बनाना सेक्स कहानी में मेरा भाई मुझे चोदते हुए मेरी गांड में उंगली करता था तो मुझे डबल मजा आता था. अब मेरा मन चूत और गांड में एक साथ लंड लेने का था.
दोस्तो, मैं जाह्नवी मिश्रा एक बार फिर से आपको चुदाई की मस्ती के दरिया में गोता लगवाने के लिए हाजिर हूँ.
मैंने अपनी पिछली सेक्स कहानी
भाई के बाद डांस-पार्टनर ने होटल में चोदा
में आपको बताया था कि कैसे मेरे गदराए जिस्म को राहुल ने चोद दिया था और मेरी गांड की सील भी खोल दी थी.
राहुल मेरे साथ डांस पार्टनर था.
मेरे मामा का लड़का आशीष भी मेरी चूत लेता था, तो वे दोनों अलग अलग रह कर मेरे जिस्म को पूरा निचोड़ने का काम कर रहे थे.
अभी मेरी उम्र 21 साल हुई थी, मेरा जिस्म भी अपनी जवानी की खूबसूरती को और निखारने में लगा था.
उस वक्त मेरा वजन 50 किलो के आस पास और फिगर तब 30-28-30 था.
आप समझ ही गए होंगे कि मैं कैसी स्लिम-ट्रिम किस्म की लौंडिया हूँ.
भगवान ने शायद फुर्सत में ही बनाया था मुझे … पर अब चुद चुद कर मेरा जिस्म भर गया है और 34-32-36 का हो गया है.
मेरी इस फिगर को बनाने में मर्दों की जी तोड़ मेहनत है.
इधर मैं आपको बता दूं जिस जालिम कुत्ते राहुल ने मुझे बाजारू रंडी की तरह पहली बार मेरी गांड को चोदा था, मैंने उससे गुस्से में पांच दिन तक बात नहीं की थी.
फिर उसने मेरे पास आकर मुझे बहुत मनाया और वादा किया कि आगे कभी भी इस तरह मेरी मर्जी के बिना मेर चुदाई नहीं करेगा, तब मैंने उसको माफ कर दिया.
चूंकि वह अब मेरे ऊपर कुछ ज्यादा ही पैसे खर्च करने लगा था तो मैं भी उसे दुधारू गैया समझ कर लिफ्ट देने लगी थी.
वह कभी मुझे मूवी दिखाने ले जाता या कुछ कपड़े खरीद कर देता.
मुझे भी उसके साथ चुदने में मजा आने लगा था क्योंकि मेरे लिए उसका लंड लेना एक अलग सा अनुभव था.
पर मैं उससे बिल्कुल भी प्यार नहीं करती थी.
ये बात वह भी बहुत अच्छे से जानता था.
वह समझता था कि मैं उसके लिए सिर्फ उसकी हवस मिटाने का जरिया बन गई हूँ.
जबकि मैं समझती थी कि उसका खूंटा आशीष से ज्यादा मजा देता है इसलिए मैं उसके लंड को कभी कभी अपनी चुत या गांड में लेने लगी थी.
हालांकि उसको अपनी हवस मिटाने के लिए बहुत सारी रंडियां भी मिल जाती थीं पर जिन लड़कियों की गुफा अभी टाइट हैं, तो लड़के रंडियों को छोड़ हमारे जैसी माल लौंडियों के पीछे ही आएंगे न …
और फिर एक बात यह भी थी कि राहुल को चूत पीने का बहुत शौक था.
परंतु वह कभी भी किसी रंडी की चूत नहीं पीता था इसलिए भी वह मेरे पास चुदाई के आना पसंद करता था.
वह मजे से मेरी चुत चूसता और मेरी चुत को रगड़ कर बजाता था.
अभी मुझे राहुल के साथ 4 महीने हो गए थे परंतु इस बीच हमारे जिस्मानी ताल्लुकात केवल 5-6 बार ही बने थे और ज्यादातर हमारी चुदाई मेरे ही घर में हुई थी.
जब दिन में मामा मामी अपनी जॉब पर चले जाते और आशीष कॉलेज चला जाता था, तब राहुल मुझे घर पर आकर चोद देता था.
मैं उसके साथ होटल में इसलिए भी नहीं जाना चाहती थी क्योंकि वह नग्न अवस्था में ही अपने होटल के स्टाफ को कमरे में बुला लेता था.
उसी बीच में एक ऐसा अवसर भी आया कि मेरे सेमेस्टर परीक्षाएं थीं और मामी की भी कुछ तबियत खराब हो गई थी तो मैंने डांस क्लास को भी छोड़ दिया था.
