, जिससे मेरा पूरा मुँह भर गया और लंड सीधे मेरे गले की घंटी को छूने लगा.
मैं अपने सिर को आगे-पीछे करते हुए उनके लंड को किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी और बीच-बीच में नीचे लटक रहे उनके दोनों आंडों को अपनी जीभ से सहलाती रही.
असीम के मुँह से भी अब ‘आह-आह’ की आवाज़ें निकलने लगी थीं.
लगभग 10 मिनट तक लंड चुसवाने के बाद असीम ने मुझे बेड पर पीठ के बल लिटा दिया.
उन्होंने मेरी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया.
इस पोजीशन में मेरी चूत पूरी तरह खुलकर ऊपर की तरफ आ गई थी, जो असीम के मोटे लंड का स्वागत करने के लिए बेताब थी.
असीम ने अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चूत के गीले छेद पर टिकाया और मुझसे आंखें मिलाते हुए कहा- तैयार हो आरोही? अब तुम्हें एक परिपक्व मर्द की चुदाई का असली स्वाद मिलेगा.’
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए कहा- हां असीम … पूरे अन्दर तक उतार दो इसे … मुझे अपनी चूत में आपके इस गर्म लौड़े को महसूस करना है!’
असीम ने अपनी कमर को एक हल्का सा झटका दिया और उनका आधा लंड एक ही बार में मेरी चूत की गहराई को नाप गया.
‘आहह हह!’ मेरे मुँह से एक तीखी और मज़ेदार चीख निकली. हालांकि मेरी सील पहले ही टूट चुकी थी, लेकिन असीम का लंड इतना मोटा था कि उसने मेरी चूत की दीवारों को पूरी तरह खींच दिया.
असीम रुके नहीं, उन्होंने दूसरा गहरा धक्का मारा और इस बार पूरा 7 इंच का लंड मेरी चूत के आखिरी कोने से जा टकराया.
मेरी बुर पूरी तरह ठसाठस भर चुकी थी.
असीम ने अब अपनी कमर को एक निश्चित लय में चलाना शुरू किया.
वे पूरा लंड बाहर खींचते और फिर पूरी ताकत से अन्दर धकेल देते.
कमरे में ‘फच-फच, फच-फच’ की तीखी आवाज़ें गूंजने लगीं.
असीम की चुदाई में बबलू जैसा अंधापन नहीं था, बल्कि एक गजब का कंट्रोल था.
वे हर धक्के के साथ मेरे बूब्स को सहला रहे थे और मेरे होंठों को चूम रहे थे.
मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मैं किसी राजा की बांहों में हूँ.
‘ओह असीम … आप बहुत गजब के चोदू हो! आह … आपके धक्के सीधे मेरे दिल पर लग रहे हैं … और तेज़ करो … हां, वैसे ही … मुझे पूरी तरह से पेल दो!’ मैं वासना में पूरी तरह अंधी होकर गंदी-गंदी बातें करने लगी थी.
असीम ने मेरी टांगों को कंधों से हटाकर सीधे बेड पर फैलाया और मेरे ऊपर पूरी तरह लेटकर अपनी रफ्तार बढ़ा दी.
अब वे किसी मशीन की तरह मेरे अन्दर धक्के मार रहे थे.
हर धक्के पर उनके आंडों की जोड़ी मेरी गांड के निचले हिस्से से ‘चटाक-चटाक’ टकरा रही थी.
मज़े के मारे मेरी आंखें बंद हो रही थीं और मेरा पूरा बदन पसीने से नहा चुका था.
लगभग 20 मिनट की उस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मेरी चूत की दीवारें दोबारा सिकुड़ने लगीं.
मैं अपने दूसरे ऑर्गेज्म के करीब थी.
मैंने चिल्लाते हुए कहा- असीम … मैं फिर से झड़ने वाली हूँ … प्लीज मत रुकना … ज़ोर से मारो … आहह!’
असीम ने भी अपनी रफ्तार को अपनी चरम सीमा पर पहुंचा दिया.