सुरभि दीदी अपनी जॉब के कारण पुणे चली गई थीं तो घर में मामी की देखभाल के लिए मुझे ही ज्यादा समय देना होता था.
दीदी को यह भी नहीं पता था कि जिस राहुल को वे अपना मुँह बोला भाई मानती हैं, वह उनकी बुआ की बेटी को रंडी की तरह चोद चुका है.
यह सब आप मेरी पिछली सेक्स कहानी में भी पढ़ चुके हैं कि किस तरह से इस राहुल ने जालिम सांड की तरह मेरी गांड को चोद कर फाड़ दिया था.
उस वक्त मैं इस सांड से भिखारिन की तरह दया की भीख मांग रही थी.
पर कहते हैं ना कि लड़कों को जब पहली बार किसी हॉट लड़की की चूत और गांड चोदने मिलती है, तो फिर वे अपने आप की भी नहीं सुनते हैं.
वैसे भी दीदी का सगा भाई तो मुझे हफ्ते में तीन दिन बजा ही रहा था और जब से मैंने आशीष को यह बात बताई कि राहुल ने मेरी गांड मारी है, तो उसके बाद तो आशीष भी मेरी गांड का दीवाना हो गया था.
अब देर ना करती हुई मैं आज की अपनी इस बनाना सेक्स कहानी में आपको मजा देने ले चलती हूँ.
मैं आशीष से अपनी हर चुदाई की बात बता देती थी कि राहुल घर में कब आया और उसने मेरे साथ कैसे कैसे मजा किया और चोद कर कब वापस गया.
आशीष को भी इन सब बातों में बहुत मजा आता था.
रात को मैं उसके कंधे पर सर रख कर सारी बात बताती और वह मेरे मम्मों को छेड़ते हुए मेरी बातों का मजा लेता.
मुझे भी उसकी इन कामुक हरकतों में खूब मजा आता.
वह मुझे अब तक घर के हर कोने में नंगी करके चोद चुका था.
जब घर में कोई नहीं रहता, तो उस समय मुझे मूतने जाने तक के लिए आशीष की परमिशन लेनी पड़ती क्योंकि उसका कहना था कि तुम्हारा मन ना हो तो चूत चोदने मत देना … पर मूत तो पिला ही सकती हो.
उसको मेरी चूत से सी सी की आवाज के साथ निकलता हुआ मूत पीने का बहुत शौक था.
मुझे भी इसमें कोई दिक्कत नहीं होती थी.
उस समय आशीष पोर्न देखने के लिए अक्सर सीडी लेकर आया करता था क्योंकि तब मोबाइल में इतना अधिक इंटरनेट की सुविधा नहीं थी कि जब मन हो तो पोर्न वेबसाइट्स खोल लो.
उस समय डेटा भी बहुत मंहगा पड़ता था तो हम लोग घर में सीडी चला कर ब्लू-फिल्म देखते थे.
परंतु जब से राहुल ने मेरी चुदाई की, उसके बाद से तो आशीष घर में थ्रीसम या ग्रुप चुदाई वाली सीडी लेकर आने लगा था, जिसमें एक लड़की को 3 या 4 लड़के अलग अलग पोजीशनों में चोदते हुए दिखाई देते थे.
आशीष तो अब मुझसे यह भी बोलने लगा था- यार दीदी, मैं तुमको राहुल के साथ मिलकर चोदना चाहता हूँ.
मैं उसको बहुत मना करती- यार मैं राहुल अकेले को भी सही से नहीं झेल पाती, तो तुम दोनों तो मेरी जान ही निकाल दोगे!
यह कह कर मैं उसको टाल देती.
पर अब जब से आशीष मेरी चुदाई करते समय एक साथ दोनों छेद में मजा देने की कोशिश करता तो मुझे भी मजा आने लगता.
वह मेरी चूत में लंड पेल देता और अंगूठे या दो उंगलियों को एक साथ मेरी गांड में पेल कर गांड चोदने लगता.
जब वह मेरी गांड में लंड पेलता, तो दो उंगलियों से मेरी चूत चोदने लगता.
ऐसे ही अब वह धीरे धीरे मुझे थ्री-सम के लिए तैयार करने लगा था और मैं भी मन बनाने लगी थी.
एक दिन मामा घर में कच्चे केले लेकर आए थे, तो उनमें से कुछ केले बिल्कुल सीधे और आठ इंच के थे.
वे राहुल के लंड के जैसे ही थे.
दूसरे दिन जब मामा मामी अपने काम पर चले गए तो मैं किचन में साफ सफाई कर रही थी.
उस दिन मैंने लोअर टी-शर्ट पहनी थी.
यह ड्रेस अक्सर मैं घर में पहने रहती थी, तो उसी को पहन कर काम कर रही थी.
तभी आशीष पीछे से आ गया और उसने अचानक से मेरी गांड पर चपत लगा दी.
मैं ‘आउच …’ कह कर चिल्ला उठी.
वह अक्सर मेरे अकेले होने पर यह जरूर करता था.
उस दिन उसे मेरे साथ चुदाई किए हुए सात दिन हो गए थे तो वह बोला- यार, आज तेरी लेने की बहुत इच्छा हो रही है.
मैं भी मूड में थी तो हंस कर बोली- सच बोल ना, मेरी याद आ रही हैं या मेरी कचौरी (मेरी चूत को प्यार से कचौरी बोलता है) की?
उसने हाथ आगे लाकर मेरे दोनों बूब्स को पकड़ कर जोर से भींच दिया और पीछे से अपने लंड को मेरी गांड में घुसाने लगा.
वह बोला- आज कचौरी की नहीं, तेरी मुलायम गांड की याद आ रही है!
मैं बोली- ठीक है, बस 20 मिनट रुको, काम करके आती हूँ.
वह बोला- ठीक है … जब तक मैं भी अपना कुछ काम कर लूं.
वह मेरी गांड को पुनः चपत लगा कर चला गया.
मैं जब अपने काम से फ्री हुई तो वह किचन के बाहर रखे सोफे पर बैठ कर मामा का कुछ काम कर रहा था.
मुझे देख कर वह बोला- आप आओ बैठो!
मैं उसके बगल में जाकर उसके कंधे पर सर रख कर बैठ गई. हम दोनों पति पत्नी की तरह बैठे थे क्योंकि अकेले में हम दोनों पति पत्नी को तरह ही रहते हैं.
उसने मुझे गाल पर पप्पी ली और अपना काम करने लगा.
कुछ देर बाद जब उसका काम खत्म हुआ तो वह मेरे साथ लिप किस करने लगा और धीरे धीरे मेरे कपड़े उतारने लगा.
उसने मेरी टी-शर्ट व लोअर उतारे और ब्रा पैंटी को भी खोल कर मेरे तन से जुदा कर दिए.
अब एक जवान बहन अपने भाई के सामने नंगी खड़ी हो गई.
उसने प्यार से मुझे सोफे पर कुतिया बनाया और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर चोदने लगा.
उसके हर झटके को सह कर मैं अपनी मादक सिसकारी निकाल कर उसका जोश बढ़ाती.
मैं ‘आआह .. आह उम्मम्म’ करती हुई उसके झटकों का सम्मान करने लगी.
तभी उसने एकदम से जल्दी से अपना लंड चुत से बाहर निकाल लिया जबकि अमूमन उसका पहला राउंड लंबा चलता है.
मैं बोली- क्या हुआ?
उसने मेरी नंगी जांघ पर जोर से चपत लगाई और गुद्दी भर ली.
मेरी आह निकल गई.
मेरा जिस्म इतना ज्यादा दूधिया और मुलायम है कि कोई जोर से पकड़ भी ले … तो उसकी उंगलियों के निशान पड़ जाते हैं.
वह बोला- रूक … आज कुछ नया करते हैं.
वह किचन से एक कच्चा केला ले आया.
मैं बोली- ये किस लिए?
वह बोला- देखती जाओ, आगे क्या क्या होता है … चलो कमरे में आ जाओ.
अब हम दोनों मामा मामी के कमरे में आ गए जहां हमने साथ में एक थ्रीसम वाली सेक्स वीडियो लगा ली.
मैं समझ तो गई कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है.
वह हमारे कमरे से दो कंडोम भी ले आया.
एक नॉर्मल वाला और एक सुपर डॉटेड.
उसने केले को हाथ में लेकर कहा- इसको राहुल का लंड समझ कर नॉर्मल कंडोम पहनाओ.
यह कह कर उसने खुद के लंड पर सुपर डॉटेड कंडोम पहन लिया.
मैं समझ गई थी कि आज मेरे साथ कुछ तो गलत होने वाला है.
वह जमीन पर लेट गया और मुझे अपने लंड पर बैठने का बोला.
मैं धीरे धीरे चुत को लंड पर फिक्स करती हुई उसके सात इंच के लंड को पूरा अपनी चूत में लील गई.
अब उसने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और पीछे मेरी गांड में धीरे धीरे से केले को अन्दर डालने लगा.
मैं आज पहली बार एक साथ दोनों छेद में 7 और 8 इंच के लंड ले रही थी.
आगे तो कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन पीछे इतना बड़ा केला लेने से मैं दर्द के मारे छटपटाने लगी.