उन्होंने पांच-छह बेहद तेज़ और गहरे धक्के मारे.
मेरा पानी छूटने ही वाला था कि असीम ने कहा- आरोही … मेरा भी निकलने वाला है … मैं तुम्हारे अन्दर ही छोड़ रहा हूँ!
‘हां … डाल दो … अपना सारा गर्म माल मेरी चूत के अन्दर भर दो!’ मैंने पागलों की तरह कहा.
असीम ने एक आखिरी, सबसे गहरा धक्का मारा और उनका लंड मेरी चूत के अन्दर पूरी तरह धंस गया.
उसी पल उनके लंड ने गर्म-गर्म वीर्य की कई गाढ़ी पिचकारियां मेरी चूत के अन्दर छोड़ दीं.
उनका वह गर्म माल जब मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों से टकराया, तो मुझे जो जन्नत का सुख मिला, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.
हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए करीब 10 मिनट तक बेड पर वैसे ही पड़े रहे और हमारी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हुईं.
दोपहर से लेकर देर शाम तक, असीम ने मुझे एक बार और पोजीशन बदलकर पीछे से (डॉगी स्टाइल में) चोदा.
उस दिन मुझे पहली बार अहसास हुआ कि एक अनुभवी और समझदार मर्द के साथ सेक्स करने का असली मज़ा क्या होता है.
मैं खुद को बेहद भाग्यशाली समझ रही थी कि मुझे असीम जैसा पार्टनर मिला, जिसने मेरी वासना की आग को इतनी तसल्ली और मोहब्बत से बुझाया था.
शाम के करीब सात बज चुके थे.
कमरे की खिड़की से जयपुर शहर की बत्तियां चमकने लगी थीं.
मुझे अब घर वापस जाना था क्योंकि मम्मी-पापा के आने का समय हो रहा था.
मैंने बेड से उठकर बाथरूम में खुद को साफ किया और अपनी फटी हुई स्कर्ट और टॉप को दोबारा पहना.
असीम बेड पर चादर ओढ़े लेटे हुए मुस्कुरा रहे थे.
मैं उनके पास गई, उनके होंठों पर एक आखिरी प्यार भरा किस किया और कहा- असीम जी, आज आपने मुझे जो सुख दिया है, मैं उसे जिंदगी भर नहीं भूल सकती. मैं सच में बहुत भाग्यशाली हूँ कि आप मेरी जिंदगी में आए.’
असीम ने मेरा हाथ पकड़कर चूमा और बोले- मज़ा तो मुझे भी बहुत आया, आरोही. लेकिन याद है ना, हमारी बात अधूरी है? मेरी थ्री-गर्ल्स वाली फंतासी अभी बाकी है.
मैंने शरारती मुस्कान के साथ उनसे वादा किया- आप बिल्कुल फिक्र मत कीजिए डॉक्टर साहब. कल मैं अपनी सहेली पीहू को किसी भी तरह मनाकर यहां इसी कमरे में लेकर आऊंगी. कल रात आप, मैं और पीहू मिलकर वह धमाल मचाएंगे कि आपकी वह फंतासी भी हमेशा के लिए मुकम्मल हो जाएगी. अन्जू को भी हम अगले दिन शामिल कर लेंगे.
असीम ने सहमति में सिर हिलाया और मुस्कुराए.
मैंने उन्हें ‘बाय’ कहा और भारी मन से लेकिन एक गहरे शारीरिक और मानसिक सुख के साथ होटल के कमरे से बाहर निकल कर अपने घर की तरफ चल दी.
मेरी आंखों में अब कल की उस होने वाली वाइल्ड और नेस्टी रात के सपने तैर रहे थे.
दोस्तो, हार्डकोर सेक्स विद अ लव्ड मैन का मजा कहानिके अगले भाग में क्या लिखूँगी, इसका अंदाजा तो आपको हो ही गया होगा, तो रोमांच को बना रहने देती हूँ और अगले भाग में मिलती हूँ.
आपके मेल व कमेंट्स का मुझे इंतजार रहेगा.