उसने एक हाथ से मुझे अपने से चिपकाए रखा और दूसरे हाथ से पूरा केला मेरी गांड में डाल दिया.
मैं गाली देने लगी- अअह मादरचोद… छोड़ दे मुझे … बुरमारी के … बहन के लौड़े … मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा है!
पर वह मेरी आखों में आंख डाल कर धीमे धीमे मुस्कुराता रहा.
मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था इसलिए मैंने जोर जोर से उसके सीने पर दोनों हाथ से मुक्का मारने शुरू कर दिए.
मैं बोली- बहनचोद, मैं तेरी बहन हूं, कोई रंडी नहीं जो तुझे मेरे दर्द की बिल्कुल फिक्र नहीं!
वह बोला- बस थोड़ी देर दर्द सहन कर ले!
मैं उसके ऊपर वैसे ही लेटी रही.
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर देखा.
केले का सिर्फ आगे का डंठल उसके हाथ में था, बाकी का पूरा 8 इंच केला मेरी गांड की गहराई में समा गया था.
मुझे खुद पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं केला गांड में खा गई हूँ.
पर मैं राहुल के 8 इंच लंड से अपनी गांड की कई बार खुदाई करवा चुकी थी और आशीष का भी 7 इंच लंड मेरी गांड खा चुकी थी तो दर्द सिर्फ एक साथ दोनों लंड लेने के कारण हो रहा था.
हालांकि वह दर्द भी कुछ ही देर में मजा में बदल गया.
मैं अब उसके ऊपर बैठ कर उसके लंड को चोद रही थी और वह नीचे से अपने हाथ से केला को मेरी गांड में अन्दर बाहर करने में लगा था.
फिर वह एकदम से रूक गया और उसने पूछा कि मजा आ रहा है न?
मैंने सिर्फ हम्म्म के साथ हामी भरी.
वह बोला- सोचो अगर राहुल साथ में होता तो कितना मजा आता!
मैं कुछ नहीं बोली.
वह पुनः बोला- क्या सोच रही हो कुछ तो बोलो?
मैं बोली- परंतु वह राजी कैसे होगा?
आशीष बोला- ये सब तुम मुझ पर छोड़ दो.
मैंने ओके कह दिया.
इसके बाद आशीष ने मेरी पहले चूत गांड को तबियत से चोदा और माल झाड़ कर अलग हो गया.
मैं उठ कर नहाने जाने लगी तो उसने राहुल को शामिल करने की एक प्लानिंग बनाई, जो मुझे भी काफी पसंद आई.
कुछ दिन तक हम दोनों उस दिन का इंतजार करने लगे जब मामा मामी कुछ दिन के लिए घर से बाहर जाएं.
मुझे पता था कि मुझे इन दोनों से एक साथ चुदाने में मेरी हालत मरी कुतिया के जैसी हो जाएगी तो सही होने मैं 2-3 दिन का समय तो लगता ही लगता.
वैसी स्थिति में मुझे मामी को जबाव देना पड़ता तो उनकी तीन चार दिन की गैरहाजिरी जरूरी थी.
करीब एक महीने बाद मामी की रिश्तेदारी में किसी की मौत हो गई तो मामा मामी दोनों ही 5-6 दिन के लिए घर से जाने वाले थे.
मैं सच बताऊं तो थ्रीसम चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी क्योंकि मुझे डर था कि राहुल तो हवसी दरिंदा जालिम है ही, अगर मेरा भाई भी उसके संग हो गया तो मेरी तो मौत ही आ जाएगी.
अगले दिन आशीष ने मुझे प्लानिंग के अनुसार काम करने का कहा.
मैंने राहुल को कॉल करके दस बजे घर आने का बोला.
इससे पहले भी राहुल मेरे मामा के घर आकर मेरी चुदाई कर चुका था तो इसमें कुछ नया नहीं था.
आशीष अपने कॉलेज के लिए निकल गया और मैंने भी बाथरूम में जाकर अपनी बॉडी की थोड़ी बहुत साफ सफाई कर दी.
आर्मपिट, चूत के बाल और फेस का भी अच्छे से फेशियल कर लिया.
फिर नहा कर जब मैं कमरे में आई तो मैंने आईने में घूम घूम कर अपनी चूत गांड को देखा कि कैसे आज दो लंड एक साथ मेरी चुत गांड में जाने वाले हैं.
यह सब सोच कर ही मेरी चुत पानी छोड़ रही थी.
दोस्तो, आपको मेरी बनाना सेक्स कहानी पढ़ कर आपको कितना मजा आ रहा है, प्लीज मेल लिख कर जरूर बताएं.
अगले भाग में मैं आपको और ज्यादा उत्तेजित करने की कोशिश करूंगी.
दोस्तो, मैं जाह्नवी मिश्रा एक बार फिर से आपको चुदाई की मस्ती के दरिया में गोता लगवाने के लिए हाजिर हूँ.
मैंने अपनी पिछली सेक्स कहानी
भाई के बाद डांस-पार्टनर ने होटल में चोदा
में आपको बताया था कि कैसे मेरे गदराए जिस्म को राहुल ने चोद दिया था और मेरी गांड की सील भी खोल दी थी.
राहुल मेरे साथ डांस पार्टनर था.
मेरे मामा का लड़का आशीष भी मेरी चूत लेता था, तो वे दोनों अलग अलग रह कर मेरे जिस्म को पूरा निचोड़ने का काम कर रहे थे.
अभी मेरी उम्र 21 साल हुई थी, मेरा जिस्म भी अपनी जवानी की खूबसूरती को और निखारने में लगा था.
उस वक्त मेरा वजन 50 किलो के आस पास और फिगर तब 30-28-30 था.
आप समझ ही गए होंगे कि मैं कैसी स्लिम-ट्रिम किस्म की लौंडिया हूँ.
भगवान ने शायद फुर्सत में ही बनाया था मुझे … पर अब चुद चुद कर मेरा जिस्म भर गया है और 34-32-36 का हो गया है.
मेरी इस फिगर को बनाने में मर्दों की जी तोड़ मेहनत है.
इधर मैं आपको बता दूं जिस जालिम कुत्ते राहुल ने मुझे बाजारू रंडी की तरह पहली बार मेरी गांड को चोदा था, मैंने उससे गुस्से में पांच दिन तक बात नहीं की थी.
फिर उसने मेरे पास आकर मुझे बहुत मनाया और वादा किया कि आगे कभी भी इस तरह मेरी मर्जी के बिना मेर चुदाई नहीं करेगा, तब मैंने उसको माफ कर दिया.
चूंकि वह अब मेरे ऊपर कुछ ज्यादा ही पैसे खर्च करने लगा था तो मैं भी उसे दुधारू गैया समझ कर लिफ्ट देने लगी थी.
वह कभी मुझे मूवी दिखाने ले जाता या कुछ कपड़े खरीद कर देता.
मुझे भी उसके साथ चुदने में मजा आने लगा था क्योंकि मेरे लिए उसका लंड लेना एक अलग सा अनुभव था.
पर मैं उससे बिल्कुल भी प्यार नहीं करती थी.
ये बात वह भी बहुत अच्छे से जानता था.
वह समझता था कि मैं उसके लिए सिर्फ उसकी हवस मिटाने का जरिया बन गई हूँ.
जबकि मैं समझती थी कि उसका खूंटा आशीष से ज्यादा मजा देता है इसलिए मैं उसके लंड को कभी कभी अपनी चुत या गांड में लेने लगी थी.
हालांकि उसको अपनी हवस मिटाने के लिए बहुत सारी रंडियां भी मिल जाती थीं पर जिन लड़कियों की गुफा अभी टाइट हैं, तो लड़के रंडियों को छोड़ हमारे जैसी माल लौंडियों के पीछे ही आएंगे न …
और फिर एक बात यह भी थी कि राहुल को चूत पीने का बहुत शौक था.
परंतु वह कभी भी किसी रंडी की चूत नहीं पीता था इसलिए भी वह मेरे पास चुदाई के आना पसंद करता था.
वह मजे से मेरी चुत चूसता और मेरी चुत को रगड़ कर बजाता था.
अभी मुझे राहुल के साथ 4 महीने हो गए थे परंतु इस बीच हमारे जिस्मानी ताल्लुकात केवल 5-6 बार ही बने थे और ज्यादातर हमारी चुदाई मेरे ही घर में हुई थी.
जब दिन में मामा मामी अपनी जॉब पर चले जाते और आशीष कॉलेज चला जाता था, तब राहुल मुझे घर पर आकर चोद देता था.
मैं उसके साथ होटल में इसलिए भी नहीं जाना चाहती थी क्योंकि वह नग्न अवस्था में ही अपने होटल के स्टाफ को कमरे में बुला लेता था.
उसी बीच में एक ऐसा अवसर भी आया कि मेरे सेमेस्टर परीक्षाएं थीं और मामी की भी कुछ तबियत खराब हो गई थी तो मैंने डांस क्लास को भी छोड़ दिया था.
सुरभि दीदी अपनी जॉब के कारण पुणे चली गई थीं तो घर में मामी की देखभाल के लिए मुझे ही ज्यादा समय देना होता था.
दीदी को यह भी नहीं पता था कि जिस राहुल को वे अपना मुँह बोला भाई मानती हैं, वह उनकी बुआ की बेटी को रंडी की तरह चोद चुका है.
यह सब आप मेरी पिछली सेक्स कहानी में भी पढ़ चुके हैं कि किस तरह से इस राहुल ने जालिम सांड की तरह मेरी गांड को चोद कर फाड़ दिया था.
उस वक्त मैं इस सांड से भिखारिन की तरह दया की भीख मांग रही थी.
पर कहते हैं ना कि लड़कों को जब पहली बार किसी हॉट लड़की की चूत और गांड चोदने मिलती है, तो फिर वे अपने आप की भी नहीं सुनते हैं.
वैसे भी दीदी का सगा भाई तो मुझे हफ्ते में तीन दिन बजा ही रहा था और जब से मैंने आशीष को यह बात बताई कि राहुल ने मेरी गांड मारी है, तो उसके बाद तो आशीष भी मेरी गांड का दीवाना हो गया था.
अब देर ना करती हुई मैं आज की अपनी इस बनाना सेक्स कहानी में आपको मजा देने ले चलती हूँ.
मैं आशीष से अपनी हर चुदाई की बात बता देती थी कि राहुल घर में कब आया और उसने मेरे साथ कैसे कैसे मजा किया और चोद कर कब वापस गया.
आशीष को भी इन सब बातों में बहुत मजा आता था.
रात को मैं उसके कंधे पर सर रख कर सारी बात बताती और वह मेरे मम्मों को छेड़ते हुए मेरी बातों का मजा लेता.
मुझे भी उसकी इन कामुक हरकतों में खूब मजा आता.
वह मुझे अब तक घर के हर कोने में नंगी करके चोद चुका था.
जब घर में कोई नहीं रहता, तो उस समय मुझे मूतने जाने तक के लिए आशीष की परमिशन लेनी पड़ती क्योंकि उसका कहना था कि तुम्हारा मन ना हो तो चूत चोदने मत देना … पर मूत तो पिला ही सकती हो.
उसको मेरी चूत से सी सी की आवाज के साथ निकलता हुआ मूत पीने का बहुत शौक था.
मुझे भी इसमें कोई दिक्कत नहीं होती थी.
उस समय आशीष पोर्न देखने के लिए अक्सर सीडी लेकर आया करता था क्योंकि तब मोबाइल में इतना अधिक इंटरनेट की सुविधा नहीं थी कि जब मन हो तो पोर्न वेबसाइट्स खोल लो.
उस समय डेटा भी बहुत मंहगा पड़ता था तो हम लोग घर में सीडी चला कर ब्लू-फिल्म देखते थे.
परंतु जब से राहुल ने मेरी चुदाई की, उसके बाद से तो आशीष घर में थ्रीसम या ग्रुप चुदाई वाली सीडी लेकर आने लगा था, जिसमें एक लड़की को 3 या 4 लड़के अलग अलग पोजीशनों में चोदते हुए दिखाई देते थे.
आशीष तो अब मुझसे यह भी बोलने लगा था- यार दीदी, मैं तुमको राहुल के साथ मिलकर चोदना चाहता हूँ.
मैं उसको बहुत मना करती- यार मैं राहुल अकेले को भी सही से नहीं झेल पाती, तो तुम दोनों तो मेरी जान ही निकाल दोगे!
यह कह कर मैं उसको टाल देती.
पर अब जब से आशीष मेरी चुदाई करते समय एक साथ दोनों छेद में मजा देने की कोशिश करता तो मुझे भी मजा आने लगता.
वह मेरी चूत में लंड पेल देता और अंगूठे या दो उंगलियों को एक साथ मेरी गांड में पेल कर गांड चोदने लगता.
जब वह मेरी गांड में लंड पेलता, तो दो उंगलियों से मेरी चूत चोदने लगता.
ऐसे ही अब वह धीरे धीरे मुझे थ्री-सम के लिए तैयार करने लगा था और मैं भी मन बनाने लगी थी.
एक दिन मामा घर में कच्चे केले लेकर आए थे, तो उनमें से कुछ केले बिल्कुल सीधे और आठ इंच के थे.
वे राहुल के लंड के जैसे ही थे.
दूसरे दिन जब मामा मामी अपने काम पर चले गए तो मैं किचन में साफ सफाई कर रही थी.
उस दिन मैंने लोअर टी-शर्ट पहनी थी.
यह ड्रेस अक्सर मैं घर में पहने रहती थी, तो उसी को पहन कर काम कर रही थी.
तभी आशीष पीछे से आ गया और उसने अचानक से मेरी गांड पर चपत लगा दी.
मैं ‘आउच …’ कह कर चिल्ला उठी.
वह अक्सर मेरे अकेले होने पर यह जरूर करता था.
उस दिन उसे मेरे साथ चुदाई किए हुए सात दिन हो गए थे तो वह बोला- यार, आज तेरी लेने की बहुत इच्छा हो रही है.
मैं भी मूड में थी तो हंस कर बोली- सच बोल ना, मेरी याद आ रही हैं या मेरी कचौरी (मेरी चूत को प्यार से कचौरी बोलता है) की?
उसने हाथ आगे लाकर मेरे दोनों बूब्स को पकड़ कर जोर से भींच दिया और पीछे से अपने लंड को मेरी गांड में घुसाने लगा.
वह बोला- आज कचौरी की नहीं, तेरी मुलायम गांड की याद आ रही है!
मैं बोली- ठीक है, बस 20 मिनट रुको, काम करके आती हूँ.
वह बोला- ठीक है … जब तक मैं भी अपना कुछ काम कर लूं.
वह मेरी गांड को पुनः चपत लगा कर चला गया.
मैं जब अपने काम से फ्री हुई तो वह किचन के बाहर रखे सोफे पर बैठ कर मामा का कुछ काम कर रहा था.
मुझे देख कर वह बोला- आप आओ बैठो!
मैं उसके बगल में जाकर उसके कंधे पर सर रख कर बैठ गई. हम दोनों पति पत्नी की तरह बैठे थे क्योंकि अकेले में हम दोनों पति पत्नी को तरह ही रहते हैं.
उसने मुझे गाल पर पप्पी ली और अपना काम करने लगा.
कुछ देर बाद जब उसका काम खत्म हुआ तो वह मेरे साथ लिप किस करने लगा और धीरे धीरे मेरे कपड़े उतारने लगा.
उसने मेरी टी-शर्ट व लोअर उतारे और ब्रा पैंटी को भी खोल कर मेरे तन से जुदा कर दिए.
अब एक जवान बहन अपने भाई के सामने नंगी खड़ी हो गई.
उसने प्यार से मुझे सोफे पर कुतिया बनाया और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर चोदने लगा.
उसके हर झटके को सह कर मैं अपनी मादक सिसकारी निकाल कर उसका जोश बढ़ाती.
मैं ‘आआह .. आह उम्मम्म’ करती हुई उसके झटकों का सम्मान करने लगी.
तभी उसने एकदम से जल्दी से अपना लंड चुत से बाहर निकाल लिया जबकि अमूमन उसका पहला राउंड लंबा चलता है.
मैं बोली- क्या हुआ?
उसने मेरी नंगी जांघ पर जोर से चपत लगाई और गुद्दी भर ली.
मेरी आह निकल गई.
मेरा जिस्म इतना ज्यादा दूधिया और मुलायम है कि कोई जोर से पकड़ भी ले … तो उसकी उंगलियों के निशान पड़ जाते हैं.
वह बोला- रूक … आज कुछ नया करते हैं.
वह किचन से एक कच्चा केला ले आया.
मैं बोली- ये किस लिए?
वह बोला- देखती जाओ, आगे क्या क्या होता है … चलो कमरे में आ जाओ.
अब हम दोनों मामा मामी के कमरे में आ गए जहां हमने साथ में एक थ्रीसम वाली सेक्स वीडियो लगा ली.
मैं समझ तो गई कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है.
वह हमारे कमरे से दो कंडोम भी ले आया.
एक नॉर्मल वाला और एक सुपर डॉटेड.
उसने केले को हाथ में लेकर कहा- इसको राहुल का लंड समझ कर नॉर्मल कंडोम पहनाओ.
यह कह कर उसने खुद के लंड पर सुपर डॉटेड कंडोम पहन लिया.
मैं समझ गई थी कि आज मेरे साथ कुछ तो गलत होने वाला है.
वह जमीन पर लेट गया और मुझे अपने लंड पर बैठने का बोला.
मैं धीरे धीरे चुत को लंड पर फिक्स करती हुई उसके सात इंच के लंड को पूरा अपनी चूत में लील गई.
अब उसने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और पीछे मेरी गांड में धीरे धीरे से केले को अन्दर डालने लगा.
मैं आज पहली बार एक साथ दोनों छेद में 7 और 8 इंच के लंड ले रही थी.
आगे तो कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन पीछे इतना बड़ा केला लेने से मैं दर्द के मारे छटपटाने लगी.
उसने एक हाथ से मुझे अपने से चिपकाए रखा और दूसरे हाथ से पूरा केला मेरी गांड में डाल दिया.
मैं गाली देने लगी- अअह मादरचोद… छोड़ दे मुझे … बुरमारी के … बहन के लौड़े … मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा है!
पर वह मेरी आखों में आंख डाल कर धीमे धीमे मुस्कुराता रहा.
मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था इसलिए मैंने जोर जोर से उसके सीने पर दोनों हाथ से मुक्का मारने शुरू कर दिए.
मैं बोली- बहनचोद, मैं तेरी बहन हूं, कोई रंडी नहीं जो तुझे मेरे दर्द की बिल्कुल फिक्र नहीं!
वह बोला- बस थोड़ी देर दर्द सहन कर ले!
मैं उसके ऊपर वैसे ही लेटी रही.
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर देखा.
केले का सिर्फ आगे का डंठल उसके हाथ में था, बाकी का पूरा 8 इंच केला मेरी गांड की गहराई में समा गया था.
मुझे खुद पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं केला गांड में खा गई हूँ.
पर मैं राहुल के 8 इंच लंड से अपनी गांड की कई बार खुदाई करवा चुकी थी और आशीष का भी 7 इंच लंड मेरी गांड खा चुकी थी तो दर्द सिर्फ एक साथ दोनों लंड लेने के कारण हो रहा था.
हालांकि वह दर्द भी कुछ ही देर में मजा में बदल गया.
मैं अब उसके ऊपर बैठ कर उसके लंड को चोद रही थी और वह नीचे से अपने हाथ से केला को मेरी गांड में अन्दर बाहर करने में लगा था.
फिर वह एकदम से रूक गया और उसने पूछा कि मजा आ रहा है न?
मैंने सिर्फ हम्म्म के साथ हामी भरी.
वह बोला- सोचो अगर राहुल साथ में होता तो कितना मजा आता!
मैं कुछ नहीं बोली.
वह पुनः बोला- क्या सोच रही हो कुछ तो बोलो?
मैं बोली- परंतु वह राजी कैसे होगा?
आशीष बोला- ये सब तुम मुझ पर छोड़ दो.
मैंने ओके कह दिया.
इसके बाद आशीष ने मेरी पहले चूत गांड को तबियत से चोदा और माल झाड़ कर अलग हो गया.
मैं उठ कर नहाने जाने लगी तो उसने राहुल को शामिल करने की एक प्लानिंग बनाई, जो मुझे भी काफी पसंद आई.
कुछ दिन तक हम दोनों उस दिन का इंतजार करने लगे जब मामा मामी कुछ दिन के लिए घर से बाहर जाएं.
मुझे पता था कि मुझे इन दोनों से एक साथ चुदाने में मेरी हालत मरी कुतिया के जैसी हो जाएगी तो सही होने मैं 2-3 दिन का समय तो लगता ही लगता.
वैसी स्थिति में मुझे मामी को जबाव देना पड़ता तो उनकी तीन चार दिन की गैरहाजिरी जरूरी थी.
करीब एक महीने बाद मामी की रिश्तेदारी में किसी की मौत हो गई तो मामा मामी दोनों ही 5-6 दिन के लिए घर से जाने वाले थे.
मैं सच बताऊं तो थ्रीसम चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी क्योंकि मुझे डर था कि राहुल तो हवसी दरिंदा जालिम है ही, अगर मेरा भाई भी उसके संग हो गया तो मेरी तो मौत ही आ जाएगी.
अगले दिन आशीष ने मुझे प्लानिंग के अनुसार काम करने का कहा.
मैंने राहुल को कॉल करके दस बजे घर आने का बोला.
इससे पहले भी राहुल मेरे मामा के घर आकर मेरी चुदाई कर चुका था तो इसमें कुछ नया नहीं था.
आशीष अपने कॉलेज के लिए निकल गया और मैंने भी बाथरूम में जाकर अपनी बॉडी की थोड़ी बहुत साफ सफाई कर दी.
आर्मपिट, चूत के बाल और फेस का भी अच्छे से फेशियल कर लिया.
फिर नहा कर जब मैं कमरे में आई तो मैंने आईने में घूम घूम कर अपनी चूत गांड को देखा कि कैसे आज दो लंड एक साथ मेरी चुत गांड में जाने वाले हैं.
यह सब सोच कर ही मेरी चुत पानी छोड़ रही थी.
दोस्तो, आपको मेरी बनाना सेक्स कहानी पढ़ कर आपको कितना मजा आ रहा है, प्लीज मेल लिख कर जरूर बताएं.
अगले भाग में मैं आपको और ज्यादा उत्तेजित करने की कोशिश करूंगी.